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कौन थे सज्जन कुमार?: 1984 सिख विरोधी दंगे से जुड़े मामले में मिली थी उम्रकैद; अर्श से फर्श तक पहुंचने की कहानी

Thu, 20 Aug 2026 02:11 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस नेता सज्जन कुमार का जेल में गुरुवार को निधन हो गया। सज्जन कुमार की मौत किस कारण हुई, इसका खुलासा नहीं हो सका है। एक समय सज्जन कुमार की दिल्ली में तूती बोलती थी। सज्जन कुमार संजय गांधी के नवरत्नों में गिने जाते थे। दिल्ली दंगों में नाम आने के बाद प्रतिष्ठा दांव पर लग गई थी। आइए जानते हैं पूरी कहानी
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Sajjan Kumar Death - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पूर्व सांसद और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार का निधन हो गया है। उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। फिलहाल, सज्जन कुमार के निधन के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। 

सज्जन कुमार एक अनुभवी राजनेता थे और उन्होंने लोकसभा में सांसद के रूप में कार्य किया। वे 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में दोषी पाए गए थे। हालांकि, हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो मामलों में उन्हें बरी कर दिया था। 

सूत्रों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही उनका निधन हो गया, लेकिन इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सज्जन कुमार के निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। उनके निधन के कारणों का पता चलने के बाद ही आगे की जानकारी सामने आ पाएगी।
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Sajjan Kumar - फोटो : ANI
पढ़ें अर्श से फर्श तक पहुंचने की कहानी
नवंबर 1984 के दंगों के एक और मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा मिली थी। दिल्ली की राजनीति में एक समय सज्जन कुमार की तूती बोलती थी और वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी के नवरत्नों में गिने जाते थे। दिल्ली दंगों में नाम आने के बाद से ही उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लग गई और कई बार लोकसभा टिकट पर उनका नाम कटा और सजा के बाद वे राजनीति के अर्श से फर्श पर आ गए। 
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सज्जन कुमार की फाइल फोटो - फोटो : ani
डेयरी का काम किया, पहले पार्षद बने फिर लोकसभा पहुंचे
सज्जन कुमार अपने आरंभिक दिनों में डेयरी का काम करते थे। उन पर किस्मत ऐसी मेहरबान हुई कि वे पहले पार्षद व फिर लोकसभा तक पंहुचने में कामयाब रहे। सजंय गांधी की नजदीकी के चलते उनकी गिनती कांग्रेस के दिग्गजों में होने लगी।

 

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सज्जन कुमार की फाइल फोटो - फोटो : पीटीआई
पार्षद बनने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा
सज्जन कुमार शुरू से ही दबंग रहे हैं और इसी के चलते उनकी मुलाकात कांग्रेस नेता हीरा सिंह से हुई। उन्होंने ही दिल्ली के वेताज बादशाह कहे जाने वाले एचकेएल भगत के जरिए सज्जन को निगम पार्षद का टिकट दिलाया और सज्जन जीत भी गए। इसके बाद सज्जन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसी दौरान संजय गांधी की नजर उन पर पड़ी।

 
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सज्जन कुमार की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री को दी मात
वर्ष 1977 में कांग्रेस की हालत खराब थी और कांग्रेस ने सज्जन कुमार को बाहरी दिल्ली से प्रत्याशी बना दिया। सज्जन ने अपने प्रतिद्वंदी और दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री रहे ब्रह्म प्रकाश को हरा दिया। इसी के साथ सज्जन कुमार की राजनीति में अहमियत बढ़ गई। इसके बाद दिल्ली दंगों के चलते कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया। हालांकि वर्ष 1991 के चुनावों में वे टिकट पाने में कामयाब रहे और जीत भी गए। उन्होंने भाजपा नेता साहिब सिंह वर्मा को हराया।

 
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सज्जन कुमार की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
2009 में इस वजह से कटा टिकट
इसी प्रकार कांग्रेस ने उन्हें 2004 में टिकट दिया और वे जीतने में कामयाब रहे। वर्ष 2009 के चुनावों में उन्हें टिकट दिया गया लेकिन एक सिख पत्रकार द्वारा कांग्रेस के तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर जूता फेंकने के बाद उनका टिकट काट दिया गया लेकिन सज्जन ने अपने भाई रमेश कुमार को टिकट दिलवा दिया और उसे जितवा भी दिया। इसके बाद रमेश कुमार 2014 के चुनावों में हार गए और सज्जन कुमार भी राजनीति से दूर चलते गए। दंगों के मामले में सजा के बाद से उनकी राजनीति धरातल पर चलती गई और अब वे दो मामलों में सजा काट रहे है।
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सज्जन कुमार की फाइल फोटो - फोटो : पीटीआई
किस मामले में सज्जन कुमार को उम्रकैद?
सज्जन कुमार को अब 1984 सिख दंगे से जुड़े एक और मामले में दोषी पाए जाने के बाद उम्रकैद की सजा दी गई है। यह मामला 1 नवंबर 1984 को दिल्ली के सरस्वती विहार में भीड़ को भड़काने से जुड़ा है, जिसमें जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या हुई थी। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कहा था कि सज्जन कुमार ने भीड़ को उकसा कर बड़े स्तर पर सिखों के घरों-दुकानों पर लूट और आगजनी कराई। इसी दौरान एक घर में लूट और आग लगाने से पहले भीड़ ने दो सिखों की जिंदा जलाकर हत्या कर दी थी।
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सज्जन कुमार की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
घटनाक्रम:
  • 31 अक्तूबर 1984: तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या।
  • 1-2 नवंबर  1984: इसके बाद भड़के दंगों में राजनगर इलाके में भीड़ ने पांच सिखों की हत्या कर दी।
  • मई 2000: दंगों की जांच के लिये जीटी नानावती कमीशन का गठन।
  • दिसंबर 2002: सेशन कोर्ट ने सज्जन कुमार को एक मामले में बरी कर दिया था।-24 अक्तूबर 2005: जीटी नानावती कमीशन की सिफारिश पर सीबीआई ने दूसरा मामला दर्ज किया।
  • 1 फरवरी 2010: ट्रायल कोर्ट ने सज्जन कुमार को समन किया।      
  • 24 मई: ट्रायल कोर्ट ने चार्ज फ्रेम किया।      
  • अप्रैल 2013: अदालत ने सज्जन कुमार को इस मामले में बरी किया।      
  • 19 जुलाई 2013: सीबीआई ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की।      
  • 22 जुलाई 2013: हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को नोटिस जारी किया।      
  • 29 अक्तूबर 2018: हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया।      
  •  17 दिसंबर 2018: हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुये आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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