सुशांत सिंह राजपूत-रिया चक्रवर्ती (फाइल फोटो)
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मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी खास तौर से आत्महत्या के केस में होती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मरने से पहले शख्स की मानसिक स्थिति कैसी थी। वह किस तरह से सोचता था या फिर उसके जहन में क्या बातें चल रही थीं और क्या उसके अंदर आत्महत्या का ख्याल भी था या नहीं। मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी में मनोचिकित्सक, फॉरेंसिक की टीम (एफएसएल) आदि मृतक के मरने से पहले जिन जगहों, लोगों या चीजों से जुड़ा था उन सबका अध्ययन किया जाता है। उसके मैसेज, सोशल मीडिया पोस्ट व लोगों से की गई बातचीत का अध्ययन। उसकी मानसिक स्थिति का पता लगाया जाता है कि वह सुसाइड कर सकता था या नहीं। इस अध्ययन के सहारे बुराड़ी के एक घर में 11 लोगों की आत्महत्या की गुत्थी को सुलझाया गया था। जानिए क्या थी वो रिपोर्ट....