राजधानी दिल्ली में कोरोना के नए मामले कम होने के साथ-साथ मौत का आंकड़ा भी कम हो रहा है। इस वजह से नगर निगमों के श्मशान घाटों में अब पहले के मुकाबले शवों की संख्या में 50 फीसदी तक कमी आ चुकी है। अब लोगों का अधिक समय कतारों में नहीं बर्बाद हो रहा है, बल्कि आधे घंटे के भीतर ही शवों की अंतिम क्रिया कर रहे हैं। मौत के आंकड़े कम होने से सबसे अधिक राहत उत्तरी निगम के निगम बोध घाट पर हुई है। यहां तीन सप्ताह पहले शवों की संख्या 250 के पार पहुंच गई थी, लेकिन अब इनकी संख्या 100 के आसपास ही सिमटकर रह गई है। श्मशान घाट का संचालन करने वाली समिति के महाप्रबंधक सुमन कुमार गुप्ता ने बताया कि यहां शवों की संख्या 250 से अधिक पहुंच गई थी। इसको देखते हुए अतिरिक्त चिताओं की व्यवस्था करनी पड़ी थी। समिति की ओर से यमुना किनारे की जगह को इस्तेमाल कर अतिरिक्त चिताएं बनाईं गईं थी। स्वजनों को भी शवों के संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। हालांकि, एक मई के बाद से अब राहत मिली हुई है और प्रतिदिन 100 से 120 शव अंतिम क्रिया के लिए पहुंच रहे हैं।
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शमशान घाटों पर भी शवों की वेटिंग हुई कम
- फोटो : शुभम बंसल
गुप्ता ने बताया कि निगम बोध घाट उत्तरी निगम का सबसे बड़ा श्मशान घाट है। यहां 150 चिताओं की व्यवस्था है। इसके अलावा सीएनजी से चलने वाली छह चिताएं हैं, जिनमें प्रतिदिन 30 से 35 शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है।
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श्मशान घाट पर संक्रमितों के शव को ले जाते हुए
- फोटो : अमर उजाला
पूर्वी निगम के गाजीपुर स्थित श्मशान घाट में भी गत एक मई के बाद से शवों की संख्या में कमी आ रही है। श्मशान घाट के मुख्य इंचार्ज सुनील शर्मा ने बताया कि यहां प्रतिदिन 100 से 150 शव अंतिम क्रिया के लिए पहुंच रहे थे।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
इस वजह से लंबी-लंबी कतारें भी देखने को मिल रही थी। गत दिनों से यहां शवों की संख्या में कमी आई है और अब यह आंकड़ा 35 से 40 तक सिमट गया है।
निगम के आंकड़ों के मुताबिक, गत 10 मई को पूर्वी निगम के कड़कड़डूमा में 10, गाजीपुर में 23, शास्त्री पार्क में एक व सीमापुरी में 31 कोरोना व कोरोना संदिग्ध शवों का अंतिम संस्कार हुआ।
पूर्वी निगम में अब तक 1917 कोरोना संक्रमितों शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है। वहीं, 502 कोरोना संदिग्धों का भी कोरोना नियमों के साथ अंतिम संस्कार किया गया है।