त्योहारों के साथ-साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन मिलने वाली छूट की शुरूआत हो चुकी है। आज हम आपको पॉच ऐसी बातें बता रहें हैं त्योहारी छूटों में आपका मजा किरकिरा कर सकती हैं! नवदुर्गा का प्रारंभ भी इसी बात का द्योतक है कि त्योहारी मांग की शुरूआत होने वाली है। ऐसे में बाजार फिर से गुलजार नजर आने लगते हैं और पितृ पक्ष के चलते बंद रही खरीददारी फिर से अपना रंग बिखेरने लगती है।
एक आम उपभोक्ता इसके लिए पहले से ही जमा पूंजी तैयार रखता है या फिर विभिन्न प्रकार के मिलने वाले लोन से अपनी जरूरतों का सामान खरीदता है। लेकिन त्योहारों के बीच आप की खुशी का रंग फीका न हो जाए इसके लिए खरीददारी करते समय इन जरूरी बातों का ध्यान रखने की जरूरत है।
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1.खरीददारी को टालना - आमतौर साल पर भर चलने वाले इन ऑफरों में कुछ खास बदलाव नहीं होता है बस त्योहारों के बदलने के साथ यह भी नवदुर्गा ऑफर, दीवाली ऑफर, होली ऑफर, में बदल जाती हैं। इसलिए असमय इन गैरजरूरी खरीददारीयों से बचा जा सकता है और आगे आने वाले समय में जब आपका बजट अच्छा हो तब खरीद की जा सकती है।
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2.नुकसान का डर - विक्रेता अपने प्रत्येक उपभोक्ता की प्राथमिक जरुरतों को जानता है और इसी बात का फायदा उठाकर वह अपने ग्राहकों को विज्ञापन की सहायता से यह बताने की कोशिश करता है कि भविष्य में इतनी बड़ी छूट नहीं मिलेगी। इससे बचने के लिए ग्राहकों को अपनी जरुरतों की सूची बनाना चाहिए। इसके अलावा सभी उपभोक्ताओं को अपनी इच्छाओं और जरूरतों में अन्तर अवश्य पता होना चाहिए। ऐसा करके आपके पास एक मजबूत बजट भी बना रहेगा।
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3.साथी के दबाव में खरीददारी से बचें - आज का युवा वर्ग बहुत सी चीजें अपने साथी के दबाव में या उसकी देखा-देखी में खरीद लेता है लेकिन कई बार यह उसके काम की नहीं होती। अगर आप अपनी जरुरतों के हिसाब से खरीद करें तो आपका बजट बिगड़ने से बच सकता है।
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4.भ्रामक छूट से बचना - बिक्री के दौरान विक्रेता सदैव आपकी खरीददारी को बढ़ाने का प्रयास करता है। इसके लिए वह आपको कई प्रकार के प्रलोभन और छूट भी देता है जिसमें एक के साथ मु्फ्त, 50 प्रतिशत की छूट और कई तरह के स्क्रैच कूपन आदि होते हैं लेकिन आपको इन भ्रामक छूटों से बचने के लिए अपनी मितव्ययिता को बरकरार रखते हुए बुद्धिमानी का परिचय देना होगा।
5. गुणवत्ता से समझौता - त्योहारों के समय मिलने वाली छूट में कई बार उत्पादों की गुणवक्ता से समझौता किया जाता है और इससे होने वाली बचत को छूट का नाम दिया जाता है। इसके आलावा स्टाक क्लियरेंस के नाम पर भी कई तरह की छूट दी जाती है जो गुणवक्ता युक्त नहीं होती है और इस प्रकार ग्राहकों को नुकशान का सामना करना पड़ता है।