हमारे जीवन में अध्यापक का अहम योगदान है। इन्हीं शिक्षकों से सीखी हुई चीजें न केवल हमें करियर में आगे बढ़ाती हैं बल्कि जीवन भर काम आती हैं। शिक्षक कोई भी हो सकता है, माता-पिता, भाई-बहन या स्कूल, कॉलेज का अध्यापक या कोई अन्य। पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर मनाए जाने वाले टीचर्स डे पर हमने जिले के कुछ प्रतिष्ठित अधिकारियों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों से उनके जीवन में विशेष योगदान देने वाले शिक्षकों के बारे में बात की।
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दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर का योगदान
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बीएन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
हम अपने जीवन और करियर के लिए जो सीखते हैं, उसमें शिक्षकों का विशेष योगदान होता है। मेरे जीवन में भी कई शिक्षकों का खास योगदान है। खासकर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर संगम लाल का। उन्होंने न केवल किताबी बातें बल्कि नैतिक मूल्यों की भी जानकारी दी।-बीएन सिंह, जिलाधिकारी
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सबकी इज्जत करना सिखाया
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पंजाब स्थित होशियारपर जिले के स्कूल में हमारे शिक्षक केएस द्योल और कॉलेज में आरएस बावा ने हमें किताबी ज्ञान के साथ-साथ नैतिक शिक्षा का भी ज्ञान दिया। जो आज भी काम आ रहा है। उन्होंने हमें शिक्षण के साथ आंतरिक रूप से भी एक सभ्य नागरिक व देशभक्ति की शिक्षा दी। दोनों ने हमें सबकी इज्जत करना सिखाया।-डॉ. जेपी शर्मा, वाइस चांसलर जीबीयू
पिता ने हर मोड़ पर दिखाई राह
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लवकुमार
- फोटो : अमर उजाला
मैं जो भी हूं, उसमें मेरे पिता महेंद्रपाल का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने जीवन के हर मोड़ पर मुझे राह दिखाई है। मेरे पिता बैंक अधिकारी थे और मेरे ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि ऐसा कोई काम करूं जो समाज सेवा से जुड़ा हो, चुनौतियां हों और कुछ नया करने का मौका मिले। उन्होंने मुझे सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली भेजा। दो बार सफलता न मिलने के बावजूद उन्होंने मेरा उत्साहवर्धन किया और तीसरे प्रयास में मुझे सफलता मिल गई।-लवकुमार, एसएसपी, गौतमबुद्धनगर
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डॉ. हरि सिंह ने बदला नजरिया
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कुरुक्षेत्र के एनआईईटी कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. हरि सिंह ने मेरे जीवन जीने का नजरिया ही बदल दिया। वह न केवल विद्यार्थियों को बहुत अच्छा पढ़ाते थे बल्कि एक अभिभावक की तरह उनके हर सुख-दुख का ख्याल रखते थे। सही मायनों में जीवन के हर पहलू पर उनकी दी हुई शिक्षा और अनुशासन ही काम आया।-डॉ. रोहित गर्ग, निदेशक जीएनओआईटी कॉलेेज
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प्रो. कारमेषु का अमूल्य योगदान
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मेरे करियर में गुरु एवं सलाहकार प्रो. कारमेषु का अत्यधिक योगदान है। मैं वर्ष 2000 में जेएनयू में शोध के दौरान उनके संपर्क में आया था। मार्गदर्शन, सहायता व धैर्य के लिए हमेशा उनका सम्मान करता रहूंगा। मुझे दृढ़ता से लगता है कि एक प्रोफेसर के रूप में मेरी क्षमता, शोध व सोच को स्थापित करने में उनका अमूल्य योगदान है।-डॉ. राजीव अग्रवाल, निदेशक जीएल बजाज कॉलेज
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डॉ. हमीउद्दीन से सीखी कर्तव्यनिष्ठा
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मेरी जिंदगी में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद हमीउद्दीन का बड़ा योगदान रहा। मैंने जीवन को कर्तव्यनिष्ठा के साथ जीना उन्हीं से सीखा। मैं हतप्रभ रह गया जब एक बार उन्होंने मुझे कई मनीआर्डर करने को दिए जो उन गरीब छात्रों के लिए थे जो प्रोफेसर साहब के गांव के थे और पढ़ना चाहते थे। जो भी उनके पास पढ़ने की नीयत से आया उसे उन्होंने पढ़ाया। इसके लिए अपने बच्चों की सुविधाओं तक में कटौती की।-पीके पचौरी, निदेशक एनआईईटी कॉलेज
शिक्षक ने खत्म की झिझक
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स्कूल में शिक्षा ग्रहण करते हुए अपनी बात दूसरों के सामने प्रस्तुत करते हुए मुझे झिझक महसूस होती थी। फर्रुखाबाद के एक स्कूल में शिक्षक सोजॉन जोसेफ ने मेरी परेशानी को देखकर जगह-जगह उत्साह बढ़ाया। आज मंच पर जाकर मैं बेबाकी से अपना पक्ष रख सकती हूं।-कृतिका सक्सेना, छात्रा जीएल बजाज
अनुशासन से लक्ष्य की ओर कदम
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मऊ जैसे छोटे शहर से आकर एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज के तृतीय वर्ष में मैंने कॉलेज टॉप किया है। बचपन में पिता बेहद अनुशासन में रहना सिखाते थे। उस समय तो यह अधिक कठोर लगता था लेकिन आज लगता है इसी अनुशासन और संयम से मैं आईएएस बनने के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा पा रही हूं।-गरिमा सिंह, जीएल बजाज कॉलेज
स्कूल और कॉलेज में जहां बहुत से अध्यापकों ने शिक्षा देकर मेरे करियर को रास्ता दिखलाया, वहीं एनआईईटी कॉलेज के प्रोफेसर पांडे बीबी लाल ने शिक्षा के साथ-साथ जीवन जीने का तरीका भी सिखाया। न केवल वह जानकारी का भंडार हैं बल्कि उनके कठिन श्रम और अनुशासन से मिली प्रेरणा की जीवन में किसी मुकाम पर ले जाने में अहम भूमिका है।-लिपि गौर, छात्रा एनआईईटी कॉलेज