शव को ले जाती एंबुलेंस
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माता-पिता, भाइयों और बहन का जनाजा देखकर फूट-फूटकर रो पड़े परवेज और नावेद
इससे पहले अब्दुल मतलूब की बेटी आफिया उर्फ मोनी तो परिजनों के शव देखकर बेसुध हो गई। होश आने पर अपने मामा से लिपटकर रोने लगी। उसका कहना था शुक्रवार को ही तो अम्मी, बाजी और भाई उसके घर से लौटे थे। दिल्ली पहुंचकर उसने अपने परिजनों से वीडियो कॉल पर बात की थी। अगले दिन सुबह उसको यह मनहूस खबर मिली। मतलूब के दूर दराज से शायद ही कोई रिश्तेदार होगा जो दिल्ली उनके घर न पहुंचा हो। अस्र की नमाज के बाद जैसे ही छह जनाजे एकसाथ उठे तो नावेद, परवेज और आफिया बिलख पड़े। पड़ोसी और रिश्तेदारों ने किसी तरह उन्हें संभाला।