फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi University Admission 2022: कट-ऑफ आधारित प्रवेश प्रक्रिया खत्म करना चाहते हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति, बताया यह कारण

Sun, 05 Dec 2021 07:15 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

DU admission process: अगले सत्र से दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन की परिपाटी बदल जाएगी। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति कट-ऑफ आधारित प्रवेश प्रक्रिया के पक्ष में नहीं है। 
विज्ञापन
1 of 5
प्रो योगेश सिंह - फोटो : DTU
अगले सत्र से दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन की परिपाटी बदल जाएगी। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति कट-ऑफ आधारित प्रवेश प्रक्रिया के पक्ष में नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो योगेश सिंह ने कहा कि मौजूदा कट-ऑफ आधारित प्रवेश प्रणाली छात्रों को उन बोर्डों के छात्रों के लिए दाखिले में बाधा बनती है जहां अंकन "सख्त" होता है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह परिदृश्य एक साल में बदल जाएगा।

प्रो योगेश सिंह ने कहा कि उन्होंने प्रवेश के आंकड़ों को देखने के लिए एक समिति का गठन किया है और पैनल की सिफारिशों पर आगामी 10 दिसंबर को होने वाली अकादमिक परिषद की बैठक में विचार किया जाएगा।  कुलपति ने कहा, हमारे पास प्रवेश के लिए कई विकल्प हैं - एक मौजूदा प्रणाली के साथ जारी रखने के लिए, दूसरा विभिन्न बोर्डों के अंकों का सामान्यीकरण हो सकता है, तीसरा प्रवेश परीक्षा हो सकता है और चौथा प्रवेश परीक्षा के लिए 50 प्रतिशत वेटेज और बोर्ड के अंक को 50 प्रतिशत वेटेज दे सकते हैं। 
 
विज्ञापन

2 of 5
Delhi University - फोटो : Social Media

डीयू प्रवेश प्रक्रिया पर निर्णय अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद को लेना है

कट-ऑफ (मेरिट-आधारित) प्रणाली को जारी रखने पर अपने व्यक्तिगत विचार के बारे में बात करते हुए, सिंह ने कहा कि वह इसके लिए अधिकृत नहीं हैं। इस संबंध में निर्णय अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद को लेने देना चाहिए। कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि जिन बोर्डों के पास "लचीली" अंकन प्रणाली है, उन्हें मौजूदा प्रणाली में दूसरों पर एक फायदा है, जबकि सख्त बोर्डों के छात्र पीड़ित हैं। इस संबंध में निर्णय अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद को लेने देना चाहिए।

 
विज्ञापन

3 of 5
दिल्ली विश्वविद्यालय का 97 वां वार्षिक दीक्षांत समारोह - फोटो : twitter

विसंगतियों को दूर करने की जरूरत, एक साल में चीजें बदल जाएंगी

सिंह ने कहा, उदाहरण के लिए, यूपी बोर्ड के छात्रों को दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं मिल रहा है। कुछ बोर्ड उदार नहीं हैं। यहां तक कि हरियाणा बोर्ड और पड़ोसी राज्यों के छात्रों को भी यहां प्रवेश नहीं मिल रहा है, लेकिन हमें केरल से बड़ी संख्या में छात्र मिल रहे हैं, लेकिन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश से नहीं। उन्होंने कहा, यह अच्छी बात है कि हम केरल में लोकप्रिय हैं, लेकिन हमें इन विसंगतियों को दूर करने की जरूरत है। इस बात पर जोर देते हुए कि विभिन्न प्रक्रियाओं पर फिर से विचार करने का समय आ गया है, उन्होंने कहा कि एक साल में चीजें बदल जाएंगी।
 

4 of 5
सीयूसीईटी : सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

प्रवेश परीक्षा भी फुलप्रूफ सिस्टम नहीं, CUCET अपनाएंगे

विभिन्न प्रवेश मानदंड के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने हर संभव प्रणाली के पेशेवरों और विपक्षों को लागू किया जा सकता है। यदि छात्र के शत-प्रतिशत अंक हैं, तो सामान्यीकरण क्या करेगा? अगर हम कुछ औसत निकाल भी लें तो यह ज्यादा होगा। प्रवेश परीक्षा भी फुलप्रूफ सिस्टम नहीं है। उन्होंने कहा, लोग कहते हैं कि यह कोचिंग को प्रोत्साहित करता है और छात्रों के लिए अनावश्यक तनाव का कारण बनता है। फिर सेंट्रल यूनिवर्सिटीज कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CUCET, केंद्र सरकार ने इसे आयोजित करने का फैसला किया है) भी एक विकल्प है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
दिल्ली विवि में दाखिले के लिए जुटी विद्यार्थियों की भीड़ - फोटो : PTI

डीयू कॉलेजों में कट-ऑफ के बावजूद सीटों से ज्यादा आवेदक

इस साल पांचवीं कट-ऑफ तक, 74,667 छात्रों ने 70,000 स्नातक सीटों के मुकाबले प्रवेश प्राप्त किया था, जिसमें हिंदू कॉलेज जैसे कुछ कॉलेजों में अधिक प्रवेश देखा गया था। एक बार जब एक कॉलेज द्वारा कट-ऑफ प्रतिशत घोषित कर दिया जाता है, तो शर्त को पूरा करने वाले सभी आवेदकों को प्रवेश दिया जाना चाहिए, भले ही पाठ्यक्रम के लिए सीटों की संख्या कम हो। पिछले साल, पांचवीं कट-ऑफ तक, 67,781 छात्रों ने 70,000 सीटों के मुकाबले प्रवेश प्राप्त किया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें