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अमरोहा केसः जब गिरफ्तार हुई थी तब गर्भवती थी शबनम, जेल में पैदा हुआ बेटा, इस शख्स ने दी नई जिंदगी

Thu, 04 Mar 2021 06:32 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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शबनम केस - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के अमरोहा की रहने वाली शबनम जो आजाद भारत में फांसी पाने वाली पहली महिला बन सकती है, उसकी जिंदगी के कई पहलू ऐसे हैं जिसके बारे में कम लोगों को पता है। अपने पूरे परिवार को मौत के घाट उतारने वाली शबनम जब अपने जुर्म के लिए गिरफ्तार हुई थी तब वह सात सप्ताह की गर्भवती थी। बिन ब्याह के गर्भवती होने के चलते उसका परिवार उससे नाराज था। शबनम ने अपने बेटे को जेल में ही जन्म दिया और कुछ सालों तक वह उसके साथ ही रहा। अब वही बेटा शबनम की फांसी रुकवाने के लिए राष्ट्रपति से दया याचिका की गुहार लगा चुका है। हमारी इस स्टोरी में पढ़ें शबनम के बेटे के बारे में कि अब वह क्या कर रहा है और उसे कौन पाल रहा है....
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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
14/15 अप्रैल की दरम्यानी रात को अपने परिवार के सात लोगों का कत्ल करने वाली शबनम जब वारदात के चार दिन बाद गिरफ्तार हुई तो वह सात सप्ताह की गर्भवती थी। उस वक्त शबनम की शादी नहीं हुई थी। शबनम के बच्चे का पिता सलीम है जिसके साथ मिलकर शबनम ने परिवार के लोगों की हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। 
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shabnam case - फोटो : अमर उजाला
जब शबनम का बेटा छह साल का था तो उसे जेल नियमों के अनुसार वहां से निकालकर चाइल्ड केयर सेंटर में डालना था। लेकिन इसी बीच एक पत्रकार उस्मान सैफी जो शबनम पर किताब लिखने जेल आया करते थे उन्हें बच्चे से बेहद लगाव हो गया। उनके दिल में उसे नई जिंदगी देने की इच्छा जागी। जब ताज के जेल से निकलने का समय हुआ तो उस्मान ने ताज को कानूनी कार्रवाई कर बेटा बना कर घर ले आए।

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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
एक न्यूज चैनल से बात करते हुए शबनम के बेटे ने कहा था कि वह राष्ट्रपति अंकल से कहेगा कि उसकी मां को फांसी की सजा न दी जाए। अब वह एक बड़े स्कूल में पढ़ता है और जेल से अपने नए घर आकर बहुत खुश है। उसका कहना है कि उसके यहां बहुत से दोस्त हैं। वह हर माह अपनी मां से भी मिलने जेल जाता है।
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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
उसे कानूनी रूप से बेटा बनाने वाले उस्मान का कहना है कि वह जेल तो शबनम पर किताब लिखने जाते थे लेकिन उन्हें बच्चे पर बहुत प्यार आता था। तब उन्होंने किताब छोड़कर उसकी जिंदगी बदलने का फैसला किया। उस्मान और उनकी पत्नी वंदना ने कहा कि, हमारी कोशिश है कि हम इसे बेहतर शिक्षा दें, एक अच्छा इंसान बनाएं ताकि समाज में मैसेज जाए कि हां उसकी मां ने जो अपराध किया है बच्चा अपराधी नहीं है।
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