राजधानी दिल्ली में मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ मानसून ने भी दस्तक दे दी है। आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है। यह कोई पहली बार नहीं है जब मौसम विभाग ने किसी रंग के नाम से अलर्ट जारी किया है। आपने इससे पहले भी कई बार देखा होगा कि मौसम विभाग अलग-अलग रंगों के नाम से अलर्ट जारी करता है। क्या आप जानते हैं कि इन रंगों के चुनाव के पीछे क्या कारण है और इनके नाम से क्यों जारी किए जाते हैं अलर्ट? आगे की स्लाइड में पढ़िए क्या होता है रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट का मतलब-
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बारिश
दरअसल मौसम विभाग देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम में होने वाले संभावित बदलाव को लेकर लगातार सचेत करता रहता है। इन बदलावों के बारे में बताने के लिए कुछ चुनिंदा रंगों का प्रयोग किया जाता है। जैसे रेड अलर्ट, येलो अलर्ट और ऑरेंज अलर्ट। मौसम विभाग के अनुसार अलर्ट्स के लिए रंगों का चुनाव कई एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया है। हर रंग का अलग-अलग मतलब होता है, जिसके हिसाब से मौसमी बदलावों के कारण होने वाले संभावित खतरों से निपटने की तैयारियां की जाती हैं।
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बारिश
- फोटो : अमर उजाला
रंगों के नाम से जारी किए जाने वाले इन अलर्ट का प्रयोग खासकर भीषण गर्मी, सर्द लहर, मानसून या चक्रवाती तूफान आदि के बारे में जानकारी देने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे मौसम अपने चरम की ओर बढ़ता है, वैसे-वैसे अलर्ट गहरा लाल होता जाता है। इसी तरह किसी चक्रवाती तूफान की भीषणता भी इन्हीं रंगों से बताई जाती है। जितने भीषण चक्रवात का पूर्वानुमान होता है, अलर्ट का रंग उतना ही ज्यादा लाल होता जाता है।
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- फोटो : अमर उजाला
कई बार विभाग मौसमी बदलावों की संभावना पर ग्रीन अलर्ट की घोषणा करता है। ग्रीन यानी हरे रंग का अर्थ है कि मौसम में होने वाले बदलावों से किसी तरह का खतरा नहीं है। इसका मतलब है कि किसी तरह का एक्शन लिए जाने की जरूरत नहीं है। बारिश के पूर्वानुमान के तहत ग्रीन अलर्ट हल्की या मध्यम बारिश के लिए जारी किया जाता है।
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बारिश के कारण बढ़ा जलस्तर
- फोटो : अमर उजाला
येलो अलर्ट जारी कर मौसम विभाग यह संदेश देना चाहता है कि खतरे के प्रति सचेत रहें। येलो अलर्ट के तहत लोगों को पहले से ही सचेत रहने के लिए सावधान किया जाता है। मौसम विभाग की भाषा में यह अलर्ट 'जस्ट वॉच' का सिग्नल है। अगर मौसम विभाग येलो अलर्ट जारी करता है तो इसका मतलब है कि संबंधित अधिकारियों को हालातों पर नजर रखनी होगी। उन्हें बारिश की स्थिति और शहर के हालात के बारे में समय-समय पर पूरी जानकारी रखनी होगी।
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बारिश के बाद सड़क पर जल-जमाव
- फोटो : pratapgarh
अगर विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है तो समझिए कि होने वाले मौसमी बदलावों से कुछ खतरा हो सकता है, जिसके लिए आपको तैयार रहना है। जैसे-जैसे मौसम और खराब होता है, येलो अलर्ट को अपडेट करके ऑरेंज कर दिया जाता है। इस दौरान लोगों को बाहर जाने के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इसका मतलब होता है कि हालात किसी भी वक्त बिगड़ भी सकते हैं। इसके लिए संबंधित विभाग पूरी तरह तैयार और अलर्ट रहें। ताकि जरूरत पड़ने पर बिना देर किए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
मौसम विभाग के कलर कोड में लाल (रेड) सबसे गहरा रंग होता है। इसका प्रयोग खतरनाक स्थिति को दर्शाने के लिए किया जाता है। जब मौसम खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है और भारी नुकसान होने की आशंका होती है तो रेड अलर्ट जारी किया जाता है। यह काफी भारी बारिश की चेतावनी देता है। यानी जिस जगह के लिए ये अलर्ट जारी किया गया है, वहां काफी भारी बारिश की आशंका है।