पीड़िता की मौत पर छलके सबके आंसू
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अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनील गुप्ता का कहना है कि शुरूआत से ही उन्नाव पीड़िता की हालत बेहद गंभीर थी। उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास डॉक्टरों की ओर से किए गए थे, लेकिन चिकित्सीय विज्ञान भी अत्यधिक फीसदी बर्न केस में लाचार हो जाता है। वहीं बर्न विभागाध्यक्ष डॉ. शलभ कुमार का कहना था कि उन्नाव पीड़िता का दर्द न सिर्फ उनके विभाग, बल्कि अस्पताल में मौजूद हर कोई कर्मचारी, डॉक्टर या नर्स महसूस कर रही थी। उसकी मौत की खबर ने वाकई सभी को गहरा दुख पहुंचाया है।