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इच्छामृत्यु की मांग के बीच 7 शिक्षामित्रों की हालत बिगड़ी

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प्रदेश में सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन रद्द होने के बाद शुरू हुआ शिक्षामित्रों का आंदोलन और उग्र हो गया। नोएडा में प्रदर्शन दौरान बुधवार को सात महिला शिक्षामित्रों की हालत बिगड़ गई उन्हें कैलाश अस्पताल ले जाना पड़ा जहां उनका इलाज चल रहा है। (सभी फोटोः अमित त्यागी/अमर उजाला)
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इच्छामृत्यु की मांग के बीच 7 शिक्षामित्रों की हालत बिगड़ी

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यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि संकट की घड़ी में सरकार शिक्षामित्रों के साथ है। इस बारे में मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी और सीएम अखिलेश यादव के बीच भी वार्ता हुई है। सरकार के पास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता है जल्द ही सरकार अपील करेगी।
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मेरठ में भी जिलाधिकारी ऑफिस में शिक्षा मित्रों के भारी हंगामे के चलते पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। मैनपुरी में स्कूल खोलने पर अड़े प्रधानाध्यापक को शिक्षा मित्रों ने पीट दिया।

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इस बीच नगर विकास मंत्री उत्तर प्रदेश आजम खां ने कहा कि शिक्षामित्र निराश न हों, सरकार उनके लिए रास्ता निकालेगी और सर्वोच्च न्यायालय जाएगी।
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इस बीच प्रदेश में आंदोलनरत हजारों शिक्षामित्रों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर इच्छामृत्यु की मांग की है। इसमें हापुड़ के 670, भदोही के 875, बलिया के 275, मेरठ के 800 और झांसी के 1754 शिक्षामित्र शामिल हैं।
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प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के कारण शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त होने के बाद अब उनका परिवार दो राहे पर खड़ा हो गया है।
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प्राथमिक विद्यालयों में 2001 से सेवा दे रहे शिक्षामित्रों को 15 वर्ष की सेवा के बाद बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद अब उनके लिए अपना और परिवार का खर्च चलाना कठिन हो गया है।

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शिक्षामित्रों के समायोजन में सरकार की चलताऊ नीतियों के कारण अब शिक्षामित्र नौकरी से पूरी तरह बाहर हो चुके हैं। अब शिक्षामित्र किस हैसियत से विद्यालयों को बंद करने की कार्रवाई कर रहे हैं, यह समझ से परे है।

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प्रदेश में 131 हजार स्नातक शिक्षामित्र और 40 हजार बारहवीं पास शिक्षामित्र प्राथमिक विद्यालयों में संविदाकर्मी के रूप में सेवा दे रहे थे। सरकार ने पहले चरण में 59 हजार शिक्षामित्रों को अगस्त 2014 में प्राथमिक विद्यालयों में समायोजित कर दिया था।

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मई-जुलाई 2015 में 72 हजार शिक्षामित्रों को प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में समायोजित किया गया था। स्कूलों से बाहर किए जाने के बाद अब 40 वर्ष की उम्र में शिक्षामित्र कौन सी नौकरी खोजने जाएं।
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सहायक अध्यापक बनाए जाते समय इनसे शिक्षामित्र पद का त्यागपत्र ले लिया गया था। इसके बाद यह प्राथमिक विद्यालय में संविदाकर्मी नहीं रह गए। अब हाईकोर्ट की ओर से शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन भी निरस्त कर दिए जाने के बाद यह कहीं के नहीं रहे।
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