स्नैप डील की कंपनी सेक्रेटरी दीप्ति सरना के अपहरण कांड में शामिल अपराधी पेशेवर नहीं थे। पुलिस को इस मामले में कई अहम सुराग मिल चुके हैं। एसएसपी ने खुद दीप्ति के घर जाकर शनिवार को फिर करीब एक घंटे पूछताछ की। दीप्ति से उन संस्थानों की सूची भी ली गई है, जिनमें वह पहले काम कर चुकी है। (सभी फोटो: पप्पू नेहरा/अमर उजाला, गाजियाबाद)
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पापा का हाथ थाम बैठी रही दीप्ति, घटना को याद कर रो पड़ती है
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इन संस्थानों में उसके करीबी लोगों की भी सूची तैयार की गई। पुलिस ने अभी अपहरण कांड के राज से पर्दा तो नहीं उठाया, लेकिन ये जरूर कह दिया कि अपहरण का मास्टर माइंड कोई और नहीं दीप्ति का ही करीबी है। एसएसपी ने रविवार शाम तक घटना का खुलासा करने का दावा किया है। एसएसपी धर्मेंद्र सिंह शनिवार करीब पौने दो बजे दीप्ति से पूछताछ करने उसके घर पहुंचे।
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एसएसपी ने दीप्ति के एजूकेशन के समय पर करीबी रहे लोगों के बारे में भी जानकारी ली। एसएसपी ने माना कि इस पूछताछ में उन्हें जांच के लिए कई ऐसे बिंदु भी मिले हैं, जो शुक्रवार को दीप्ति के लौटने के बाद भी पुलिस के पास नहीं थे। हालांकि जांच जारी होने के कारण फिलहाल इन बिंदुओं को सार्वजनिक नहीं किया गया।
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एसएसपी ने यह भी बताया कि दीप्ति का अपहरण हुआ था, लेकिन इसके पीछे हार्ड कोर क्रिमिनल गैंग के होने की संभावना बेहद कम है। अपहरण में उसी के किसी करीबी का हाथ हो सकता है। दीप्ति के पिता नरेंद्र सरना ने बताया कि दीप्ति या उनकी कभी किसी से लड़ाई नहीं हुई। ऐसे में इस प्रकरण के पीछे अगर किसी जानकार के शामिल होने की बात पुलिस कह रही है तो यह अचंभित करने वाली है। वह चाहते हैं कि पुलिस अपहरणकर्ता को जल्द गिरफ्तार कर घटना का खुलासा करे।
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बुधवार रात सवा आठ बजे से शुक्रवार सुबह तक बदमाशों की कैद में रही दीप्ति इस घटना से सहमी हुई है। पिता नरेंद्र सरना के मुताबिक दीप्ति का कहना है कि ‘पापा मुझे ऑफिस नहीं जाना है, मैं घर पर ही ट्यूशन पढ़ा लूंगी। घर से बाहर निकलना मेरे लिए मुश्किल होगा, इतना कहकर दीप्ति रोने लगती है।’
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परिवार वाले उसे दिलासा देकर इस सदमे से बाहर लाने का प्रयास कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि नौकरी करना या न करना दीप्ति की मर्जी पर निर्भर होगा। नरेंद्र सरना ने बताया कि दीप्ति के ऑफिस से उसे बहुत सपोर्ट मिल रहा है। पिता की मानें तो कंपनी प्रबंधन ने उसे घर से ही लैपटॉप के जरिए काम करने का विकल्प दिया है। उसके नार्मल होने तक ऑफिस आने की जरूरत नहीं है। पिता ने उसे समझाया कि हिम्मत से काम ले।
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36 घंटे परेशानी और टेंशन में रही दीप्ति की आंखों से नींद उड़ गई है। घटनाक्रम को याद कर वह बार-बार डर जाती है। शुक्रवार रात वह पापा नरेंद्र सरना का हाथ पकड़कर बैठी रही। परिवार वालों की मानें तो रात को वह बमुश्किल दो-तीन घंटे ही सो पाई। परिजनों के मुताबिक वह अभी ठीक से खाना भी नहीं खा रही। शुक्रवार रात उसने बस थोड़े से दाल-चावल खाए और सुबह उठकर ब्रेड ली। दोपहर में सिर्फ एक रोटी खायी।
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दीप्ति से मिलने के लिए मीडिया ही नहीं उसके परिजनों को भी लंबा इंतजार करना पड़ा। शनिवार को मीडिया के सामने दीप्ति तो नहीं आई, लेकिन उसकी झलक पाने के लिए गुड़गांव से आए रिश्तेदारों को भी चार घंटे से ज्यादा समय लगा। इसकी वजह दीप्ति के दिमाग पर हुआ इस घटना का असर है, वह रिश्तेदारों को देखकर रो पड़ती है।