तबलीगी जमात के प्रमुख हजरत मौलाना साद ने हैरानी जताई कि मुसलमान अपने बच्चों को कर्ज लेकर स्कूलों में तो पढ़ा रहे हैं पर मदरसे नहीं भेज रहे, जहां बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। (सभी फोटोः ओम प्रकाश/अमर उजाला, फिरोजपुर झिरका/गुड़गांव)
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मोहब्बत का पैगाम देने जमा हुए मुस्लिम, हिंदुओं ने खिलाया खाना
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उन्होंने कहा कि मुसलमान बच्चों को मजहबी शिक्षा दिलाना भूल रहा है। उन्होंने मुसलमानों का आह्वान किया कि वे बच्चों को मदरसे जरूर भेजें। उन्हें दीनी तालीम जरूर दें। मजहबी तालीम को स्कूली शिक्षा से ऊपर रखें।
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वह राष्ट्रीय राजधानी से करीब सौ किलोमीटर दूर फिरोजपुर झिरका के नावली गांव में आयोजित धार्मिक जलसे में बोल रहे थे। उन्होंने अंग्रेजी स्कूलों के मुकाबले मदरसों में घटती बच्चों की संख्या पर चिंता जताई। साद ने कहा कि तालीम का अर्थ सिर्फ पढ़ना-पढ़ाना नहीं है, बल्कि उससे भी आगे बढ़कर सीखना-सिखाना है।
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साद ने जलसे में देश-विदेश से भारी सख्या में पहुंचे मुस्लिमों को संबोधित करते हुए नेताओं से सावधान रहने की हिदायत दी। कहा, नेता आपका कभी भला नहीं कर सकता। आप बार-बार सोचते हैं कि अगली बार नेता कुछ देंगे, पर वह कुछ नहीं देते हैं और न देंगे। इसलिए सिर्फ अल्लाह पर भरोसा रखो, वही तुम्हारा भला करेगा।
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उन्होंने कहा कि घर पहुंचते ही बच्चों, महिलाओं से पहले ये पूछो कि उन्होंने नमाज पढ़ी या नहीं। औरतों को नमाज पढ़ने के लिए प्रेरित करो। उन्हें सम्मान दो, नौकरानी मत समझो। आपस में मिल जुलकर रहो। लड़ो मत। नेक नीयत से रहोगे तो आगे बढ़ोगे। जो हुकूमत ने मना किया है उसे मत करो। दो दिवसीय जलसा रविवार को शुरू हुआ था।
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एकता की मिसाल दिखी जलसे में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली। देश-विदेश से पहुंचे लाखों लोगों को खिलाने-पिलाने के इंतजाम में कई हिंदू स्वयंसेवियों और संस्था ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। जलसे में शाकाहारी भोजन परोसा गया।
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क्या है तबलीगी जमात वर्ष 1927 में तबलीगी जमात का उद्भव मेवात परिक्षेत्र (दिल्ली समेत उत्तर भारत) में हुआ। इसका मकसद इस्लामी शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना है। इस समय मेवात में इसका गहरा असर है। इसके संस्थापक मौलाना इलियास रहमतुल्लाह ने की थी। उनका जन्म खांदला, देवबंद में हुआ था। तबलीगी जमात के प्रमुख हजरत मौलाना साद इस्लामी शिक्षा का प्रचार-प्रसार करते हैं।