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दंगाईयों ने चुन-चुन कर फूंके मकान, तस्वीरों में बर्बाद झज्जर

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बीते दिनों यहां जो कुछ हुआ कोई उसे आंदोलन नहीं कह सकता। आंदोलन ऐसा नहीं होता। कुछ मांगने वाले घर नहीं जलाते, दुकानें नहीं फूंकते और लूटपाट नहीं करते। यहां की छावनी कॉलोनी का एक चक्कर लगाने के बाद कोई भी बिना किसी से कुछ पूछे कह सकता है कि यहां जो हुआ वो दंगा था आंदोलन नहीं। (सभी फोटो: भव्य नरेश/अमर उजाला, झज्जर)
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दंगाईयों ने चुन-चुन कर फूंके मकान, तस्वीरों में बर्बाद झज्जर

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21 फरवरी की काली दोपहर
छावनी कॉलोनी...वो जला हुआ ट्रैक्टर
पूर्व पटवारी उदयपाल कहते हैं हमें जैसे ही पता चला भीड़ हमला करने वाली है, हमने रास्ते में ट्रैक्टर ट्राली खड़ी कर दी, पर तीन हजार की भीड़ के आगे हमारी क्या चलती, उन्होंने एक एक घर और दुकान को चुन चुनकर फूंक डाला, हां जाटों की दुकानें नहीं छेड़ी।
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80 साल के वृद्ध श्रीचंद सैनी कहते हैं, मैं चल फिर नहीं सकता। दंगाइयों ने पूछा तुम सैनी हो? मैं चुप रहा। उनमें से एक ने कहा, छोड़ इसे बुड्ढा है। बस जान बच गई, पर ऐसी बरबादी नहीं देखी।

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चिमन लाल खौफजदा हैं, चेहरा भावहीन सा हो गया है, कहते हैं, 100 नंबर, फायर ब्रिगेड सबको फोन लगाया पर कहीं से कोई मदद नहीं मिली। नहीं लगता आगे भी कुछ होगा।
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अमित सैनी का घर और दफ्तर जल चुका है। कहते हैं मैं खाना खा रहा था, तभी लोगों ने दरवाजे तोड़ने शुरू कर दिए। छत पर भागकर गया, पत्नी और बच्चों को छत पर भेजा।
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दंगाई आग लगाकर भाग गए। इस बीच पत्नी और बच्चों को बाहर निकाला। दंगाई फिर आ गए और पूरे घर को जला दिया, मैं छत पर छिपा रहा। अब सबसे विश्वास उठ गया। हम सैनी हैं इसलिए हमें निशाना बनाया।
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छावनी कॉलोनी के इस घर के बाहर ताला है। अंदर बरबादी के निशान हैं। यह राम मेहर का घर है। दंगाइयों ने लड़की की शादी के लिए रखे जेवर लूट लिए। और आग लगा दी, सिर्फ सामान में नहीं सपनों में भी।

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दंगाइयों के हाथ में मोलोटोव काकटेल (पेट्रोल बम) थे, जो उन्होंने घरों में खिड़कियों के अंदर डाल दिए। इससे बड़ा नुकसान हुआ और कमरों के पंखे तक जल गए।

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बस स्टैंड के आसपास का इलाका भयानक लगता है। कतार से जली दुकानें। चावला इलेक्ट्रॉनिक्स के मालिक कहते हैं, हमें जानबूझकर टारगेट किया। सीएम अगर पंजाबी हैं और जाटों को आरक्षण चाहिए तो हमारा क्या दोष।

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जाट समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि सर छोटूराम की प्रतिमा को क्षति पहुंचाकर उन्हें उकसाया गया। स्टेडियम जा रही भीड़ के साथ चल रहे असामाजिक तत्वों ने फौजी टुकड़ी पर पत्थर फेंक दिया जिसका नतीजा फायरिंग में हुआ और तीन जाट युवकों की मौत हो गई।

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खंड विकास कार्यालय की अलमारियों में अभी भी आग लगी है। पीडब्लूडी के गेस्ट हाउस को पूरी तरह तहसनहस कर दिया गया है।  सिंचाई भवन का भी ऐसा ही हाल है। बस उम्मीद उन बच्चों की मुस्कान से है जो बाहर मलबा ढोने आए ट्रैक्टर के पास खेल रहे हैं।

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रेडक्रॉस की गुलाबी इमारत काले धुएं में लिपटी है। सचिव महेश गुप्ता कहते हैं हमारी दो नई बसें और कई गाड़ियां जल गईं हम अब किसी की मदद भी नहीं कर सकते।

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झज्जर से विधायक और पूर्व मंत्री गीता भुक्कल की मेन रोड पर स्थित कोठी पूरी तरह जला दी गई।

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गीता कहती हैं हैरानी की बात है 20 फरवरी को यह घटना हुई और उस दिन शहर में कर्फ्यू था।

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हमारा स्टाफ पुलिस को फोन करता रहा कुछ नहीं हुआ। कोठी को जलाया और बाहर खड़ी गाड़ियों में भी आग लगा दी।
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झज्जर के पास बेरी में जब दंगाइयों ने आगजनी और तोड़फोड़ की कोशिश की तो ग्रामीणों ने उन्हें समझाया। इसका असर हुआ कि दंगाई वापस लौट गए।

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