इस गांव में रहस्यम ढंग से कट रही महिलाओं की चोटी, डर के चलते हो रहीं बीमार
Thu, 27 Jul 2017 02:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
सार
अलग-अलग इलाकों में महिलाओं की चोटी काटने से दहशत
सबहेड -अंधविश्वास पर यकीन करने वाले बता रहे है भूत प्रेत का खेल
एक ही दिन तीन मामले सामने आने से क्षेत्र में भय का माहौल
अलग-अलग गांवों में बुधवार को रहस्यमय तरीके से तीन महिलाओं की चोटी काटने से ग्रामीण दहशत में हैं। बाल कटने से डरी-सहमी एक महिला की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने महिला को अचेत अवस्था में निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। जहां उपचार के बाद महिला को घर भेज दिया गया। बाल काटने की घटना मेवात के कई इलाकों में रहस्यमय बनी हुई है। लोग तरह तरह की चर्चा कर रहे हैं।
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कुछ लोग इसे भूत-प्रेत का साया बता रहे हैं, वहीं जागरूक लोगों का कहना है कि यह सिर्फ अंधविश्वास का खेल है। बुधवार को पुन्हाना खंड के गांव झारपुरी में एक महिला की जंगल में पशुओं का चारा काटते हुए चोटी कट गई। महिला के जेठ आस मोहम्मद ने बताया कि बुधवार करीब एक बजे उसकी मां जूहूरबी और भाई की पत्नी मनीसा जंगल में पशुओं के लिए चारा लेने गई थी। अचानक मनीसा को झटका सा महसूस हुआ और वह बेहोश हो गई।
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होश में आने पर उसकी नौ इंच की चोटी कटी हुई थी। पुन्हाना खंड के ही एक और गांव मलहका में आसीना पत्नी फरहान दिन के समय घर पर थी। दिन में वह अपनी सास, ननद ओर जेठानी के अलावा गांव की कुछ महिलाएं आपस में बात कर रही थीं। इसी बीच उसे झटका लगा, जिसके बाद वह बेहोश हो गई। तभी उसकी चोटी कटकर जमीन पर गिर गई। तीसरी घटना तावडू शिकारपुर बाइपास की है।
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यहां पर फतेह मोहम्मद निवासी गांव सालाका ने बताया कि बुधवार को करीब पौने दो बजे उसकी 14 वर्षीय बेटी खेरुनिशा अपनी बहनों के साथ सोई हुई थी। अचानक झटका लगने पर उसकी नींद खुली। उसने सिर पर हाथ फेरा तो उसकी चोटी कटी हुई थी। घटना के बाद से वह भी काफी डरी हुई है। वहीं, गांव शिकारपुर शहीद उर्फ़ भुल्लू ने बताया कि मंगलवार रात उसकी पत्नी परवीन रसोई में जा रही थी।
अचानक उसे बाल कटने की आवाज महसूस हुई। पीछे मुड़कर देखा तो उसकी कटी चोटी फर्श पर पड़ी थी। सामने से एक औरत भागती दिखाई दी, जो देखते ही देखते ओझल हो गई। चोटी काटने की रहस्यमयी घटनाओं से गांव में काफी दहशत का माहौल है। जिन महिलाओं और युवतियों की चोटी काटी गई है, वे काफी डरी-सहमी सी हैं। महिलाएं कहीं भी अकेले जाने से कतरा रही हैं। अंधविश्वास को मानने वाले कुछ परिवार मौलवी और ताबीज का सहारा भी ले रहे हैं।