एनआईए के डीएसपी मोहम्मद तंजील अहमद को रविवार रात जामिया नगर स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। तंजील को दफनाने से पूर्व स्थानीय लोगों ने खूब हंगामा किया। लोगों का कहना था कि केंद्र, यूपी और दिल्ली सरकार से शहीद के घर उनके परिवार को सांत्वना देने कोई नहीं पहुंचा।
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तंजील अहमद को अंतिम विदाई
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
नारेबाजी और विरोध के बीच रात को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जामिया नगर स्थित कब्रिस्तान पहुंचे। मुख्यमंत्री ने डीएसपी के परिवार को एक करोड़ रुपये देने के अलावा बच्चों की पढ़ाई व नौकरी दिलवाने की बात की। इधर शाहीन बाग स्थित तंजील के घर पर दिनभर रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों का तांता लगा रहा।
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शाम करीब छह बजे के आसपास पोस्टमार्टम के बाद तिरंगे में लिपटा डीएसपी तंजील का पार्थिव शरीर शाहीन बाग बी-96 स्थित उनके घर पहुंचा। इस मौके पर रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों की भीड़ उनके घर जमा हो गई। ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं था कि तंजील एनआईए में कार्यरत हैं।
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तंजील के रिश्तेदार सलीम ने बताया कि वह यह समझते थे कि तंजील बीएसएफ में किसी बड़े पद पर तैनात हैं। लेकिन रविवार सुबह उन्होंने टीवी में तंजील की मौत की खबर देखी तो उन्हें पता चला कि वह एनआईए में तैनात थे। इधर बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी भी तंजील के घर पहुंच गए। बाद में मगरिब की नमाज के बाद उनके शव को जामिया मिडिल स्कूल के प्रेयर ग्राउंड में ले जाया गया। वहां तंजील के शव को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
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इस बीच वहां हजारों लोगों की भीड़ मौजूद रही। रात इशा की नमाज के बाद तंजील को जामिया नगर के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। स्थानीय लोगों ने तंजील की पत्नी फरजान की जिंदगी के लिए दुआएं मांगी। एक रिश्तेदार एजाज ने बताया कि बेहद मिलनसार और जांबाज तंजील अपने बड़े भाई रागिब अहमद के साथ पिछले करीब 20 सालों से शाहीनबाग स्थित घर में रहते थे।
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तंजील की पत्नी बटला हाउस स्थित सरकारी स्कूल में टीचर हैं। वहीं बेटी दसवीं में पढ़ती हैं, जबकि बेटा सातवीं कक्षा में पढ़ता है। तंजील के बड़े भाई रागिब अजमेरी गेट स्थित एंग्लो अरेबिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में टीचर हैं। हत्याकांड के समय रागिब दूसरी गाड़ी में तंजील से कुछ दूरी पर थे।
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रविवार शाम तक केंद्र, यूपी और दिल्ली सरकार का कोई भी नेता या अधिकारी तंजील के घर नहीं पहुंचा। इससे नाराज लोगों ने जामिया मिडिल स्कूल में सरकारों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों में इस बात की भी भारी नाराजगी थी कि यूपी पुलिस ने तंजील की हत्या को रंजिश से जोड़ दिया था। रिश्तेदारों का कहना था कि तंजील की किसी से कोई रंजिश नहीं थे। वह पांचों वक्त के नमाजी थे।
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उनकी हत्या किसी बड़ी साजिश की वजह से हुई है। हंगामे के बीच पहले ओखला से आप के विधायक अमानत उल्लाह खान मौके पर पहुंचे। बाद में रात के समय कब्रिस्तान में अरविंद केजरीवाल भी पहुंच गए। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। उनके निजी सुरक्षा गार्डों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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करीब चार-पांच मिनट रुककर वह वहां से चले गए। जाते समय मुख्यमंत्री ने तंजील के परिवार को एक करोड़ रुपये, बच्चों की पढ़ाई और बड़े होने पर नौकरी देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर भी लोगों ने काफी हंगामा किया। उनका कहना था कि जिस पद पर तंजील थे उसे देखते हुए कम से कम पांच करोड़ रुपये की घोषणा की जानी चाहिए थी।
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शाहीनबाग स्थित तंजील के घर पर एनआईए की टीम ने डेरा डाले रखा। एनआईए के अधिकारियों ने पड़ोसियों व रिश्तेदारों से तंजील के बारे में पूछताछ की। एनआईए के अधिकारी तंजील की हत्या से जुड़े सुरागों की तलाश में लगे रहे। हालांकि उन्होंने पूछने पर किसी को कुछ नहीं बताया। अलबत्ता वह देर रात तक तंजील के घर पर डटे रहे। एक अधिकारी ने बस इतना बताया कि तंजील बेहद ईमानदार और जांबाज अफसर थे। कई बड़े ऑपरेशन में उन्होंने बहुत अहम भूमिका निभाई थी। परिजनों ने एनआईए के अधिकारियों से आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ने की गुहार लगाई।