आकाश नगर की निर्माणाधीन अवैध पांच मंजिला इमारत में खामियां तो कई थीं, लेकिन बिल्डिंग के जमींदोज होने का बड़ा कारण जलभराव माना जा रहा है। करीब छह माह से इमारत निर्माणाधीन थी। बारिश के बाद बिल्डिंग में पानी भर गया था। इसकी वजह से कुछ पिलर्स दरक गए और इमारत गिर गई। बिल्डिंग में काम कर रहे मजदूरों को बाहर भागने तक का मौका नहीं मिला।
विज्ञापन
2 of 5
building collapse
- फोटो : अमर उजाला
जीडीए के इंजीनियरों का कहना है कि इस बिल्डिंग का फाउंडेशन तय मानकों के मुताबिक नहीं बनाया गया था। लोड के हिसाब से इमारत और पिलर्स का डिजाइन नहीं था। पिलर्स में कमजोर सरिया लगाया गया और सीमेंट की मात्रा कम रखी गई। फाउंडेशन जहां खत्म होता है, वहां मिट्टी का बेस ठीक नहीं रहा। मिट्टी का परीक्षण भी नहीं कराया गया।
विज्ञापन
3 of 5
building collapse
- फोटो : अमर उजाला
यानी तकनीकी रूप से कई खामियां थीं ही, एक बड़ी दिक्कत जल निकासी न होने की वजह से भी खड़ी हुई। शनिवार को रात भर रुक-रुक कर बारिश होती रही। इसकी वजह से डासना रोड के मुख्य मार्ग का पानी भी आकाशनगर में पहुंच गया और यहीं रुक गया। रिसता हुआ यह पानी बिल्डिंग में पहुंच गया और बिल्डिंग के पूरब की ओर के कुछ पिलर्स दरक गए।
4 of 5
building collapse
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पांच लेंटर और भारी-भरकम बीम का भार पिलर्स नहीं सह पाए और इमारत मलबे में तब्दील हो गई। जलभराव से भी रेस्क्यू में दिक्कत आई। गलियों में दो-दो फीट पानी भरा हुआ था। प्रशासन और मुख्यमंत्री की ओर से गठित की गई जांच टीम हादसे के विस्तृत कारणों का पता लगाएगी। शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
शनिवार रात ही इमारत में रहने पहुंचे थे मजदूर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बिल्डिंग में काम कर रहे मजदूर इसके बगल में ही अस्थायी कमरे बनाकर परिवार समेत रह रहे थे। शनिवार को बारिश होने के कारण पानी भर जाने से वह अपने कमरे छोड़कर निर्माणाधीन इमारत में पहुंच गए थे। हादसे से ठीक पहले मजदूरों ने खाना खाया था।