दिन शुक्रवार, शाम करीब सवा 6 बजे का वक्त। नोएडा सेक्टर 11 स्थित शिक्त टेकभनो फेब प्रोडक्ट के तीसरे माले पर निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माण के लिए विभिन्न मालों पर लकड़ी की बल्ली और गार्डर के सपोर्टर खड़े कर दिए थे। धीरे-धीरे घड़ी की सुई आगे बढ़ी और मजदूर उतनी ही शिद्दत से काम पर लगे रहे। जैसे ही घड़ी साढ़े 6 और पौने 7 बजे के बीच पहुंची, इस फैक्ट्री में तेजी से बल्ली, गार्डर और तमाम मलबे भरभराकर गिर गए।
मौके पर चीख-पुकार मच गई। लोग बचाओ-बचाओ की आवाज देने लगे। आसपास के लोग फैक्ट्री की ओर दौड़ने लगे। पुलिस को सूचना दे दी गई। मलबों में दबे लोगों को ढूंढना शुरू कर दिया गया। सबकुछ बेहद तेजी से हो रही थी। लेकिन जो मलबे में दबे थे, उनके लिए यह तेजी भी कमजोर होती सांसों को थामने में नाकाम रही।
दो ने मलबे के नीचे दबकर ही दम तोड़ दिया। निर्माण कार्य देख रही फैक्ट्री मालिक मौके पर मौजूद थी। वह होशोहवास खो चुकी थी। यह कहानी उन्होंने बयां की जो घटना के दौरान आसपास मौजूद थे। हालांकि प्रशासन ने सभी को तेजी दिखाते हुए एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचा दिया। जिला अस्पताल के इमरजेंसी में तैनात कर्मी ने बताया कि जबतक मजदूरों को अस्पताल लाया गया। तबतक गोपी और जेंनेंद्र की मौत हो चुकी थी।
प्रथम दृष्टया मौत दम घुटने से ही हुई है। हालांकि गोपी और जेनेंद्र केशव को पोस्टमार्टम के लिए सेक्टर 94 भेज दिया गया है। विस्तृत जांच और कार्रवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही तय है। वहीं, एक मजदूर सागर के सिर और पैर में गंभीर चोंट हैं। उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया है। आशु का ईलाज जिला अस्पताल में ही चल रहा है।
ऑक्सीजन मिलने लगे, पहले गर्दन निकाली
करीब पौने सात बजे की घटना में राहत दल से मदद मिलने में करीब डेढ़ घंटे का वक्त लग गया। राहत दल में जुटे एक कर्मी ने बताया कि करीब साढ़े 7 बजे बिल्डिंग के अगले हिस्से में लकड़ी की बल्ली, लोहे के गार्डर, मिट्टी का ढेर पड़ा हुआ था। जहां व्यक्ति के दबे होने का संदेह हुआ। तत्काल मलबा हटाकर लोगों को खोजना शुरू कर दिया।
एक मजदूर के दबे होने का अहसास होने पर काफी देर तक कड़ी मशक्कत के बाद उसका गर्दन तक का हिस्सा निकाला। ऐसा इसलिए किया, ताकि उसे सांस आने लगे। उसके बाद धड़ तक मिट्टी हटाने में आधा घंटे का वक्त लग गया।
काफी देर में शरीर का पूरा हिस्सा निकाला गया। बताया गया है कि हादसा करीब पौने सात बजे हुआ। लेकिन मलबे के नीचे दबी सांसों को मदद मिलने में करीब डेढ़ घंटे का वक्त लग गया। जब तक राहत कार्य शुरू हुआ, तबतक उन्होंने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
करीब पौने नौ बजे डीएम सुहास एलवाई मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। बिल्डिंग के निर्माण में कहां लापरवाही बरती जा रही थी। इसका पूरा जायजा लिया। मामले में कार्रवाई को आश्वस्त किया। करीब साढ़े नौ बजे पुलिस आयुक्त आलोक सिंह मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बिल्डिंग में अंदर जाकर मलबे को देखा। उनके साथ तमाम सरकारी अमला साथ रहा। उन्होंने यह देखने की कोशिश की कि कोई अन्य व्यक्ति तो मलबे में नहीं दबा है।
खोजी कुत्तों व मशीनों से ढूंढे शव
घटना बड़ी होने के कारण पुलिस, प्रशासन, प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग, एनडीआरएफ की टीम लगी रही। करीब साढ़े नौ बजे एनडीआरएफ टीम की एक टुकड़ी खोजी कुत्तों केसाथ पहुंच गई। कुत्तों से देखा गया कि कहीं कोई व्यक्ति तो दबा हुआ नहीं है। व्यक्ति की तलाश के लिए आधुनिक मशीन की मदद भी ली गई।
जिला अस्पताल पहुंचे पुलिस-प्रशासनिक अफसर
चूंकि सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचा गया। ऐसे में डीएम सुहास एलवाई ने आश्वस्त किया कि सभी घायलों को हर संभव मदद मिलेगी। खुद डीएम सुहास एलवाई अधीनस्थ अफसरों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मृतक व घायलों के संबंध में जानकारी ली।
1994 से चल रही थी कंपनी
बिल्डिंग का एक हिस्सा गिरने के बाद प्राधिकरण और प्रशासन ने इमारत की तमाम कुंडली खंगाल ली है। देखा गया है कि सेक्टर 11 स्थित शक्ति टेकभनो फेब प्रोडक्ट फैक्ट्री कब से संचालित थी और कब आवंटित हुई। डीएम सुहास एलवाई ने बताया कि पुलिस, प्रशासन, प्राधिकरण, एनडीआरएफ के अफस्र मौके पर काम कर रहे हैं। बिल्डिंग की छानबीन की जा रही है। नोएडा प्राधिकरण इसकी जांच कर रही है। प्रथम दृष्टया 1979 में वास्तविक आवंटन, 1989 में ट्रांसफर हुआ। 1994 से चल रही है। कंस्ट्रक्शन नई है या पुरानी। इसकी जांच शुरू करा दी गई है।