दिल्ली में हॉस्टल की इमारत गिरने के बाद जांच की गई तो सामने आया कि कई मकानों में लाइब्रेरी के ऊपर पीजी और किराये के कमरे भी संचालित हो रहे हैं। यहां किराया तो सोसाइटी की तरह वसूला जाता है, लेकिन सुविधा झुग्गी जैसी मिलती हैं। शादीपुर में दो फीट तक संकरी गलियों के बीच पीजी का कारोबार चल रहा है। यहां आपात स्थिति में बचाव मुश्किल हो सकता है।
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Delhi Building Collapse
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
नई दिल्ली में संकरी गलियां, घुमावदार सीढ़ियां और कहीं-कहीं महज दो फीट चौड़े रास्ते। इनसे बचते-बचाते प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र रोज अपने ठिकानों तक पहुंचते हैं। पश्चिमी दिल्ली के शादीपुर में ऐसी ही तस्वीर देखने को मिलती है।
यहां गली-दर-गली बनी लाइब्रेरियों में छात्र किताबों का बोझ और आंखों में भविष्य के सपने लिए घंटों पढ़ाई करते हैं। वहीं, कई मकानों में लाइब्रेरी के ऊपर पीजी और किराये के कमरे भी संचालित हो रहे हैं।
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सत्य निकेतन बिल्डिंग घटनास्थल के आस पास कुछ इस तरह का नजारा, जहां कई इमारतों में पीजी भी हैं
- फोटो : संवाद / भूपिंदर सिंह
करोल बाग के कोचिंग संस्थानों के नजदीक होने के कारण ओल्ड राजेंद्र नगर, राजेंद्र प्लेस, न्यू राजेंद्र नगर, झंडेवालान, रंजीत नगर, शादीपुर और बलजीत नगर में छात्रों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। यूपीएससी, एसएससी और बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी कोचिंग के आसपास रहने को प्राथमिकता देते हैं। बढ़ती मांग ने पीजी और किराये के कमरों के कारोबार को भी तेजी से बढ़ाया है।
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सत्य निकेतन बिल्डिंग घटनास्थल के आस पास कुछ इस तरह का नजारा, जहां कई इमारतों में पीजी भी हैं।
- फोटो : संवाद / भूपिंदर सिंह
महंगा किराया, सस्ते इलाकों की ओर छात्रों का रुख
करोल बाग के संस्थानों में यूपीएससी की तैयारी की फीस 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये तक पहुंचती है। वहीं, ओल्ड राजेंद्र नगर, राजेंद्र प्लेस और न्यू राजेंद्र नगर में दो कमरों के फ्लैट का किराया करीब 30 से 35 हजार रुपये है।
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लक्ष्मी नगर में जर्जर मकान में चल रहा पीजी
- फोटो : अमर उजाला
पटेल नगर और वेस्ट पटेल नगर में यही किराया करीब 25 से 30 हजार रुपये है। कुछ लिस्टिंग में ट्रिपल शेयरिंग 7-8 हजार रुपये प्रति बिस्तर से शुरू होकर निजी कमरों के लिए 20-30 हजार रुपये तक है। महंगे किराये से बचने के लिए छात्र शादीपुर और बलजीत नगर जैसे इलाकों का रुख करते हैं।
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शकरपुर में पतली गलियों में बने पांच पांच मंजिल मकान, इनमें चलते है पीजी
- फोटो : अमर उजाला
सीलन भरे कमरे, खिड़की तक नहीं
शादीपुर की कई गलियां बेहद संकरी हैं। मकान एक-दूसरे से सटे हैं और कुछ जगह रास्ते करीब दो फीट तक रह जाते हैं। कई कमरों में रोशनी और हवा के लिए खिड़की तक नहीं है। अंदर की सीढ़ियां भी घुमावदार और संकरी हैं। हर एक-दो मकान के बाद लाइब्रेरी नजर आती है।
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सत्य निकेतन बिल्डिंग घटनास्थल के आस पास कुछ इस तरह का नजारा, जहां कई इमारतों में पीजी भी हैं
- फोटो : संवाद / भूपिंदर सिंह
छोटी लाइब्रेरियों में करीब 25, जबकि बड़ी लाइब्रेरियों में 100 से 150 छात्रों के बैठने की व्यवस्था है। ये लाइब्रेरियां 12 से 24 घंटे तक छात्रों से भरी रहती हैं। ऐसे में आग, इमारत ढहने या अन्य आपात स्थिति में छात्रों का बाहर निकलना और राहत-बचाव दल का भीतर पहुंचना बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके बावजूद यहां दो कमरों के लिए छात्रों को 16 से 20 हजार रुपये तक किराया देना पड़ रहा है।
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एम्स ट्रामा सेंटर के शवगृह के बाहर भावुक हुए मृतकों के परिजन
- फोटो : संवाद / भूपिंदर सिंह
छात्राओं की राय
सत्य निकेतन की गली नंबर चार में जिस पीजी में रहती हूं, वहां एक बेड के लिए हर महीने 13,500 रुपये किराया देती हूं। इसके अलावा 350 रुपये मेंटेनेंस और 16 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली का बिल अलग देना पड़ता है। पीजी में न अग्निशामक यंत्र है और न ही आपात स्थिति में बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता। प्रवेश द्वार और सीढ़ियां इतनी संकरी हैं कि दो लोग एक साथ निकलें तो गिरने का खतरा रहता है। -नारायणी सिंह, छात्रा, वेंकटेश्वर कॉलेज
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लक्ष्मी नगर में मेट्रो पिलर नंबर 43 के सामने मेन गली में पीजी के लिए टांगे गए नंबर
- फोटो : अमर उजाला
मैं यहां करीब एक महीने पहले रहने आई हूं। हमारे पीजी का किराया 20 हजार रुपये महीना है और हर कमरे में दो छात्राएं रहती हैं। इसके अलावा बिल्डिंग सिक्योरिटी के नाम पर 5,000 रुपये अलग से लिए गए हैं। इतनी रकम देने के बावजूद सुरक्षा के नाम पर कोई खास इंतजाम नहीं है। पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर संचालकों की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई देती। -इंशिता, छात्रा, आर्यभट्ट कॉलेज
एम्स ट्रामा सेंटर के शवगृह के बाहर भावुक हुए मृतकों के परिजन
- फोटो : संवाद / भूपिंदर सिंह
मुखर्जी नगर में पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रहे करीब 90 फीसदी मकान सुरक्षा की दृष्टि से जोखिमपूर्ण हैं। अधिकांश मकान 1980 के दशक में बने थे और अब काफी पुराने हो चुके हैं। कई मकान मालिकों ने संपत्तियों की खराब हालत के बावजूद उन्हें पीजी में तब्दील कर किराये पर दे दिया है। एमपीडी-2021 के तहत पीजी के लिए कॉलोनी-डी में कम से कम 18 मीटर चौड़ी सड़क और 200 वर्ग मीटर के भूखंड की शर्त है, जबकि यहां ज्यादातर भूखंड 160 वर्ग गज के हैं। 11 अक्टूबर 2023 के नोटिस में पीजी संचालन को अवैध बताया गया था, फिर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।-बीएन झा, अवैध पीजी के खिलाफ वर्षों से लड़ाई लड़ रहे निवासी