गर्मी शुरू होते ही नगीना खंड के करीब 25 गांवों में पीने के पानी की भारी किल्लत शुरू हो गई है। गांव के कुएं पहले ही सूखे पडे़ हैं। बरसात न होने से गावों के तालाब भी सूख गए हैं।
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गुड़गांव में गर्मी से राहत के लिए वाटर पार्क में नहाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
अब यहां ग्रामीणों की प्यास पानी के टेंकर बुझा रहे हैं। करीब 50 टेंकर इन गांवों में पानी पहुंचा रहे हैं। आम दिनों में 300-400 रुपये में बिकने वाले पानी के एक टेंकर की कीमत अचानक एक हजार तक पहुंच जाती है।
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गुड़गांव में गर्मी से राहत के लिए वाटर पार्क में नहाते लोग
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गांव कंकर खेडी, जलालपुर, मढी, राजाका, सुलतानपुर, बुखराका, हसनपुर, गंडूडी और खानपुर नूंह सहित करीब 25 गांवों के लोग टेंकरों से खरीदकर पानी पी रहे हैं।
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इन गांवों में खारा पानी है। सरकार ने इन गांवों को न तो रेनीवेल योजना से जोड़ा है और नहीं सरकार ने पीने के पानी का कोई और इंतजाम किया है। लोगों ने पानी स्टोर करने के लिए अपने घरों के आंगन में वाटर टेंक बना रखे हैं। एक पानी का टेंकर खरीदकर लोग आठ-दस दिन तक चलाते हैं।
शहीदाने मेवात सभा द्वारा इन गांवों में किए गए एक सर्वे में पाया कि गांव सुलतानपुर में 165 और बुखाराका में 80 वाटर टेंकरों सहित नगीना खंड में लोगों ने पीने का पानी स्टोर करने के लिये करीब दो हजार से अधिक वाटर टेंक बना रखे हैं।