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डेंगू ने ली सात साल की बच्ची की जान, फिर भी अस्पताल ने दो हफ्ते में वसूले 18 लाख रुपये

Tue, 21 Nov 2017 11:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
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adya - फोटो : twitter
प्राइवेट अस्पतालों मेें किस तरह मरीज के परिजनों से वसूली की जा सकती है इसकी मिसाल आद्या नामक सात वर्षीय बच्ची का केस है। दिल्ली के द्वारका में रहने वाले जयंत सिंह की बेटी आद्या को डेंगू की वजह से पहले राकलैंड और बाद में फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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hospital bill - फोटो : twitter
बच्ची करीब 15 दिन अस्पताल में रही और इस दौरान उसका इलाज का खर्च एक लाख रुपये रोजाना के आसपास आया। अस्पताल का बिल लगभग 18 लाख रुपये आया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जय प्रकाश नड्डा ने मामले के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ट्वीट किया कि वे जांच कराने के बाद जरूरी कार्रवाई करेंगे।
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hospital bill - फोटो : twitter
आद्या के पिता जयंत का कहना है कि उन्होंने बेटी की मौत के बाद सारा पैसा अस्पताल को चुका दिया पर जब बिल देखा तो उन्हें बेहद तकलीफ हुई। जरा जरा सी सुविधाओं के लिए अस्पताल ने अनाप-शनाप पैसा वसूला।

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adya - फोटो : twitter
पिता ने बताया कि आद्या को 27 अगस्त को बेहद तेज बुखार हो गया था। उन्होंने उसे द्वारका के राकलैंड अस्पताल में भरती करा दिया। वहां उन्होंने देखा कि स्वाइन फ्लू का मरीज भी उसी रूम में है। उन्होंने कमरा बदल लिया।
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adya - फोटो : twitter
31 अगस्ता को टेस्ट से पता चला कि आद्या को टाइप फोर डेंगू है तो उन्होंने गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल जाने का फैसला किया। वहां जाते ही उसे वेंटिलेटर पर रख दिया गया और इसकी जानकारी परिजोनों को नहीं दी गई।
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adya - फोटो : twitter
आईसीयू में हम बस अपनी बेटी को शीशे से ही देश सकते थे। 14 सितंबर को बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मां ने कहा कि हमसे उस शीट के पैसे तक वसूले गए जिसमें आद्या को हमें दिया गया। जयंत का कहना है कि सस्ती उपलब्ध दवाओं की जगह महंगी दवा दी गईं।
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adya - फोटो : twitter
2700 ग्लव्स के पैसे लिए
जयंत ने कहा कि उनके बिल में 2700 ग्ल्व्स के करीब पैौने तीन लाख रुपये लिए गए। इसके अलावा 660 सिरिंज भी बिल में दिखाई गईं। दवाओं का बिल ही करीब चार लाख रुपये था। 13 रुपये की ब्लड टेस्ट स्ट्रिप के 200 रुपये वसूले गए
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adya - फोटो : twitter
अस्पताल ने कहा आरोप गलत, बच्ची के अभिभावकों को सब पता था
फोर्टिंस अस्पताल के प्रबंधन का कहना है कि परिजन गलत आरोप लगा रहे हैं बच्ची को बेहद गंभीर हालत में लाया गया था। डाक्टरों की सलाह पर ही बच्ची को वेंटिलेटर पर रखा गया था। डाक्टरों की एक पूरी टीम आद्या की हालत पर नजर रखे हुए थी। 
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