MERCHANT NAVY (मर्चेंट नेवी) का नाम सुनने में जितना अच्छा लगता है उतना ही अच्छा इस प्रोफेशन में काम करना है। मर्चेंट नेवी की कंपनियां जहाज के तीन विभागों- नॉटिकल (डेक), इंजीनियरिंग और कैटरिंग के लिए भर्तियां करती हैं। इसलिए नौकरी के ज्यादातर मौके इन्हीं विभागों में होते हैं।
मर्चेंट नेवी एक ऐसा प्रोफेशन है जिसमें व्यावसायिक कार्यों के लिए जलपोतों का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार लोग मर्चेंट के साथ 'नेव' के जुड़ाव से इसे Indian Navy का अंग मान लेते हैं, जबकि यहां 'नेवी' का अर्थ सिर्फ व्यावसायिक जलपोतों के काफिले तक सीमित है। आमतौर पर समुद्री मार्ग से तेल, अनाज, भारी मशीनों और दूसरी चीजों का परिवहन करने वाली कंपनियों के पास कई जहाज और हजारों लोग होते हैं। यही है मर्चेंट नेवी का काम। आइए जानते हैं इस प्रोफेशन के बारे में।
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योग्यता
मरीन इंजीनियरिंग या नेवल आर्किटेक्चर एंड शिप बिल्डिंग में बीटेक करने के लिए अंग्रेजी और विज्ञान विषयों के साथ 12वीं में पास होना जरूरी है। ज्यादातर संस्थान फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में 60 फीसदी औसत अंक होने पर ही दाखिला देते हैं। मरीन इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम भी उपलब्ध है। बीई/ बीटेक डिग्री के बाद इसमें प्रवेश लिया जा सकता है। नॉटिकल ऑफिसर बनने के लिए नॉटिकल साइंस में तीन वर्षीय बीएससी डिग्री आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम के लिए भी विज्ञान विषयों (गणित जरूरी) के साथ 12वीं पास होना जरूरी है।
इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी जैसे कई संस्थान नॉटिकल साइंस में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी कराते हैं। इनमें 12वीं पास के अलावा बीएससी या बीटेक डिग्रीधारक भी प्रवेश ले सकते हैं। वहीं कुछ संस्थानों में अब पोर्ट एंड शिपिंग मैनेजमेंट, मैरीटाइम इकोनॉमिक्स एंड ऑपरेशंस और ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स जैसे विषयों में पीजी डिप्लोमा या एमबीए करने की सुविधा भी उपलब्ध है। इन पाठ्यक्रमों में गैर-तकनीकी विषयों के स्नातक भी प्रवेश ले सकते हैं।
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एडमिशन प्रक्रिया
मरीन इंजीनियरिंग के बीटेक कोर्स में एडमिशन प्रवेश परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर होता है। इसी तरह बीएससी, डिप्लोमा और मास्टर डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश भी लिखित परीक्षा से ही होता है।
जरूरी बातें
ये प्रोफेशन उन लोगों के लिए है, जो शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत हैं। इसमें काम करने वालों को अक्सर हफ्तों या महीनों लंबी समुद्री यात्राएं करनी पड़ती हैं। अपनों से दूर रहकर यात्रा में आने वाली हर समस्या का सामना खुद करना पड़ता है, इसलिए बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य आवश्यक है। इस प्रोफेशन में कई-कई दिनों तक जहाज पर काम करने वाले लोग अपनों से फोन पर बाते भी नहीं कर पाते हैं।
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प्रमुख पाठ्यक्रम
बीटेक (मरीन इंजीनियरिंग)
बीटेक इन नेवल आर्किटेक्चर एंड शिप बिल्डिंग
बीएससी (नॉटिकल साइंस)
बीएससी (मैरीटाइम साइंस)
बीएससी (शिप बिल्डिंग एंड रिपेयर्स)
बीएससी इन शिप रिपेयर एंड शिप बिल्डिंग
डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस
एमटेक (मरीन इंजीनियरिंग)
पीजी डिप्लोमा इन मरीन इंजीनियरिंग
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प्रमुख संस्थान
इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी, चेन्नई
कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, केरल
इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन इंजीनियर्स (इंडिया), मुंबई
मेरिन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, कोलकाता