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जानें कितनी तेज होगी फेज तीन में मेट्रो की फ्रीक्वेंसी

Wed, 04 Oct 2017 08:33 PM IST
बयूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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निर्माणाधीन मेट्रो फेज तीन में 90 से 100 सेकेंड की फ्रीक्वेंसी पर ट्रेन चलेगी। वर्तमान में अभी सबसे कम फ्रीक्वेंसी यलो लाइन पर 2 मिनट 18 सेकेंड है। दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसी) के मुताबिक फेज तीन में सिग्नलिंग की नई तकनीकी कम्यूनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) का इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बेहतर होगी। पहली बार मेट्रो फेज तीन में ड्राइवरलेस ट्रेन भी चलेगी।
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डीएमआरसी के मुताबिक वर्तमान तकनीक में अधिकतम सिस्टम मैन्युअली ऑपरेट किया जाता है। इससे मौजूदा लाइन पर दो ट्रेनों के बीच की दूरी 50 मीटर से लेकर 90 मीटर रखी जाती है। यह कोच की संख्या पर निर्भर करता है। मेट्रो फेज तीन में नई तकनीक की मदद से दो ट्रेन के बीच की दूरी को घटाकर 30 मीटर तक की जा सकती है। दो ट्रेन के बीच की दूरी कम होने से ट्रैक पर ज्यादा ट्रेन उतारने का मौका मिलेगा। जिससे फ्रीक्वेंसी बेहतर होगी। खास बात यह है कि नई तकनीक तेज होने के साथ ही सुरक्षित भी है।
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दिल्ली मेट्रो - फोटो : self
मेट्रो के मुताबिक नवंबर तक फेज तीन की मजेंटा लाइन (जनकपुरी पश्चिम से बॉटेनिल गार्डन) जो कि 36.98 किलोमीटर है उसके एक सेक्शन को शुरू कर दिया जाएगा। बॉटेनिक  गार्डन से कालकाजी मंदिर के इस सेक्शन पर नई सिग्नलिंग सिस्टम का प्रयोग होगा। मेट्रो इस ट्रैक 100 सेकेंड की फ्रीक्वेंसी देने की कोशिश करेगा।

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बताते चले की वर्तमान में मेट्रो का 218 किलोमीटर का नेटवर्क है। फेज तीन में भीड़ बेहतर फ्रीक्वेंसी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए मेट्रो को कुल 1654 कोच की जरूरत होगी। इसके जरिये मेट्रो अपने मौजूदा लाइन पर सभी ट्रेन को 8 कोच में बदलेगी।
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मेट्रो मौजूदा लाइन पर ट्रेन की फ्रीक्वेंसी

लाइन     कहा से कहा तक                 ट्रेन फ्रीक्वेंसी
रेड         रिठाला से दिलशाग गार्डन     3 मिनट
यलो       समयपुर  बादली से गुडग़ांव    2.18 मिनट
ब्लू         द्वारका से नोएडा/वैशाली        2.35 मिनट
ग्रीन       मुंडका से कीर्ति नगर            3.48 मिनट
वायलेट    कश्मीरी गेट से बदरपुर       3.24 मिनट
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कैसे काम करेगा सीबीटीसी
कम्यूनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिग्नलिंग सिस्टम (सीबीटीसी) केबल रहित यानी रेडियो फ्रीक्वेंसी पर आधारित सिग्नलिंग व्यवस्था है। इससे मेट्रो में सिग्नलिंग की तकनीकी खामियां खत्म हो जाएगी। डीएमआरसी के मुताबिक इस तकनीक से मेट्रो ट्रेन खुद अपनी स्पीड, ब्रेक, गति तेज करना, दरवाजों का परिचालन करेगा। इसमें मैनुअली कुछ नहीं होगा। इस मेट्रो ट्रेन में सेंसर भी लगे है, अगर ट्रैक पर कोई ऐसी चीज पड़ी दिखेगी जिससे मेट्रो की यात्रा बाधित हो सकती है तो मेट्रो ट्रेन खुद दूर से उसे रीड करके ट्रेन का ब्रेक लगा देगा।
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