कोरोना राखियां
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बाजार इन दिनों स्वदेशी के रंग में रंगा है। चीन के पुराने स्टॉक वाली राखी तो बिक रही है, लेकिन ज्यादातर मांग केसरिया रंग वाली धागे से बनी राखी की है। हालांकि कोरोना की वजह से बाजार का रंग फीका है।
- अशोक रंधावा, व्यापारी, सरोजिनी नगर
चीन निर्मित सामान का पूर्णत: विरोध है। राखी का धंधा मंदा है। एनसीआर में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था नहीं होने से व्यापार नहीं हो रहा है। बाजार में सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं हो रहा है।
- राकेश यादव, अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन
चीन से करीब 6 हजार करोड़ रुपये का व्यापार राखी पर होता था। इस बार स्वदेशी राखी की वजह से छोटे उद्योगों को मुनाफा मिलेगा।
- हेमंत गुप्ता, महामंत्री, उद्योग व्यापार मंडल
क्या कहती है बहनें
कोरोना ने राखी के त्योहार को भी फीका कर दिया है। जयपुर में भाई रहता है। कोरोना काल में राखी बांधने जाना बेहद ही खतरनाक है। घर पर ही स्वास्थ्य की कामना करना ज्यादा बेहतर है। तकनीकी दौर में वर्चुअल आरती करके ही भाई की स्वास्थ्य की कामना करना बेहतर है।
- शीतल श्रीवास्तव
कोविड-19 के दौर में सोशल डिस्टेंसिंग आवश्यक है। रक्षाबंधन भी इस बार सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मनाना अच्छा है। इस दौर में कही भी जाना उचित नहीं है। भाई-बहन के रिश्ता तो सदा के लिए होता है, लेकिन यह वर्ष दूर से ही बेहतर स्वास्थ्य की कामना करने वाला है।
- अनामिका प्रसाद