जेएनयू छात्रसंघ चुनावों में उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाली शेहला राशिद सोहरा पहली कश्मीरी छात्रा हैं, जिसने छात्रसंघ चुनावों में जीत का परचम लहराया है। (जेएनयू छात्र संघ चुनाव का पूरा परिणाम देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें=> लाल दुर्ग में एबीवीपी ने लगाई सेंध)
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इस कश्मीरी लड़की ने दिल्ली के लाल दुर्ग पर फहराया परचम
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वहीं, लाल झंडे को भगवा की चुनौती संग जीत हासिल करने वाले सौरभ और स्टूडेंट फॉर को पहचान देने वाले दिलीप ने जेएनयू में उत्तर प्रदेश का दबदबा बनाया है।
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जेएनयू में यह पहला मौका था कि जब लेफ्ट संगठनों ने सेंट्रल पैनल में तीन-तीन कश्मीरी छात्रों पर दांव खेला था, जिसमें से श्रीनगर की बेटी शेहला राशिद सोहरा ने आइसा की ओर से चुनाव लड़ा और उपाध्यक्ष पद हासिल किया।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में शेहला ने बताया कि आम परिवार में जन्म हुआ है। पिता का छोटा सा व्यवसाय व घर में एक छोटी बहन भी है।
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स्कूली शिक्षा श्रीनगर से हासिल की है। ऐसे में बेटियों को तो छोड़ो बेटों को भी लोकतंत्र व अधिकारों की बात करने की आजादी नहीं है।
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हालांकि अब जीत के बाद बेटियों के लिए आवाज उठाने के साथ उन्हें आगे बढ़ाना मकसद है। आईसा के बैनर तले जेएनयू चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने वाली शेहला राशिद शोहरा को 1387 वोट मिले।
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कश्मीर मुद्दे पर कहती हैं कि भारत-पाकिस्तान अपनी-अपनी बात कहते हैं, लेकिन आम कश्मीरी क्या चाहता है, कोई पार्टी या सरकार नहीं पूछती।
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जहां इस चुनाव में पहली बार कश्मीर की महिला प्रत्याशी ने जीत हासिल की वहीं सालों बाद एबीवीपी ने इस चुनाव में अपनी दखल दी। उन्होंने कहा कि हम भी लोकतंत्र में आजादी संग जीना चाहते हैं। इसी जज्बे को हर कश्मीरी बच्चा महसूस कर सके। उसी के लिए काम करूंगी।