समयपुर बादली इलाके के संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में मंगलवार शाम एमटीएनएल केबल की मरम्मत करने सीवर में उतरे तीन लोगों समेत चार लोगों की दम घुटने से मौत हो गई। लगभग पूरी रात चले रेस्क्यू ऑपरेशन में दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीम ने 9 घंटे बाद सभी के शव सीवर से बाहर निकाले। चारों की सीवर में मौजूद जहरीली गैस की चपेट में आकर दम घुटने से मौत हो गई थी। मरने वालों में केबल की मरम्मत करवाने वाला कांट्रेक्टर सूरज कुमार सहानी (55), उसके दो सहयोगी बच्चू सिंह (54), पिंटू राउत (30) और जांबाज ई-रिक्शा चालक सतीश कुमार (40) है।
हर किसी की मदद को तैयार रहता था सतीश
जिम में बॉडी-बिल्डिंग करने वाला सतीश बेहद जांबाज था। लॉकडाउन से पूर्व वह लाडो सराय में बाउंसर की नौकरी करता था। इसलिए हमेशा ही उसके हौंसले बुलंद रहते थे। लॉकडाउन में उसकी नौकरी गई तो आर्थिक स्थिति खराब हो गई। किराए पर ई-रिक्शा लेकर चलाने लगा। मंगलवार शाम को वह ई-रिक्शा लेकर संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचा।
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Four dead in sewer
- फोटो : अमर उजाला
वहां उसने देखा कि तीन लोग अंदर सीवर में फंसे हैं। मौके पर तमाशबीनों की भीड़ मौजूद थी, लेकिन कोई अंदर फंसे लोगों को बचाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। फौरन सतीश ने अपना ई-रिक्शा वहीं खड़ा किया और वह भी सीवर में सभी को बचाने उतर गया, लेकिन वह खुद भी मौत के शिकंजे में फंस गया। लोगों को बचाने पहुंचा सतीश खुद भी अंदर फंस गया और उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद से उसके परिजनों का रोते-रोते बुरा हाल है। बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस ने परिवार की आर्थिक मदद करने का भरोसा दिया है।
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Four dead in sewer
- फोटो : अमर उजाला
सतीश के साले मोहन अरोड़ा ने बताया कि मूलरूप से डकोरा, पलवल का रहने वाला सतीश अपने परिवार के साथ गली नंबर-8, सरदार कालोनी, रोहिणी सेक्टर-16 में रहता था। इसके परिवार में पत्नी नेहा (35) के अलावा तीन बेटी तिशा (14) कृतिका (8) और अरबी (2) के अलावा तीन बड़े भाई हैं।
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मृतक सतीश कुमार का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सतीश के बड़े भाई कृष्ण ने बताया कि उनका भाई शुरुआत से ही बहुत बहादुर था। वह किसी भी हालात में हार नहीं मानता था। बचपन से ही उसे सेहत बनाने का शौक था। इसी वजह से वह जिम जाता था। अच्छी बॉडी और कदकाठी की वजह से उसे बाउंसर की नौकरी भी मिल गई थी। लेकिन लॉक डाउन हुआ तो उसकी नौकरी चली गई। सतीश ने अपने परिवार को चलाने के लिए ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया था।
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Four dead in sewer
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार दोपहर खाना खाकर वह ई-रिक्शा लेकर निकला था। इसके बाद वह सवारियों की तलाश में संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचा और दूसरे लोगों की जान बचाने के चक्कर में अपनी भी जान गंवा बैठा।
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Four dead in sewer
- फोटो : अमर उजाला
सतीश अपनी तीनों बच्चियों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहता था। लेकिन अब परिवार को चिंता सता रही है कि आगे परिवार का क्या हुआ। मामले पर बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त बृजेंद्र कुमार यादव ने बताया कि पुलिस सतीश की जांबाजी को सलाम करते हैं।
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Four dead in sewer
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परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। पुलिस की ओर से सतीश के परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी सतीश की मदद के लिए मुहीम चलाई जा रही है।
एमटीएनएल केबल की मरम्मत के लिए गहरे सीवर में उतरे तीन कर्मचारियों समेत चार की मौत
- फोटो : अमर उजाला
सोशल मीडिया पर उसकी पत्नी नेहा के अकाउंट की डिटेल शेयर की गई है, जिसमें लोगों से परिवार की मदद करने के लिए कहा जा रहा है। परिवार को मंगलवार रात को ही सतीश के सीवर में फंसने का पता चल गया था।