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दिल्लीः एम्स में लगी आग से उठ रहे ये सवाल, कैसे होगी भरपाई

परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 18 Aug 2019 01:21 AM IST
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एम्स में लगी आग से मरीज हुए परेशान - फोटो : अमर उजाला
बीते 8 महीने के दौरान दूसरी सबसे बड़ी आग पर काबू पाने के बाद एम्स प्रबंधन खामियों की जांच में जुटा है, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा नुकसान मरीजों का होने की जानकारी मिली है। शनिवार देर रात तक प्रबंधन नुकसान की जानकारी देने से कतराता रहा। दमकल विभाग के सूत्रों से आग से हजारों मरीजों के ब्लड सैंपल नष्ट होने की जानकारी मिली। इतना ही नहीं, दो दर्जन से ज्यादा चिकित्सीय शोध और प्रशासनिक कागजात भी स्वाहा हो गए। दमकल कर्मचारियों का कहना है कि एम्स की कई प्रयोगशालाएं इससे प्रभावित हुई हैं। कई कंप्यूटर, फाइलें, अलमारी, बड़े रेफ्रिजरेटर तक जल चुके हैं। 
 
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एम्स लगी आग पर काबू पाते दमकल कर्मी - फोटो : अमर उजाला
बताया जा रहा है कि जिस ब्लॉक में यह आग लगी, वहां 12 प्रयोगशालाएं हैं। इनमें से एक वाइरालजी भी है। यहां संक्रमण से जुड़ी बीमारियों के लिए मरीजों के ब्लड सैंपल की जांच की जाती है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से लेकर इबोला, जीका वायरस तक की जांचें यहां होती हैं। यह देश की अत्याधुनिक प्रयोगशाला मानी जाती है। यहां एक दिन में हजारों सैंपल की जांच करने की क्षमता है। एम्स के ही सूत्रों की मानें तो डीएनए जांच की अत्याधुनिक मशीनों को भी नुकसान हुआ है। डॉक्टरों की मानें तो जिस ब्लॉक में आग लगी, वहां माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब हैं। इनमें वाइरालजी के अलावा जीवाणु तत्व, कवक विज्ञान, एचआईवी, इम्मुनोलोगी, ओकुलर माइक्रोबायोलॉजी, माइक्रोप्लाज्मा, सूक्ष्म जीवाणु तत्व सहित 12 प्रयोगशालाएं हैं। ये सभी प्रयोगशालाएं मरीजों की लाइफलाइन मानी जाती हैं। यहां से मिली रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर मरीजों को उपचार देते हैं।

 

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एम्स में लगी भीषण आग - फोटो : अमर उजाला
डॉक्टरों ने बताया कि मरीजों के ब्लड सैंपल के अलावा यहां कई तरह के चिकित्सीय शोध भी तैयार किए जाते हैं। आग में विद्यार्थियों के दो दर्जन से ज्यादा ऐसे शोध भी नष्ट हो गए हैं। एम्स के ही अनुसार, सालाना इस विभाग में 60 से 70 चिकित्सीय शोध राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित होते हैं।

बचे सैंपल धुएं से हो सकते हैं खराब
एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि वर्ष 1957 में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की स्थापना हुई थी। तब से अब तक इस विभाग में लगातार अत्याधुनिक तकनीकी बदलाव भी हुए हैं। उन्होंने बताया कि आग से ज्यादा घातक धुआं है। इसने दो से तीन घंटे तक न सिर्फ माइक्रोबायोलॉजी की इमारत, बल्कि पूरे एम्स में अंधेरा रखा। आग की चपेट से भले ही सैंपल बच गए हों, लेकिन उन्होंने बताया कि धुएं की चपेट में आने के बाद ब्लड सैंपल पूरी तरह खराब हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि भले ही इस घटना में सभी सुरक्षित हैं, लेकिन एम्स को काफी बड़ा नुकसान हुआ है। 

 

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delhi AIIMS - फोटो : अमर उजाला
कई दिन तक जांच हो सकती है प्रभावित
पहचान छिपाने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि आग से नुकसान के बाद अगले कुछ दिन तक संस्थान में मरीजों की रक्त जांच से जुड़ी परेशानी हो सकती है। इस नुकसान की भरपाई में कितना वक्त लगेगा, यह तो समय ही बता सकता है, लेकिन लाखों मरीजों के इलाज से जुड़ी जानकारियों के अलावा शोध व प्रशासनिक दस्तावेज नष्ट होने के बाद इसकी भरपाई कैसे होगी, ये प्रबंधन के आगे बड़ा सवाल है?

 

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एम्स में लगी भीषण आग - फोटो : अमर उजाला
5वीं मंजिल तक पहुंची आग, कई ओपीडी चपेट में
शनिवार देर शाम टीचिंग ब्लॉक की तीसरी मंजिल तक आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन इसके कुछ ही देर बाद दमकल कर्मचारियों को आग ऊपरी चौथी और 5वीं मंजिल पर होने की जानकारी मिली। यहां एम्स के सर्जरी, हड्डी रोग, यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी हैं। बताया जा रहा है कि ओपीडी में रखे कंप्यूटर और मरीजों से जुड़े कागजात आदि भी आग की चपेट में आए हैं।
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