Board Exam Tips: राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में इस बात पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है कि शिक्षा का लक्ष्य विद्यार्थियों का संपूर्ण विकास करना है और उन्हें जीवन के विभिन्न तनावों से निपटने की क्षमता प्रदान करना है।
Board Exam Tips: सामान्यतः परीक्षा के समय थोड़ा-बहुत तनाव विद्यार्थियों को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए लगातार प्रेरित करने में मदद कर सकता है, लेकिन अत्यधिक तनाव उनके शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके संपूर्ण विकास पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में इस बात पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है कि शिक्षा का लक्ष्य विद्यार्थियों का संपूर्ण विकास करना है और उन्हें जीवन के विभिन्न तनावों (जिसमें परीक्षा का तनाव भी सम्मिलित है) से निपटने की क्षमता प्रदान करना है। मनोदर्पण (भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक पहल) भी विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कुशलता में अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करती है।
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Board Exam 2025
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वजहों को समझें
विद्यार्थियों में परीक्षा तनाव के कई कारण हो सकते हैं। जैसे कि माता-पिता, शिक्षकों, सहपाठियों और परिवार के सदस्यों की अत्यधिक अपेक्षाएं, अन्य विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा, स्वयं बेहतर करने का दबाव और असफलता का डर। इसके अतिरिक्त अपर्याप्त तैयारी और समय प्रबंधन की कमी के कारण भी विद्यार्थी तनाव का अनुभव महसूस कर सकते हैं। प्रायः विद्यार्थी परीक्षा के तनाव के बारे में बात करने में असहज महसूस करते हैं, लेकिन माता-पिता उनके शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और व्यवहारगत संकेतों से उनके तनाव की पहचान कर सकते हैं।
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Board Exam Tips In Hindi
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खुद आदर्श बनें
माता-पिता द्वारा बच्चों में स्वस्थ आदतों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। अच्छी आदतें तनाव को कम करने और ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकती हैं। माता-पिता अपने बच्चे को स्वस्थ भोजन करने, नियमित रूप से व्यायाम करने, नियमित योग करने और पर्याप्त नींद लेने के लिए प्रोत्साहित करें। एक अभिभावक के रूप में आप स्वयं भी इन आदतों को अपनाएं, ऐसा करने से बच्चों के सामने वह आदर्श होगा, जो उन्हें बनना चाहिए।
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Exam Stress Management
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व्यावहारिक अपेक्षाओं से बचें
प्रत्येक माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे सफल हों, लेकिन बच्चों से अवास्तविक अपेक्षाएं रखना अनावश्यक तनाव पैदा कर सकता है। इसके लिए अपने बच्चों को बताएं कि वे उनके प्रति सकारात्मक हैं। साथ ही अभिभावक बच्चों के साथ मिलकर उनकी वास्तविक क्षमताओं के अनुरूप ऐसे लक्ष्य निर्धारित करें, जो चुनौतीपूर्ण और प्राप्त करने योग्य, दोनों हों। अभिभावक का यह सकारात्मक दृष्टिकोण अपने बच्चे को अधिक आत्मविश्वास और प्रेरित महसूस करने में मदद करता है।
परीक्षाएं ज्ञान को मापने का माध्यम हैं, न कि जीवन का अंतिम लक्ष्य। इसलिए माता-पिता द्वारा बच्चों को दिया गया भावनात्मक सहयोग और एक स्वस्थ और सौहार्दपूर्ण वातावरण परीक्षा की तैयारी के समय बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।