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रविवार के आयोजन के लिए तैयार हो रहे किसान, अपने-अपने गांव भेज रहे यह संदेश

Fri, 18 Dec 2020 09:17 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कृषि कानूनों का विरोध करते किसान - फोटो : amar ujala
मौसम चाहे कितनी भी सर्द क्यों न हो, किसान आंदोलन की रफ्तार धीमी होती नहीं दिख रही है। केंद्र सरकार की ओर से किसानों को समझाने की तमाम कोशिशों के बावजूद किसान रविवार के पूर्व घोषित आयोजन के लिए तैयार दिख रहे हैं। दिल्ली में आंदोलन का हिस्सा बने किसान अपने गांव संदेश भेजकर लोगों से अपील कर रहे हैं कि वह आंदोलन में जान गवांने वाले किसानों की याद में श्रद्धांजलि सभाएं रखें। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इसके लिए एक पोस्टर जारी किया है। इसमें उन किसानों की तस्वीरें हैं, जिनकी आंदोलन के दौरान मौत हो गई है।

तीन हफ्ते बाद तापमान में भले ही कई डिग्री की गिरावट आई, लेकिन किसानों के हौंसले का पारा गिरता नजर नहीं आ रही है। शनिवार को सिंघु बॉर्डर पर सुबह नौ बजे से शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी तो इसके बाद आगे की रणनीति तैयार करने के लिए बैठकें होंगी। करीब दो घंटे के दौरान किसान आंदोलन के शहीदों को याद किया जाएगा। अब तक टीकरी, सिंघु बॉर्डर पर 10 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं, जिन्हें याद कर आंदोलन को और मजबूत करने में किसान संगठन लगातार मंथन कर रहे हैं। 

अमृतसर के जोगिंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने फोन से अपने लोगों को बता दिया है कि रविवार दोपहर 11 बजे से श्रद्धांजलि सभा होनी है। इसके बाद वह अपने स्तर पर तैयारी कर लें। गांव के सभी लोगों को शामिल होने को कहा है। मोर्चा की तरफ से जारी तस्वीर भी वाट्सअप से भेज दी है। कोशिश यही है कि पूरे देश में होने वाले इस कार्यक्रम से सरकार पर दबाव बढ़ाया जाए।
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निहंग सिख - फोटो : amar ujala
घोड़ों के साथ डटे हैं निहंग सिख
सिंघु बॉर्डर पर पूरे दिन गुरबाणी और अरदास के साथ कीर्तन का सिलसिला जारी रहा। स्टेज से अपने संबोधन में किसान नेता लगातार केंद्र के रवैये के खिलाफ अपनी आवाजें बुलंद करते रहे तो दूसरी तरफ निहंग सिख भी अपने घोड़े और अस्त्र शस्त्रों के साथ सीमा पर डटे रहे। 
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कृषि कानूनों का विरोध करते किसान - फोटो : amar ujala
अलाव जलाने के लिए इकट्ठा की गई लकड़ियां
आंदोलन स्थल पर जगह-जगह पोस्टरों के जरिए अलग-अलग संगठनों की तरफ से कृषि कानूनों पर विरोध जताया गया। रात के वक्त सर्दी से बचने के लिए जगह जगह लकड़ियां इकट्ठा की गई हैं ताकि उसे अलाव के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके। 

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जैकेट खरीदते किसान - फोटो : amar ujala
सर्दियों के कपड़ों से सजी है सड़क
बढ़ती सर्दी के बीच सिंघु बॉर्डर पर सबसे अधिक गर्म कपड़ों की बिक्री हो रही है। जैकेट, हाफ जैकेट, स्वेटर और कंबल के अलावा रजाई बनाने वालों को भी धड़ाधड़ ऑर्डर मिल रहे हैं। 

किसानों के रजाई के रेट में डिस्काउंट
रजाई विक्रेता असलम ने बताया कि सर्दी इतनी बढ़ गई है कि रात के वक्त कंबल के बावजूद किसानों को भीषण सर्दी से जूझना पड़ रहा है। लेकिन पक्के इरादे के साथ बॉर्डर पर पहुंचे किसान हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। बचाव के लिए रजाई बनवाने के ऑर्डर भी खूब आ रहे हैं। रोजाना 10-15 रजाईयां तैयार कर रहे हैं ताकि किसी को परेशानी न आए। आगे कुछ और दुकानें हैं, जहां से किसानों की जरूरतें पूरी हो रही हैं। किसानों को दिक्कत न आए इसलिए उनके लिए रेट 50 रुपये कम कर दिए हैं। 
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महिलाएं भी ले रही हैं प्रदर्शन में हिस्सा - फोटो : amar ujala
महिलाएं भी किसानों को करती रहीं संबोधित
सिंघु बॉर्डर पर शुक्रवार को महिलाएं भी पूरे दिन किसानों को संबोधित करती रहीं। पंजाब के अलग अलग हिस्सों से पहुंची महिलाएं भी किसानों से यही अपील करती रहीं कि मांगे पूरी होने तक यहीं डटे रहने की सभी तैयारी रखें। कोई भी बगैर मांगे पूरी हुए घर लौटने के लिए तैयार नहीं है।
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