लोकसभा चुनाव 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने वैसे तो देश की जनता से कई वादे किए थे लेकिन हर भारतीय के बैंक अकाउंट में 15 लाख रुपए जमा कराने का जो वादा उन्होंने किया था उसे भाजपा की ऐतिहासिक जीत के लिए सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
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हालांकि पिछले ढाई सालों में मोदी जी इसी वादे पर लगातार विपक्ष से लेकर आम आदमी तक के निशाने पर रहे हैं। 8 अक्टूबर की रात 8 बजे वो अचानक टीवी पर राष्ट्र को संदेश देने के लिए प्रकट हुए। अपने भाषण के शुरुआती 10 मिनट के बाद उन्होंने जो कुछ कहा उसने देश के रेहड़ी पटरीवालों से लेकर अरबपतियों तक को हिला कर रख दिया।
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पिछले 20 घंटे से देश का शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा जो कम से कम एक बार इस बार चर्चा ना की हो। यहां तक कि विपक्ष ने भी सरकार के इस कदम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। लेकिन लोकसभा चुनाव में बनारस से मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले और उनके हर कदम पर सबसे पहले तीखी प्रतिक्रिया देने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अभी तक खामोश हैं।
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केजरीवाल खुद मुंह खोले न खोलें, लेकिन वो हर मुद्दे पर अपने तीखे ट्वीट्स से सुर्खियां भी बटोर ही लेते हैं। लेकिन 1000-500 के नोट बंद होने के बाद केजरीवाल की चुप्पी ने भी सवाल खड़ा कर दिया है। छोटे-बड़े हर मुद्दे पर अपनी राय रखने वाले केजरीवाल ने आम आदमी से जुड़े इतने बड़े फैसले पर अब तक कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी?
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keju
क्या सर्जिकल स्ट्राइक के बाद के अपने वीडियो संदेश के बाद पाकिस्तान का हीरो बन जाना और विवाद में आ जाने का अनुभव उन्हें डरा तो नहीं रहा?
क्या केजरीवाल भी मोदी की उस रणनीति का शिकार हो गए हैं जिसमें विपक्षी पर सीधा निशाना साधने की बजाय कुछ ऐसा कर गुजरते हैं जिससे उनका कद अचानक बढ़ जाता है बाकी सब उनके सामने बौने दिखने लगते हैं।