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दिल्ली में टॉयलेट जाते वक्त किन्नरों को करना पड़ता है इस शर्मनाक सच्चाई का सामना

Sat, 22 Apr 2017 04:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि देश की राजधानी में स्‍थानीय निकायों के लिए होने वाले चुनाव में एक ऐसा जेंडर भी है जो पहली बार मतदान करने जा रहा है और उसे किस शर्मनाक सच्चाई का सामना रोज करना पड़ता है।
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transgenders
असल में 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंड यानि किन्नर को थर्ड जेंडर यानि तीसरे लिंग के तौर पर कानूनी मान्यता दी जिसके बाद राजधानी में रहने वाले किन्नर पहली बार अपने मत का प्रयोग एमसीडी चुनाव में करने जा रहे हैं। 
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transgenders
इससे भी बड़ी बात ये है कि इस जेंडर की जो समस्या है उसे सुनकर कोई भी चौंक जाए। असल में दिल्ली में ऐसा कोई भी पब्लिक टॉयलेट नहीं है जिसे थर्ड जेंडर के लोग आसानी से इस्तेमाल कर सकें। 

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- फोटो : सोशल मीड‌िया
बड़ी बात ये है कि जिस एमसीडी चुनाव को भाजपा और आम आदमी पार्टी के ‌‌लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर देशव्यापी मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है वहां एक ट्रांसजेंडर उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रही है जिसकी ओर किसी का ध्यान नहीं है।
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- फोटो : सोशल मीड‌िया
बता दें कि सिर्फ दिल्ली में ट्रांसजेंडर समुदाय के लगभग 90,000 लोग रहते हैं। मुख्य रूप से इस समुदाय के लोग पहाड़गंज, दरियागंज, बुराड़ी, सुभाष पार्क और लक्ष्मी नगर इलाके में रहते हैं।
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हैरानी की बात ये है कि इतनी बड़ी संख्या में रहने के बावजूद 2014 के लोकसभा चुनाव तक केवल 636 ट्रांसजेंडर लोगों के पास ही मतदाता पहचान पत्र थे।
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- फोटो : सोशल मीड‌िया
अपनी परेशान के बारे में बात करते हुए एक किन्नर कहती हैं कि जैसे ही हम किसी पब्लिक टॉयलेट में प्रवेश करते हैं लोग हमारी ओर शक भरी निगाह से देखने लगते हैं। 

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- फोटो : SELF
ऐसे में हम न तो पुरुषों के टॉयलेट में प्रवेश कर पाते हैं और न ही महिला शौचालयों का इस्तेमाल कर पाते हैं। सार्वजनिक जगहों पर हम अपनी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए कहां जाएं इसे सुनने वाला कोई नहीं है। 

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- फोटो : सोशल मीड‌िया
ऐसा नहीं है कि इन्हें केवल पब्लिक टॉयलेट के इस्तेमाल के समय ही परेशानी का सामना करना पड़ता है बल्कि, अस्पताल, स्कूल और पार्क के इस्तेमाल करने से भी उन्हें रोक दिया जाता है।
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मैसूर एक मात्र ऐसा शहर है जहां किन्नरों के लिए रेस्ट रूम और पब्लिक टॉयलेट को तैयार किया गया है। सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को देशव्यापी अभियान के तौर पर शुरु किया है लेकिन अभी भी इस वर्ग के लिए पब्लिक टॉयलेट की ओर सरकार का ध्यान नहीं गया है देखना है कि दिल्ली में होने जा रहे एमसीडी चुनाव में सत्ता में आने के बाद इनके लिए क्या होता है।
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