बयानों की इस फेहरिस्त में पहला नाम मनजिंदर सिंह सिरसा का है। शिरोमणि अकाली दल से चुनाव लड़े सिरसा यूं तो सबसे ज्यादा पैसे वाले उम्मीदवार के तौर पर सामने आए अब वह अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। सिरसा कहते फिर रहे हैं कि साध्वी के बयान की वजह से वो चुनाव हार गए। आपको बता दें कि सिरसा उस वक्त साध्वी निरंजना ज्योति के साथ खड़े होकर तालियां बजा रहे थे जब उन्होंने दिल्ली चुनाव की घोषणा से पहले सबसे ज्यादा विवादित बयान दिया था। दिल्ली चुनाव में तस्वीरों के इस सच की कहानी यहीं खत्म नहीं होती है।
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तस्वीर में सामने आई साध्वी संग खड़े नेता की सच्चाई
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दूसरी तस्वीर में हैं किरण बेदी। किरण बेदी जहां चुनाव के बाद तक अपनी जीत का दंभ भर रही थीं वहीं उन्होंने अब ये कहकर सबको चौंका दिया कि वो शाही इमाम अहमद बुखारी के फतवे की वजह से चुनाव हार गईं। इन्होंने ये भी कहा कि वो कृष्णा नगर सीट से चुनावी बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन बुखारी ने सब चौपट कर दिया। अब चुनाव आयोग को इसकी जांच करनी चाहिए।
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तीसरी तस्वीर में दिख रही हैं दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित। ये अब कांग्रेस के नेता और दिल्ली में चुनाव समिति के अध्यक्ष से नाराज है। इनका कहना है कि दिल्ली में हमें पता था, कि हमारी बुरी हार होगी, लेकिन इतनी बुरी हार के लिए माकन की रणनीति जिम्मेदार है। इस रणनीति की वजह से कांग्रेस को इस चुनाव में शून्य का मुंह देखना पड़ा है।
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चौथी तस्वीर है सतीश उपाध्याय की। सतीश उपाध्याय दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष हैं। उपाध्याय कहते हैं कि भाजपा को साक्षी महाराज के बयान भारी पड़ गए, और इनके बयानों ने दिल्ली में बीजेपी की चुनावी स्थिति खराब कर दी। भले ही साक्षी महाराज अपने बयानों पर खेद प्रकट कर चुके हों, लेकिन विलेन का ताज तो उन्हें पहनना ही पड़ेगा।
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पांचवी तस्वीर है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की। संघ ने साफ कर दिया है कि दिल्ली में भाजपा की करारी हार के लिए केन्द्रीय नेतृत्व के फैसले जिम्मेदार हैं। इन फैसलों की वजह से ही दिल्ली में बीजेपी की हार हुई है। चाहें वो फैसला पैराशूट से नेताओं के लाने का क्यों ना रहा हो। अब इन्हें कौन समझाए कि इस तरह के बयानों से कोई फायदा होने वाला नहीं है, क्योंकि जनता सब जानती है।