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खुलासा: एम्स में आग की चार सबसे बड़ी वजह सामने आईं, 1983 से पहले के नियम हो रखे थे लागू

Mon, 19 Aug 2019 02:20 AM IST
Vikas Kumar परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

-45 दमकल वाहन, 250 से ज्यादा जवानों और 120 बार आईएनए से पानी लाने के बाद भी आग पर नियंत्रण क्यों नहीं था?
-इन्हीं सवालों को लेकर रविवार को घटना के दूसरे दिन ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए
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एम्स लगी आग पर काबू पाते दमकल कर्मी - फोटो : अमर उजाला
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भीषण आग पर काबू पाने के बाद हर किसी के जहन में सवाल है कि आखिर आग ने भीषण रूप कैसे ले लिया, जबकि समय पर दमकल वाहन आदि भी पहुंच गए थे। ऐसी क्या वजह थी कि छह घंटे तक टीचिंग ब्लॉक आग की लपेटों में घिरा रहा। 

अंत में एनडीआरएफ के करीब डेढ़ सौ जवान तक बुलाने पड़ गए। 45 दमकल वाहन, 250 से ज्यादा जवानों और 120 बार आईएनए से पानी लाने के बाद भी आग पर नियंत्रण क्यों नहीं था? इन्हीं सवालों को लेकर रविवार को घटना के दूसरे दिन ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। वहीं, दिल्ली अग्निशमन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आग के उस पूरे मंजर से जुड़ी लापरवाही को उजागर किया।
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एम्स में लगी भीषण आग - फोटो : अमर उजाला
वजह-1 : इधर आग और उधर थी 32 जिंदगी
अधिकारी ने बताया कि शनिवार शाम 4:50 बजे जब अग्निशमन विभाग को एम्स के टीचिंग ब्लॉक में आग की सूचना मिली तो 22 दमकल वाहन और करीब 13 कर्मचारी मौके पर पहुंचे। यहां टीचिंग ब्लॉक की पहली मंजिल पर आग बुझाने की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच दमकल कर्मचारियों को दूसरी मंजिल पर आईसीयू में कई मरीजों के मौजूद होने की सूचना मिली तो वे आगे बढ़ने से रुक गए। आग पर काबू करने से पहले मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना जरूरी था। करीब 32 मरीजों को गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के आईसीयू से सुरक्षित निकालने में खासा समय लग गया।
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एम्स में लगी आग के अगले दिन की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
वजह-2 : अतिक्रमण ने रोक दी आग बुझाने की रफ्तार
दूसरी मंजिल पर लगी आग को बुझाने के लिए दमकल कर्मचारियों ने ब्लॉक को चारों ओर से घेरकर पानी का छिड़काव करने की योजना बनाई तो एक टीम पीछे की ओर दौड़ पड़ी, लेकिन वहां अतिक्रमण था। कहीं जनरेटर तो कहीं कबाड़ आदि रखा होने की वजह से अग्निशमन विभाग का हाईड्रोलिक सिस्टम भी काम नहीं कर सकता था। इसलिए टीम को वापस आगे आकर मशक्कत करनी पड़ी। इसमें भी काफी समय लग गया। एम्स में अतिक्रमण की हालत सिर्फ टीचिंग ब्लॉक तक सीमित नहीं है। ऐसे कई ब्लॉक हैं, जिनके पीछे काफी अतिक्रमण है। 

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एम्स में लगी भीषण आग - फोटो : अमर उजाला
वजह-3 : कांच और लकड़ी से बने छिपे केबिन
दूसरी मंजिल पर आग काबू कर ली गई तो ऊपरी मंजिल चपेट में आ गईं। पांचवीं मंजिल पर आग बाहर नहीं निकल पा रही थी। क्योंकि, बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं था। अंदर कमरों में कांच और लकड़ी से छिपे हुए केबिन थे। इन केबिन में पानी अंदर तक पहुंचाने के लिए उन्हें तोड़ना जरूरी था, लेकिन तब तक इमारत इतनी गर्म हो गई थी कि ये आसान नहीं था। इसमें भी दमकल को खासा वक्त लगा। दमकल कर्मचारियों की मानें तो इन छिपे हुए केबिन का मतलब उन्हें भी समझ नहीं आया।
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एम्स में लगी भीषण आग से मरीज परेशान - फोटो : अमर उजाला
वजह-4 : 1983 के नियमों पर चला आ रहा टीचिंग ब्लॉक
जिस टीचिंग ब्लॉक में आग लगी थी उस ब्लॉक को फायर की एनओसी प्राप्त है या नहीं? अभी इस पर भी संशय है। दिल्ली अग्निशमन विभाग के अनुसार, वर्ष 1983 के नियमों के आधार पर ये टीचिंग ब्लॉक अब तक चल रहा है। उस वक्त अग्निशमन से जुड़े नियमों में इतनी सख्ती नहीं थी। विभाग को ये भी नहीं पता कि अंतिम बार इस ब्लॉक को लेकर कब अग्निशमन से जुड़े इंतजामों पर औचक निरीक्षण किया है। विभाग की मानें तो भले ही एम्स के पास अग्निशमन को लेकर टीम है, लेकिन अग्निशमन विभाग से निरीक्षण को लेकर उनके पास रिकॉर्ड में कुछ भी उपलब्ध नहीं है। ब्लॉक को एनओसी प्राप्त है या नहीं, ये सोमवार को विभागीय कार्यालय में फाइल देखने के बाद पता चलेगा।
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एम्स में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
ये भी सामने आई वजह
-प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी थी, लेकिन जब आग धीरे-धीरे फैलने लगी तो एसी कंप्रेशर के फटने से आग ऊपरी मंजिल की ओर बढ़ गई थी। 
-जैसे जैसे आग बढ़ रही थी तो और भी एसी के कंप्रेशर फटने लगे। अंदर ही अंदर आग एक से दूसरे और तीसरे कमरों तक बढ़ती चली गई।
-पूरे ब्लॉक में फॉल सीलिंग ने आग को काफी बढ़ावा दिया। फॉल सीलिंग (लटकती छत) के जरिये आग एक से दूसरे कमरे में बड़ी ही आसानी के साथ पहुंच रही थी। सीलिंग में मौजूद बिजली तारों ने भी इसे बढ़ावा दिया। 
-टीचिंग ब्लॉक में कई प्रयोगशालाएं थीं। यहां काफी संख्या में रासायनिक तत्व रखे थे। आग लगने के बाद इनमें ब्लास्ट हुए। कई तरह की गैसें भी लीक हुईं, जिन्होंने आग को बढ़ावा दिया। 

इसलिए बढ़ जाती है आग : कैंटल
दिल्ली अग्निशमन विभाग के निदेशक विपिन कैंटल ने बताया कि समय के साथ आग का बढ़ना स्वाभाविक होता है। जैसे-जैसे आग बढ़ती है तो रासायनिक क्रियाओं के चलते इनकी लपटों में विस्तार भी होता है। एक बार आग अपने विकराल रूप में आ जाए तो उसे किसी भी इमारत में अंदर जाकर काबू कर पाना आसान नहीं होता। क्योंकि, पूरी इमारत कई सौ गुना तापमान पर गर्म हो जाती है। इसमें दमकल टीम को जान का खतरा भी होता है।
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