दिल्ली में करीब 60 वर्ष पहले श्रावण मास में यमुना नदी मां शीतला देवी को स्पर्श करके लौटती थी। आज यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है। पूर्वी दिल्ली के शकरपुर इलाके में स्थित प्राचीन मां शीतला देवी मंदिर में हर दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। आगे जानिए इस मंदिर का महत्व और क्यों कांवड़िए यहां चढ़ाते हैं जल...
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- फोटो : अमर उजाला
हरिद्वार सहित तमाम गंगा घाट से जल लाने वाले कांवड़िए भी माता के मंदिर में आकर अपनी यात्रा को पूरा करते हैं और गंगाजल के साथ भगवान भोले का अभिषेक करते हैं। मंदिर के महंत पंडित निरंजन शर्मा बताते हैं कि मंदिर को लेकर आसपास ही नहीं, बल्कि पूर्वी दिल्ली के कोने-कोने तक भक्तों में श्रद्धाभाव है।
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उन्होंने बताया कि कई वर्ष पहले जब पूर्वी दिल्ली यमुनापार होने के कारण दिल्ली से अलग था, उस वक्त भी माता शीतला का मंदिर था और सावन-भादो में यमुना मंदिर को स्पर्श करती थी।
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कांवड़िया
- फोटो : अमर उजाला
श्रावण मास के अलावा नवदुर्गा, प्रदोष व्रत, संतोषी माता आदि का पूजन करने भी हजारों की तादाद में महिलाएं मंदिर पहुंचती हैं। इतना ही नहीं, मंदिर से कई संस्थाएं जुड़ी हैं, जो समय-समय पर धार्मिक आयोजन कराती हैं।
मंदिर में माता शीतला के अलावा भगवान भोले, राधाकृष्ण, प्रभु हनुमान की मूर्तियां भी स्थापित हैं। मान्यता है कि माता की शरण में सच्चे मन से आने वाले श्रद्धालु की पुकार जरूर सुनी जाती है।