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जिस भाई की हो गई मौत, उसे बताया फर्जी डिग्री का जिम्मेदार

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दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर मामले में शनिवार को बड़ा खुलासा सामने आया है। तोमर ने भाई के जरिए लॉ की डिग्री हासिल की थी। यह खुलासा तोमर ने ही पुलिस पूछताछ में किया है। दक्षिण जिला पुलिस अधिकािरयों का कहना है कि फर्जी डिग्री के बड़े रैकेट का जल्द ही खुलासा हो सकता है। रैकेट के जरिए ही जितेंद्र तोमर ने डिग्री हासिल की है। (सभी फोटो: अनिल कुमार/ अमर उजाला ब्यूरो)
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जिस भाई की हो गई मौत, उसे बताया फर्जी डिग्री का जिम्मेदार

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दक्षिण जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूर्व कानून मंत्री ने पूछताछ में बताया है कि उसके बड़े भाई आरपीएस तोमर थे। वह बीमार रहते थे और चार वर्ष पहले उनकी मौत हो गई थी। एलएलबी की डिग्री के लिए उसके भाई ने भी बात की थी और भाई ने ही फॉर्म भरवाया था और साइन करवाए थे। लेकिन उसे ये पता नहीं है कि भाई ने कहां से और कैसे डिग्री हासिल की। पुलिस ने जब भाई के जरिए पैसे देने की बात पूछी तो इस सवाल को तोमर टाल गए।
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दक्षिण जिला पुलिस अधिकारी मानते हैं कि डिग्री को हासिल करने के लिए पैसा दिया गया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त का कहना है कि अभी तक पुलिस कागजात को वेरिफाई कर रही थी। अब आगे इस बात की जांच की जाएगी की तोमर को फर्जी डिग्री दिलाने में कोई रैकेट है या नहीं। अगर है तो इसके पीछे कौन है। मुंगेर व भागलपुर में कागजात के वेरिफिकेशन से साफ स्पष्ष्ट हो रहा है कि कोई न कोई गिरोह काम कर रहा है।

जिस भाई की हो गई मौत, उसे बताया फर्जी डिग्री का जिम्मेदार

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अरविंद केजरीवाल के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की फर्जी डिग्री मामले में एक और खुलासा सामने आया है। जितेंद्र तोमर ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के शिवाजी कॉलेज में भी दाखिला लिया था। तोमर ने बीएससी में दाखिला लिया था। पूर्व कानून मंत्री ने डीयू के राजधानी कॉलेज में बीए पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था। साउथ-ईस्टर्न रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त आरएस कृष्णनईया ने बताया कि जितेंद्र तोमर ने राजधानी कॉलेज में 1985-86 में दाखिला लिया था। इससे पहले 1983-84 में डीयू के शिवाजी कॉलेज में बीएससी में दाखिला लिया था।
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उन्होंने बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि शिवाजी कॉलेज में दाखिला कैसे लिया था और वहां से पढ़ाई क्यों छोड़ दी थी। दिल्ली पुलिस की एक टीम शिवाजी कॉलेज के रिकॉर्ड को खंगाल रही है। संयुक्त पुलिस आयुक्त का कहना है कि जितेंद्र तोमर की बीएससी की डिग्री व मार्कशीट दोनों फर्जी हैं। केएस कॉलेज फैजाबाद व उसकी यूनिवर्सिटी अवध विश्वविद्यालय में जितेंद्र तोमर का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।
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संयुक्त पुलिस आयुक्त ने कहा कि मुंगेर के कॉलेज में जितेंद्र तोमर का दाखिला रजिस्टर में नाम मिला है। इसके अलावा कॉलेज में जितेंद्र तोमर का कोई रिकार्ड नहीं मिला है। कॉलेज में उसकी अटेंडेंस नहीं है। मुंगेर में तोमर वीएनएसएल लॉ कॉलेज के बारे में तोमर कुछ नहीं बता पाए। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वीएनएसएल कॉलेज के दाखिला रजिस्टर में तोमर का नाम कैसे सामने आया, जबकि जितेंद्र तोमर का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
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पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र तोमर के मामले में दिल्ली पुलिस ने भ्रष्टाचार के पहलू से जांच करने की बात शनिवार को कोर्ट में कही। पुलिस ने कहा कि तोमर के पास कई फर्जी प्रमाण पत्र मिले हैं और यह बनाने में उनकी किसने मदद की है, यह जानकारी हासिल की जानी है। इस आधार पर विवि व कॉलेज अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम लगाया जा सकता है।

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साकेत जिला अदालत की एमएम पूजा अग्रवाल के समक्ष पुलिस की ओर से विशेष अधिवक्ता तरुणवीर सिंह खेहर ने कहा कि तोमर ने एलएलबी की डिग्री लेने के लिए अयोध्या के साकेत कॉलेज की बीएससी की डिग्री भागलपुर विश्वविद्यालय में जमा की थी लेकिन उसने माइग्रेशन बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का जमा करवाया है। यह प्रमाण पत्र बनाने में किन लोगों ने उनकी मदद की, यह जानने के बाद उन लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम लगाया जाएगा।

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अभियोजन पक्ष ने कहा कि जांच के दौरान कई ऐसे शिक्षा संस्थान सामने आए हैं, जिनसे तोमर जुड़े हैं या उनके मालिक हैं। इसके अलावा उनके कई और भी काम हैं, जिनकी जानकारी हासिल करनी है। उन्होंने भागलपुर विवि का माइग्रेशन कहां से और कैसे हासिल किया यह जानकारी हासिल करनी है और इस काम में उनका किसने साथ दिया यह भी पता लगाना है।
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भागलपुर विवि के रजिस्टर के पन्ने फटे मिले हैं और ऐसा तोमर को बचाने के लिए उनके जानकार ने किया और इस अधिकारी के बारे में पता लगाना है। इसके अलावा जो आरटीआई तोमर ने दी है वह फर्जी है और विवि प्रशासन ने उसका खंडन किया है। उस पर आरटीआई पर सरकारी मुहर है और दस्तखत भी हैं। इसे तैयार करने में किस अधिकारी या शख्स ने मदद की है यह भी पता लगाया जाना है।
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