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PHOTOS: पंजाबी लेखक ने सरेआम जलाई अपनी किताबें

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पंजाबी लेखक गुरचरण सिंह बब्बर ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर पंजाब दंगे पर लिखी अपनी पुस्तकों को जला दिया। (सभी फोटोः विवेक निगम/अमर उजाला)
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उनका आरोप था कि सिख दंगों के 30 साल बाद भी पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है, जबकि उनकी पुस्तक में इंसाफ दिलाने के अहम दस्तावेज मौजूद हैं।
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बब्बर ने पुरस्कार लौटने वाले साहित्यकारों से भी सवाल किया कि सैकड़ों सिखों की निर्मम हत्या के दौरान उनकी आत्मा क्यों नहीं जगी थी।

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सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने पुस्तकों में लगी आग बुझाकर बब्बर को हिरासत में ले लिया।
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गुरचरण सिंह बब्बर दोपहर में सरकारी कत्लेआम नामक करीब पचास पुस्तकों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे।
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उन्होंने कहा कि 1998 में केंद्र सरकार ने पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन उनके अनशन पर बैठने के बाद प्रतिबंध हटा दिया गया।
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इसके बाद से अब तक चार भाषाओं में लिखी इस पुस्तक की एक लाख से ज्यादा प्रतियां दुनियाभर में बिक चुकी हैं।

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उन्होंने बताया कि पुस्तक काफी शोध के बाद लिखी गई है।

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इसमें केंद्र सरकार के जांच आयोगों में विधवाओं के नामजद शपथपत्रों की प्रतियां भी शामिल हैं।

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सिख दंगों पर यह ऐतिहासिक दस्तावेज है। लेकिन 31 साल बीत जाने के बाद अभी तक पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला।

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आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के शुभचिंतक साहित्यकारों को भारी भरकम अवार्ड मिले थे, लेकिन उनकी पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था।
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उन्होंने कहा कि उनके पास पुस्तकें जलाने के अलावा इंसाफ मांगने को दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इसके बाद उन्होंने सभी पुस्तकों में आग लगा दी।
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