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जुलाई में जुदा रहे मौसम के रंग : दिल्ली में देरी से आया मानसून फिर भी रिकॉर्ड बारिश, लू भी चली

Mon, 02 Aug 2021 05:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • 19 वर्षों में सबसे देरी से पहुंचा था मानसून, 16 दिन दर्ज किए गए बारिश के दिन
  • जुलाई में 507.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड, औसत से 141 फीसदी अधिक
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हल्की बारिश के बाद राष्ट्रपति भवन का नजारा - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के लिए जुलाई का मौसम पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अलग रहा। इस माह में दिल्ली ने पिछले नौ सालों में सबसे अधिक पांच लू वाले दिन व दो सप्ताह से मानसून की देरी के बाद हुई बारिश से टूटे 20 सालों का रिकॉर्ड भी देखा। जुलाई के शुरुआत में ही पहले तीन दिन दिल्ली में लू दर्ज की गई थी। जुलाई के लिए औसत अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि लंबी अवधि के औसत तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस रहता है। 
 
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दिल्ली में भी भारी बारिश - फोटो : ANI
दिल्ली में मानसून की दस्तक को लेकर मौसम विभाग ने भी कई बार घोषणा की थी। लेकिन, हवा की और मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के कारण मानसून पहुंचने में देरी हुई। इससे मौसम विभाग के आंकड़ें भी कई बार विफल साबित हुए। दिल्ली में गत 13 जुलाई को मानसून ने दस्तक दी थी। जो पिछले 19 वर्षों में सबसे अधिक देरी से था। इसके बाद भी राजधानी में इस माह बारिश के 16 दिन दर्ज किए गए, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। 
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Minto Road Delhi Rain - फोटो : PTI (File)
मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मानसून पहुंचने से पहले दिल्ली में बारिश के तीन दिन दर्ज किए गए थे। आधिकारिक मानक केंद्र सफदरजंग केंद्र पर  जुलाई में 507.1 मिमी बारिश हुई, जो कि 210.6 मिमी की लंबी अवधि के औसत से लगभग 141 फीसदी अधिक थी। यह जुलाई 2003 के बाद से महीने में सबसे अधिक और अब तक की दूसरी सबसे अधिक वर्षा थी।2013 में दिल्ली में 340.5 मिमी बारिश हुई थी। 

 

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delhi ncr rain - फोटो : नवीन
विभाग के अनुसार, जुलाई 2003 में अब तक का ऑल टाइम रिकॉर्ड 632.2 मिमी वर्षा का है।  दिल्ली में एक जून से अब तक 570.1 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर 281.9 मिमी  होती है, जो 102 फीसदी अधिक है।जुलाई में 16 बरसात के दिनों में दिल्ली में तीन दिनों में अधिक बारिश हुई है। इसमें 18-19 जुलाई (69.6 मिमी), 26-27 जुलाई (100 मिमी) और 29-30 जुलाई (72 मिमी) दर्ज हुई। 26-27 जुलाई को दर्ज की गई 100 मिमी वर्षा केवल तीन घंटों में हुई थी। जो कि आठ साल में इस माह 24 घंटे में सबसे अधिक बारिश भी थी। वर्ष 2013 में दिल्ली में 21 जुलाई को 123.4 मिमी बारिश हुई थी।इसके अलावा रिज इलाके में 15 जुलाई  को 107.4 मिमी, पालम में 20 जुलाई को 67.6 मिमी व 28 जुलाई को 68.7 मिमी अधिक बारिश रही थी। 

 
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दिल्ली-एनसीआर में बारिश - फोटो : ANI
 मौसम विभाग के मुताबिक, 15 मिमी से नीचे दर्ज की गई वर्षा को हल्का माना जाता है, 15 से 64.5 मिमी के बीच मध्यम, 64.5 मिमी और 115.5 मिमी के बीच भारी, 115.6 और 204.4 के बीच बहुत भारी बारिश होती है। 204.4 मिमी अधिक बारिश अत्यधिक भारी वर्षा की श्रेणी में आती है। मौसम विभाग पांच श्रेणियों में मानसून की बारिश को मापता है। इसके तहत ज्यादा अधिक (बारिश सामान्य से 60 फीसदी अधिक), अधिक (औसत से 20 फीसदी से 59 फीसदी अधिक), सामान्य (शून्य से 19 से 19 फीसदी कम), कमी (शून्य से माइनस 20 फीसदी से माइनस 59 फीसदी) और बहुत कम (सामान्य से 60 फीसदी कम)।
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demo - फोटो : amar ujala
फिर भी रह गई कमी
मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून की जबरदस्त वापसी के बाद, देश के कई हिस्सों में बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं हुई। लेकिन दक्षिण-पश्चिम मानसून जुलाई में सात प्रतिशत की कमी के साथ समाप्त हुआ। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने रविवार को बताया, जुलाई में बारिश शून्य से सात प्रतिशत कम थी, जो लंबी अवधि के औसत का लगभग 93 प्रतिशत है। 96-104 की सीमा में बारिश सामान्य मानी जाती है, जबकि 90-96 की सीमा में इसे समान्य से कम माना जाता है।
 
आईएमडी के अनुसार, जुलाई में तटीय और मध्य महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक में भारी वर्षा हुई। महाराष्ट्र के कई कस्बों और शहरों में बहुत भारी वर्षा हुई, जिसके चलते भूस्खलन की कई घटनाएं हुईं, जिनमें कई लोगों की जान चली गई और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। वहीं जम्मू -कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में भी बादल फटने की घटनाएं हुईं।
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