ट्रॉली को दिया घर का रूप...
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कॉलोनी जैसा नजर आ रहा है सिंघु बॉर्डर : सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा का मंच करीब चालीस गुणा सौ वर्ग फुट क्षेत्रफल का है। तेज धूप हो, आंधी-बरसात हो टीन शेड के मंच पर इसका खास असर नहीं होगा। इसके चारों तरफ बड़े-बड़े फर्राटा पंखे व कूलर लगे हैं। मंच किसान नेताओं से भरा था और सामने सैकड़ो किसान बैठकर भाषण सुन रहे थे। मंच से किसान नेता दम भर रहे थे कि वह गुरु अर्जनदेव के विरासत हैं, बिना अपना हक वापस लिये दिल्ली से वापस नहीं जाएंगे। मंच के बाईं तरफ सेवादार शरबत बनाने व बांटने में जुटे थे। ठीक सामने बांस की पटरियों से बना एक सुंदर मेडिकल कैंप नजर आया। यहां भीड़ नहीं दिखी, मेडिकल कैंप पर मौजूद अंकित ने बताया कि सुबह शाम यहां दवा देने वालों की भीड़ होती है। डॉक्टर भी लोगों की जांच करने आते हैं। बगल में ही एक ट्राली नजर आई, जिसकी छत वाटरप्रूफ टेंट से ढकी थी, इसे चारों तरफ से हरे रंग की नेट से घेरा गया था। मच्छरों से बचने के लिए करीब सभी टेंटों को इसी प्रकार हरे रंग की नेट से कवर किया गया था। प्रत्येक टेंट में कूलर या एसी लगे नजर आए। थोड़ी-थोड़ी दूर पर वाटर कूलर की बड़ी मशीनें भी नजर आईं। ताकि किसानों और यहां आने वाले बाकी लोगों को पीने के लिए ठंड़ा पानी मिल सके। सड़कें साफ सुथरी दिखीं, टेंट के सामने गमले भी रखे हुए थे। यहां भीड़ कम थी, लेकिन व्यवस्था पहले से चाक चौबंद थी।