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बारहवीं में साइंस स्ट्रीम के बाद करें यह कोर्स, बन जाएगी जिंदगी

Wed, 04 Jan 2017 11:20 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बारहवीं के बोर्ड की परीक्षाओं का समय नजदीक आ गया है। सभी विद्यार्थी जोर-शोर से बोर्ड की तैयारी में लगे हैं। बारहवीं के कई छात्रों को मालूम है कि उन्हें आगे जीवन में क्या करना है, वहीं कुछ अब भी अपने भविष्य को लेकर उलझन में होंगे। हम आपको बता रहे हैं साइंस स्ट्रीम के बाद के कुछ ऐसे करियर ऑप्शन्स, जिसमें पैसे के साथ-साथ आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।
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इंजीनियरिंग, एमबीबीएस, बीडीएस और बीएससी हमेशा से साइंस स्ट्रीम के छात्रों की पहली पसंद रहा है। कम्प्यूटर साइंस, आईटी, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, एयरोनॉटिकल और केमिकल ब्रांच इंजीनियरिंग में पहली च्वाइस होती है। वहीं मेडिकल में भविष्य तलाश रहे बच्चों के लिए नीट क्वालीफाई करना अहम होता है।
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इसके अलावा साइंस क्षेत्र में और भी विकल्प हैं जिसमें आप अपना करियर बना सकते हैं। मर्चेंट नेवी से लेकर फार्मेसी, नैनो-टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, अप्लाइड साइंस, एनवायरनमेंट साइंस और फॉरेन्सिक साइंस जैसे कई विकल्प हैं।

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- फोटो : Getty Images
मर्चेंट नेवी को व्यापारिक जहाजों का बेडा कहा जाता है। इसमें समुद्री यात्री जहाज, मालवाहक जहाज से लेकर तेल टैंकर और रेफ्रिजरेटेड शिप तक शामिल होते हैं। मर्चेंट नेवी के लिए भारत में कई संस्थान हैं। आईआईटी (मुंबई), लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज ऑफ अडवांस मरीन टाइम स्टडीज ऐंड रिसर्च (मुंबई), इंडियन मेरिटाइम यूनिवर्सिटी (चेन्नई), मरीन इंजिनियरिंग ऐंड रिसर्च संस्थान (कोलकाता) जैसे कई संस्थान हैं।
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- फोटो : Getty Images
बारहवीं के बाद फार्मेसी में दो प्रकार के कोर्स होते हैं, बी फार्मा और डी फार्मा। यह क्षेत्र दवाइयों से जुड़ा हुआ है। साइंस और दवाइयों में दिलचस्पी रखने वाले छात्रों के लिए शानदार करियर विकल्प है। आप यह कोर्स बनारस हिंदु विश्वविद्याल (वाराणसी), महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (रोहतक), इंस्टिट्यूट ऑफ़ केमिकल टेक्नोलॉजी (मुंबई), नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (मोहली) से कर सकते हैं। इसके अलावा भी कई विश्वविद्यालय और कॉलेज यह कोर्स करवाते हैं।
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- फोटो : Getty Images
नैनो टेक्नोलॉजी अति सूक्ष्म तत्वों वाले पदार्थ की पढ़ाई है। आकार में छोटे और मजबूती के कारण ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉरेंसिक और मेडिसिन में इसका इस्तेमाल काफी अहम हो गया है। इसके प्रमुख संस्थान हैं - जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च (बेंगलुरू), आईआईटी (रुड़की, कानपुर, मुंबई) और दिल्ली यूनिवर्सिटी।
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एनवायरनमेंट साइंस में इकोलॉजी, वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट और डिजास्टर मैनेजमेंट जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। इसमें पर्यावरण में होने वाले बदलाव और असर का अध्ययन किया जाता है। एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (हैदराबाद), आन्ध्रा विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, जाधवपुर विश्वविद्यालय, टेरी विश्वविद्यालय (दिल्ली) जैसे कई संस्थान एनवायरनमेंट साइंस में डिग्री देते हैं।
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करियर के विकल्प के तौर पर बायोटेक्नोलॉजी को काफी पसंद किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल प्रोडक्ट्स की क्वालिटी बढ़ाने और एनिमल और प्लांट्स के डेवलपमेंट बढा़ने के लिए किया जाता है। मेडिसिन और एग्रीकल्चर में भी इसका इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। आईआईटी (रूड़की, कानपुर, गुवाहटी), मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कर्नाटक), थापर विश्वविद्यालय आदि कॉलेज और विश्वविद्यालय यह कोर्स कराते हैं।
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