हालांकि डीयू के कुछ कॉलेजों ने 'कम एंड सी ब्लड ऑन माई स्कर्ट' कैंपेने के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए थे पर फिर भी यह रैली विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन से कमला नगर मार्केट होते हुए शुक्रवार को डीयू के नॉर्थ कैंपस में सफलतापूर्वक पहुंची। (सभी फोटोः सोशल मीडिया)
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जामिया और जेएनयू में विफल रहने के बाद डीयू के स्टूडेंट्स ने इसे सफल बनाया।
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जामिया और जेएनयू की तरह डीयू छात्रों ने पैड जगह-जगह न चिपकाकर बल्कि इसे साथ लेकर घूमे।
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करीब 70 बच्चे जिसमें अधिकतर डीयू और कुछ जेएनयू के भी छात्र शामिल थे ने रैलियां निकालीं।
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इन सभी ने पीरियड्स को टैबू समझे जाने वाले विषय से आम विषय बनाने की अपील की।
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इस रैली का उद्देश्य पीरियड्स के साथ जुड़े कलंक को मिटाना था।
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इन छात्रों ने पैड्स पर, कपडों पर सेक्सिज्म के विरोध में नारे लिखे थे।
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रैली की सह संयोजक दीप्ति शर्मा ने बताया कि वो चाहती हैं कि लोग इसके बारे में खुलकर बात करें।
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इस साल के मार्च महीने ने एक वैश्विक कैंपेन को जन्म दिया है जो महिला दिवस पर हैशटैग #PadAgainstSexism के नाम से शुरू हुआ था।
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पहले जामिया फिर जेएनयू और अब डीयू में हुए ये कैंपेन इसी अंतरराष्ट्रीय कैंपेन का ही हिस्सा है।
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यह कैंपेन जर्मन युवती एलोन कास्त्रातिया ने शुरू किया था।
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रैली कर रहे छात्रों को एसजीटीबी खालसा कॉलेज और किरोड़ीमल कॉलेज में घुसने दिया गया था।
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वहीं मिरांडा हाउस और रामजस जैसे कॉलेजों ने इनकी एंट्री पर रोक लगा दी थी।
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कमला नगर मार्केट से होते हुए छात्र दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में इकट्ठा हुए।
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यहां उन्होंने मौजूदा लोगों से बात की। फिर वहां लोगों से सैनिटरी पैड्स पर संदेश लिखवाए गए।