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कोविड-19 : क्या है कोरोना की तीसरी लहर? क्या और कहर बरपाएगी महामारी? कैसे होगा बचाव? जानिए सबकुछ

Sun, 23 May 2021 10:17 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Coronavirus in India: महामारी की लहर क्या है, इसका निर्धारण कैसे करते हैं, यह कब तक आएगी और कैसे बचा जा सकता है। आइए बताते हैं...  
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कोरोना की तीसरी लहर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
देश में वैश्विक संक्रामक महामारी कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रकोप से कोहराम मचा हुआ है। कोरोना महामारी प्रतिदिन लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले रही है और हजारों की जिंदगियां निगल रही है। लगातार तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों से देश की स्वास्थ्य प्रणाली चरमरा गई। अस्पतालों में बेड, वेंटिलेटर, जीवन रक्षक दवाओं और ऑक्सीजन की भारी किल्लत जारी है।
इस बीच, देश के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने लोगों को महामारी की तीसरी लहर को लेकर चेताया है। वैज्ञानिक सलाहकार ही नहीं कई अन्य विशेषज्ञ और स्वास्थ्य अधिकारी भी अब नियमित रूप से लोगों को कोरोना वायरस की तीसरी लहर की संभावना के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए सरकार ने संक्रमण के कहर से लोगों को बचाने के लिए तैयारियां शुरू कर दीं हैं।
ऐसे में आपके मन में भी सवाल उठ रहे होंगे कि महामारी की लहर क्या है, इसका निर्धारण कैसे करते हैं, यह कब तक आएगी और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है तो आइए हम आपको बताते हैं...
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अमेरिका में कोरोना की लहर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
एक महामारी में लहर क्या है?
महामारी में लहर क्या होती है, इसकी कोई किताबी परिभाषा नहीं है। विश्लेषक, लंबे समय तक संक्रमण के बढ़ते और घटते मामलों का वर्णन करने के लिए इस शब्द का सामान्य रूप से उपयोग करते हैं। ग्रोथ कर्व यानी विकास वक्र एक लहर के आकार जैसा दिखाई देता है। ऐतिहासिक रूप से, लहर शब्द का प्रयोग रोग की मौसम को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। प्रकृति में कई वायरल संक्रमण मौसमी होते हैं, और वे निश्चित समय अंतराल के बाद पुनरावृत्ति करते हैं। 
संक्रमण बढ़ता है और फिर नीचे आता है, केवल कुछ समय बाद फिर से बढ़ने लगता है। इसी उतार-चढ़ाव को लहर कहा जाता है। भारत में महामारी की अब तक दो बड़ी लहरें देखी गई हैं लेकिन बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका में कोरोना संक्रमण की शुरुआती तीन लहरों ने काफी कहर बरपाया था, मगर वहां चौथी लहर के बाद मामलों में तेजी से गिरावट आई और अब पर्याप्त टीकाकरण के बाद अमेरिका को मास्क की पाबंदी से मुक्ति मिलने जा रही है। जबकि भारत में अभी इस महामारी की दूसरी लहर का खौफनाक प्रकोप देखने को मिल रहा है। 
 
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भारत में कोरोना की तीसरी लहर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
भारत में कोरोना की लहरें
कोविड -19 महामारी पिछले डेढ़ साल से लगातार जारी है, लेकिन हर भौगोलिक क्षेत्र यानी तकरीबन प्रत्येक देश में, मामलों में वृद्धि के ऐसे दौर आए हैं, जिसके बाद एक सापेक्षिक गिरावट भी आई है। भारत में अब तक दो अलग-अलग अवधि के उतार-चढ़ाव आए हैं, जिनके बीच में एक लंबे समय का अंतराल रहा। देश में 01 मार्च, 2020 के बाद कोरोना का प्रकोप शुरू हुआ था। 16 सितंबर, 2020 को पहली बार देश में 24 घंटे में 97,894 नए मामले सामने आए थे।
इसके बाद, मामलों में कमी आई लेकिन 06 मई, 2021 को 4,14,188 नए मामले सामने आए थे। इसके बाद फिर गिरावट आने लगी और 18 मई, 2021 को 2,67,334 नए संक्रमित ही सामने आए। बता दें कि देश में आधिकारिक तौर पर कोरोना संक्रमण के कुल मामले दो करोड़ 63 लाख के करीब पहुंच चुके हैं जबकि दो लाख 95 हजार से ज्यादा मौतें हुईं हैं। वहीं, अब दो करोड़ 30 लाख से अधिक मरीज स्वस्थ हुए हैं और 19 करोड 33 लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है।  
 

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दिल्ली में कोरोना की लहर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
राज्यों में हालात अलग कैसे?
उदाहरण के लिए, किसी देश, राज्य या शहर के भीतर छोटे क्षेत्रों की अपनी लहरें हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली ने अब अप्रैल-मई 2021 तक चार लहरों का अनुभव किया है। वर्तमान लहर से पहले भी दिल्ली के कोरोना संक्रमण के प्रसार का ग्राफ देखने पर तीन अलग-अलग उच्च स्तर दिखाइे देते हैं, जिन्हें हम पीक लेवल यानी बड़ी लहर कह सकते हैं।  
जबकि राजस्थान या मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में, फरवरी 2021 तक कोरोना संक्रमण के प्रसार का ग्राफ देखने पर में पता चलेगा कि वहां वर्तमान से पहले कोई विशेष बड़ी लहर नहीं दिखाई दी। हालांकि, छोटे स्तर पर सिर्फ दो लहरें सितंबर और नवंबर 2020 में देखी गई जब संक्रमण तेजी से बढ़ा था। लेकिन एक बड़ी गिरावट के बाद अप्रैल में एकदम से मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली। ऐसी स्थिति में अलग-अलग लहरों की पहचान करना मुश्किल है। 
 
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मध्यप्रदेश में कोरोना की लहर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
अगर, तीसरी लहर आई तो उसकी पहचान कैसे होगी?
वर्तमान में, तीसरी लहर सिर्फ विचाराधीन है। अर्थात, अगर राष्ट्रीय स्तर पर मामलों में एक बार फिर तेजी उछाल आता है तो उसे देश में कोरोना की तीसरी लहर माना जाएगा। लेकिन हाल ही में दोबारा उठाए गए आंशिक लॉकडाउन और सख्त कर्फ्यू जैसे कदमों के बाद अब सूरत थोड़ी बदलने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा लगता है कि राष्ट्रीय स्तर पर ग्राफ अब गिरावट के दौर में प्रवेश कर गया है। 
देश में 06 मई को नए मामलों के चरम पर पहुंचने के बाद, पिछले दो हफ्तों में, दैनिक मामलों की संख्या 4.14 लाख के उच्च स्तर से गिरकर लगभग 2.6 लाख तक आ गई है। जबकि 37.45 लाख के उच्च स्तर को छूने के बाद सक्रिय मामले घटकर 32.25 लाख हो गए हैं। यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो यह उम्मीद की जाती है कि जुलाई तक, भारत फरवरी में मामलों की संख्या के समान स्तर पर पहुंच जाएगा। लेकिन, दुर्भाग्यवश अगर इसके उलट मामलों में बढ़ोतरी होती है और कुछ हफ्तों या महीनों तक जारी रहता है, तो उसे ही तीसरी लहर कहा जाएगा।  
 
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कोरोना की तीसरी लहर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
अगर, राज्यों में बढ़ोतरी हुई तो?
इस बीच, राज्यों में स्थानीय संक्रमण के नए मामलों का अनुभव जारी रह सकता है। जैसा कि अभी तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में हो रहा है। या, अधिक स्थानीय स्तर पर, अमरावती, सांगली और महाराष्ट्र के कुछ अन्य जिलों में बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन जब तक वे राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना ग्राफ की दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे, उन्हें तीसरी लहर के रूप में वर्णित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, जितना अधिक स्थानीय वृद्धि होती है, उतनी ही जल्दी इसके खत्म होने की संभावना रहती है। हालांकि, मुंबई और पुणे जैसे शहर लंबे समय तक बढ़ोतरी के गवाह रहे हैं। 
 
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कोरोना से बचाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
क्या तीसरी लहर खतरनाक होगी?
कोरोना महामारी की तीसरी लहर के दूसरे से भी अधिक तेज यानी खतरनाक होने के बारे में कुछ अटकलें लगाई गई हैं। हालांकि, यह ऐसा कुछ नहीं है जिसकी भविष्यवाणी की जा सकती हो। आमतौर पर, यह उम्मीद की जाती है कि हर ताजा लहर पिछली लहर की तुलना में कमजोर होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि वायरस, जब उभरता है तो अपेक्षाकृत मुक्त रूप से फैलता है। यह देखा जाता है कि पूरी आबादी अतिसंवेदनशील है। 
इसके बाद के प्रसार के दौरान, अतिसंवेदनशील लोगों की संभावित संख्या बहुत कम होगी, क्योंकि उनमें से कुछ ने प्रतिरक्षा यानी इम्यूनिटी प्राप्त कर ली होगी। हालांकि, यह तर्क भारत के मामले में थोड़ा उलझन भरा है। पिछले साल मध्य सितंबर के बाद जब भारत में मामलों की संख्या घटने लगी, तो आबादी का बहुत छोटा हिस्सा ही संक्रमित हुआ था। यह देखते हुए कि आबादी का इतना बड़ा हिस्सा अभी भी अतिसंवेदनशील था, इस बीमारी के फैलने की गति धीमी होने का कोई कारण नहीं था। 
 

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कोरोना वायरस - फोटो : PTI
अच्छी तरह से विश्लेषण न होना भी कारण 
भारत में मामलों में लगातार पांच महीने की गिरावट के कारणों को अभी भी अच्छी तरह से समझा और विश्लेषित नहीं किया जा सका है। और चूंकि दूसरी लहर पहले की तुलना में कमजोर होने की उम्मीद थी, कई लोगों को यह विश्वास दिलाकर मूर्ख बनाया गया था कि महामारी अपने अंत के करीब है। लेकिन, जब बहुत दर्दनाक तरीके से सबक सीखने को मिला, तो अब सुझाव दिए जा रहे हैं कि तीसरी लहर और भी खतरनाक हो सकती है। लेकिन शायद ऐसा नहीं भी हो। दूसरी लहर के दौरान पहली की तुलना में कहीं अधिक लोग संक्रमित हुए हैं।
 

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भारत में कोरोना टीकाकरण - फोटो : PTI
दूसरी में लगभग चार गुना गुना पॉजिटिविटी दर
पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर के मामले लगभग चार गुना पॉजिटिविटी दर के साथ, अपुष्ट संक्रमण के मामले–जिनका कभी परीक्षण ही नहीं किया गया– के और भी ज्यादा होने की उम्मीद है। इसके उलट, बड़े स्तर पर टीकाकरण से आबादी के एक बड़े हिस्से में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। 
इसलिए, दूसरी लहर के बाद आबादी में अतिसंवेदनशील लोगों की संख्या काफी कम होगी। हालांकि, वायरस में जीन उत्परिवर्तन इन गणनाओं को बदल सकते हैं। वायरस उन तरीकों से उत्परिवर्तित कर सकता है जो इसे पहले से संक्रमित लोगों में विकसित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से भी बच निकलने में मदद करते हैं। यानी टीकाकरण के बाद भी संक्रमण की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।   
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कोरोना की तीसरी लहर आनी तय - फोटो : SELF
लेकिन क्या तीसरी लहर अटल है?
कोरोना की तीसरी लहर आने की एक अलग संभावना है। हालांकि, इसके आने की संभावना का पैमाना या समय ऐसा कुछ नहीं है, जिसकी भविष्यवाणी की जा सके। लेकिन यह अपरिहार्य यानी अटल नहीं है। जैसा कि प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार, विजयराघवन ने अपने पहले बयान के दो दिन बाद संशोधित टिप्पणी को जारी करते हुए स्पष्ट किया कि यदि लोग कड़े कदम उठाते रहे तो इसे टाला जा सकता है। 
यह भी संभव है कि इस बार, ताजा लहर वास्तव में पिछले वाले की तुलना में बहुत छोटी होगी, ताकि इसका प्रकोप कम हो और अधिक कुशलता से प्रबंधंन किया जा सके। बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि लोग इन चेतावनियों पर कैसे ध्यान देते हैं। वे आने वाली आपदा को लेकर पागल हो सकते हैं, या बार-बार चेतावनी से स्तब्ध हो सकते हैं। लेकिन दूसरी लहर ने हमें सिखाया है कि ऐसी विकट स्थिति में आशावान रहने की तुलना में पागलपन की हद तक सतर्क रहना कहीं बेहतर है।
 
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