जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में रविवार शाम छात्रों के दो गुटों में जमकर मारपीट हुई। इससे दोनों पक्षों के 30 से अधिक छात्र घायल हुए हैं। घायलों में छात्र संघ अध्यक्ष आईशी घोष सहित कई महिला शिक्षक भी हैं। छात्रसंघ ने मारपीट व तोड़फोड़ का एबीवीपी पर आरोप लगाया है। जबकि एबीवीपी का कहना है कि यह सब लेफ्ट ने किया है।
बताया जाता है कि नकाब पहने 40 से 50 युवकों की भीड़ कैंपस में पहुंची और हॉस्टल में घुसकर हमला किया। कई वाहनों को तोड़ दिया। आरोप है कि हमलावर छात्राओें के हॉस्टल में भी घुस गए और मारपीट की। हमले की सूचना के बाद कई एंबुलेंस कैंपस पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
जेएनयू कैंपस में आठ अक्तूबर से हॉस्टल फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रसंघ समेत आम छात्रों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है। छात्रों ने दिसंबर की सेमेस्टर परीक्षाओं का बहिष्कार किया था। इसी के तहत पांच जनवरी यानी रविवार को विंटर सेमेस्टर में दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन का आखिरी दिन था।
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दो दिन तक लेफ्ट संगठनों ने सर्वर रूम पर कब्जा करके रजिस्ट्रेशन में बाधा पहुंचाई थी। रविवार शाम कैंपस के टी प्वाइंट के सामने छात्र विरोध दर्ज कर रहे थे। थोड़ा अंधेरा होते ही कैंपस में अचानक 40 से 50 युवकों की भीड़ चेहरे पर नकाब पहने और हाथों में लाठियां लेकर घुसी और छात्रों से मारपीट व तोड़फोड़ शुरू कर दी। युवकों की भीड़ ने गर्ल्स हॉस्टल में जाकर शीशे तोड़े और छात्राओं से भी मारपीट की।
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कैंपस में देर रात तक विरोध प्रदर्शन
जेएनयू छात्रसंघ और शिक्षक संघ ने पूरी घटना पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार से जवाब मांगा है। इसके अलावा कुलपति प्रो. कुमार से इस्तीफे की भी मांग रखी है। कैंपस में एक ओर एबीवीपी विरोध कर रहा है तो दूसरी ओर लेफ्ट छात्र संगठन विरोध दर्ज करवा रहा है। दोनों गुट एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
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चार घंटे अराजकता का माहौल, कुलपति नदारद
कैंपस में चार घंटों तक अराजकता का माहौल रहा, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन सामने तक नहीं आया। प्रशासन ने जख्मी छात्रों को अस्पताल तक नहीं पहुंचाया। इसके अलावा हालात पर काबू पाने के लिए पहुंची पुलिस को कैंपस के अंदर आने तक नहीं दिया गया। पुलिस मुख्य गेट के बाहर खड़ी रही। करीब पौने नौ बजे पुलिस को कैंपस के अंदर आने की अनुमति मिली। इसके बाद पुलिस हॉस्टल व कैंपस में जांच करने पहुंच पाई।
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जेएनयू प्रोक्टर व भाजपा नेता सतेंद्र अवाना भी शामिल: बालाजी
जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एनसाई बालाजी ने पूरी घटना का आरोप एबीवीपी पर लगाया है। बालाजी का कहना है कि भीड़ के बीच भाजपा नेता सतेंद्र अवाना भी शामिल थे। इसमें जेएनयू के एक प्रोक्टर भी शामिल थे, जिनके इशारे पर यह पूरी घटना हुई है। एबीवीपी डीयू के सदस्य मारपीट करने वालों में शामिल थे।
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इन सवालों के विश्वविद्यालय प्रशासन को देने होंगे जवाब
- सुरक्षा गार्ड हर गेट पर तैनात होते हैं। ऐसे में हाथों में लाठी लेकर बाहरी युवा कैंपस में कैसे प्रवेश करते हैं।
- कैंपस में चार घंटे तक अराजकता का माहौल रहा, ऐसे में सुरक्षा गार्ड ने उन युवकों को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की।
-चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर के पास अधिकार रहता है कि कैंपस में इस प्रकार छात्र गुटों में मारपीट होने पर वह पुलिस को बुला सकता है। ऐसे में जब कैंपस, हॉस्टल व ढाबा में मारपीट चल रही तो उन्होंने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी
-जेएनयू कैंपस के अंदर ही कुलपति, रजिस्ट्रार समेत अन्य पदाधिकारियों के भी आवास हैं। कैंपस में इतनी मारपीट होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते वे घरों से बाहर क्यों नहीं निकले।
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जेएनयू में हिंसा मामले को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि हिंसा से स्तब्ध हूं। छात्रों पर हमला किया गया। दिल्ली पुलिस को हिंसा रोककर तत्काल शांति बहाल करनी चाहिए। देश कैसे तरक्की करेगा, जब छात्र यूनिवर्सिटी कैंपस में ही सुरक्षित नहीं रहेंगे। केजरीवाल ने उपराज्यपाल से बात कर दिल्ली पुलिस को कानून-व्यवस्था बहाल करने का निर्देश देने की मांग की। केजरीवाल ने कहा कि एलजी ने आश्वासन दिया है कि वे पूरे मामले पर नजदीक से नजर रख रहे हैं और उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
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उधर, आप सांसद संजय सिंह ने ट्विटर पर महिला प्रोफेसर सुचित्रा सेन का फोटो जारी कर कहा कि यह तस्वीर देखकर दिल दहल जाएगा। भाजपा ने क्या हाल कर दिया है। इसी जेएनयू से पढ़कर भाजपा नेता वित्त मंत्री और विदेश मंत्री बने हैं। इसी ने देश को हजारों अद्भुत प्रतिभाएं दी हैं। यह देश के गुरुजनों पर गुंडों का हमला है। भाजपा देश को बर्बाद कर रही है।
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संजय सिंह ने कहा कि जब से अमित शाह देश के गृह मंत्री बने हैं, हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। दिल्ली में कानून-व्यवस्था बिगड़ गई है। कभी वकीलों को मारा जाता है तो कभी छात्रों को। अमित शाह को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। गैंगवार हो रहा है। उन्होंने अमित शाह से इस्तीफा देने की मांग की।
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पुलिस नहीं रोक सकी गुंडागर्दी : चोपड़ा
जेएनयू कैंपस में शाम को शुरू हिंसा पर नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सभी ने कैंपस में हिंसा के बावजूद पुलिस की चुप्पी पर उसे कठघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने कहा कि पुलिस जेएनयू में गुंडागर्दी रोकने के लिए नहीं, लेकिन जामिया छात्रावास में जबरन घुसकर विद्यार्थियों से अमानवीय व्यवहार के लिए है। चोपड़ा ने एक ट्वीट में आला पुलिस अधिकारियों से सवाल किया कि सरेआम गुंडागर्दी क्या आप देख नहीं रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं जेएनयू के पूर्व छात्र योगेंद्र यादव को भी धक्का-मुक्की से जूझना पड़ा। उन्होंने कहा कि पहले ऐसा माहौल कभी नहीं देखा। जेएनयू परिसर में प्रवेश करने से रोका गया और धक्का-मुक्की भी हुई। यादव ने कहा कि जेएनयू के अंदर घुसकर हंगामा करने वालों पर कार्रवाई की बजाय नेताओं को प्रवेश करने से रोका गया।