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क्या है दिल्ली के उस रोजगार मेले की हकीकत, जहां नौकरी की आस में देशभर से उमड़े हजारों युवा

Tue, 22 Jan 2019 02:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी बीबीसी, नई दिल्ली
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delhi job mela - फोटो : pti
21 जनवरी, दिन सोमवार, सुबह के दस बजे थे। दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम के बाहर भीड़ धीरे-धीरे बढ़ने लगी। गेट नंबर सात के सामने हजारों युवा हाथों में सर्टिफिकेट और मार्कशीट लिए पंक्तिबद्ध खड़े थे। उनकी यह कतार बढ़ते-बढ़ते करीब आधा किलोमीटर लंबी हो चुकी है। त्यागराज स्टेडियम एक ऐसे कैनवास में बदल चुका था जिस पर देश में फैली 'बेरोजगारी की तस्वीर' साफ देखी जा सकती है। यहां दो दिवसीय 'विशाल रोजगार मेला' चल रहा है जिसमें भाग लेने दिल्ली और आसपास के हजारों बेरोजगार युवा पहुंचे हैं।
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delhi job mela - फोटो : pti
स्टेडियम के बाहर दिल्ली पुलिस के जवान तैनात हैं जो हर आने वाले की तलाशी लेने के बाद उन्हें अंदर भेज रहे हैं। अंदर पहुंचते ही एक बड़ा-सा फ्लेक्स लगा है जिसके इर्द-गिर्द लोग भीड़ लगाए खड़े हैं। यह फ्लेक्स लोगों को निर्देशित कर रहा है कि उनकी योग्यता के अनुसार उन्हें नौकरी पाने के लिए किस दिशा में बढ़ना है। इस फ्लेक्स से मार्गदर्शन लेकर लोग अलग-अलग स्टॉल की ओर बढ़ रहे हैं। अलग-अलग कंपनियों के करीब 75 स्टॉल यहां लगे हैं। दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय के अनुसार इस रोजगार मेले में पहुंची ये 75 कंपनियां कुल 12,700 से अधिक नौकरियाँ देने जा रही हैं। दिल्ली की अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगे मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 28 जनवरी को पेश किए जाने को लेकर वारंट जारी किया। नौकरी देने वाली इन कंपनियों में पतंजलि, ओला, इंडिया बुल्ज, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और एलआईसी जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित यह रोजगार मेला पिछले कुछ सालों से हर साल आयोजित किया जा रहा है।
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delhi job mela - फोटो : pti
दिल्ली सरकार के रोज़गार निदेशालय के अनुसार पिछले साल इस मेले में क़रीब 40 हजार लोगों ने भाग लिया था। इनमें से क़रीब सात हजार लोग शॉर्ट लिस्ट हुए थे जिन्हें चयन प्रक्रिया के दूसरे दौर में शामिल होने का मौका मिला। इसी तरह साल 2017 में 40 हज़ार लोगों ने इस मेले में शिरकत की जिनमें से 12 हजार शॉर्ट लिस्ट हुए थे और साल 2015 में कुल 12 हजार प्रतिभागियों में से करीब 7700 शॉर्ट लिस्ट हुए थे।

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delhi job mela - फोटो : pti
दिल्ली के रोजगार निदेशालय में बतौर अनुभाग अधिकारी कार्यरत राजेश तंवर बताते हैं, "हमारे पास शॉर्ट लिस्ट किए गए लोगों का ही आंकड़ा मौजूद है। अंततः कितने लोगों को नौकरी मिली यह आंकड़ा हमारे पास नहीं होता क्योंकि फाइनल सलेक्शन यहां नहीं होता। यहां से कंपनियां लोगों को शॉर्ट लिस्ट करती हैं और फिर चयन का अगला राउंड कंपनी में ही होता है। इसलिए हमारे पास सिर्फ़ शॉर्ट लिस्ट किए गए लोगों की ही संख्या होती है।" राजेश तंवर यह भी कहते हैं, "शॉर्ट लिस्ट किए गए अधिकतर लोगों को नौकरी मिल ही जाती है।"
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delhi job mela - फोटो : pti
लेकिन रोहिणी की रहने वाली 25 वर्षीय शीतल इस बात से इत्तेफाक नहीं रखती। शीतल पिछले साल भी इस मेले में पहुंची थी और उनको एक कंपनी ने कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद के लिए शॉर्ट लिस्ट भी कर लिया था। लेकिन शीतल कहती हैं, "कंपनियां यहां जो दावे करती हैं और जितना पैसा देने की बात कहती हैं, असल में उतना नहीं देती। पिछले साल जब यहां से शॉर्ट लिस्ट होने के बाद मैं दूसरे राउंड के लिए कंपनी के ऑफिस पहुंची तो मुझे बताया गया कि मुझे रोज 12 घंटे की शिफ्ट करनी होगी वरना उतने पैसे नहीं मिलेंगे जितने शुरुआत में बताए गए थे।"
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delhi job mela - फोटो : pti
अनुभव और योग्यताओं के अनुरूप रोजगार नहीं
इस रोजगार मेले में पहुंचे अधिकतर लोगों को यही शिकायत है कि उन्हें उनकी योग्यताओं और अनुभव के अनुरूप रोजगार नहीं मिल रहा। महारानी बाग में रहने वाले 23 साल के रौनक सोलंकी कहते हैं, "मैंने बीटेक किया है और मुझे एक साल का अनुभव भी है। लेकिन यहां मुझे 22 हजार रुपए महीने की नौकरी मिल रही है। इससे ज्यादा तो एक बीटेक ग्रेजुएट को कॉलेज से पास होते ही मिल जाते हैं।'' रौनक आगे कहते हैं, ''मैं यहां इसलिए आया था ताकि मुझे कुछ बेहतर विकल्प मिल सकें। लेकिन यह मेला हमारे लिए नहीं, कंपनियों के लिए है। ताकि उन्हें सस्ते में काम करने वाले कर्मचारी मिल सकें।"
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delhi job mela - फोटो : अमर उजाला
34 वर्षीय पुष्पा कुमारी का भी इस मेले में अनुभव लगभग रौनक जैसा ही रहा। महिपालपुर की रहने वाली पुष्पा एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी करती हैं और उन्हें करीब सात साल का अनुभव है। वह कहती हैं, "मैं दो जगह इंटरव्यू के लिए गई और दोनों जगह मुझे ऐसा लगा जैसे यहां सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। ये लोग ऐसे लोगों की तलाश में हैं जो कम-से-कम पैसे में काम करने को तैयार हो जाएं। इस तरह के मेलों में अधिकतर वह लोग आते हैं जिन्हें नौकरी की सख्त जरूरत होती है। कंपनियां इसी का फायदा उठाती हैं। उन्हें यहां ढेरों ऐसे लोग मिल जाते हैं जो सस्ते में काम करने को तैयार हैं। सरकार को भी कहने को हो जाता है कि हमने जो रोजगार मेला आयोजित किया उसमें हजारों लोगों को रोजगार मिल गया।"

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रौनक और पुष्पा के अनुभव किस हद तक सही हैं, इसकी पुष्टि यहां पहुंची कंपनियां खुद भी कर देती हैं। 'सिल्वर लीफ' नाम की एक कंपनी के लिए लोगों को भर्ती करने इस मेले में पहुंचे धीरज कुमार बताते हैं, "इस तरह के मेलों में लोगों को भर्ती करना काफी आसान हो जाता है. वरना तो सेल्स और मार्केटिंग के लिए आजकल लोग ढूंढना बहुत मुश्किल हो गया है।" धीरज को अपनी कंपनी के लिए करीब सौ लोगों की तलाश है जो दसवीं या 12वीं पास हों और मार्केटिंग का काम कर सकें। ऐसे लोगों को कंपनी कितनी पगार देती है, यह सवाल पूछने पर धीरज बताते हैं, "सभी को 14 हजार से तो ऊपर ही दिया जाता है।"

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बताते चलें कि 14 हजार रुपए दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी है और इससे कम पगार देना एक दंडनीय अपराध है। जहां एक ओर इस मेले में हजारों लोग अलग-अलग स्टॉल्स पर नौकरी पाने के लिए भटक रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ कंपनियां भी ऐसी हैं जो खुद ही जा-जाकर लोगों को नौकरी देने के लिए तलाश रही हैं।

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नोएडा के रहने वाले अजय जयसवाल के पास ऐसी ही एक कंपनी से 'ऑफर' आया है। इस कंपनी के नुमाइंदों ने अजय को बताया है कि उन्हें 21 हजार प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा जिसके बदले में अजय को रिकवरी यानी वसूली का काम करना होगा। कंपनी के अनुसार अजय को हर महीने लोगों से बकाया वसूलने का एक टार्गेट दिया जाएगा जिसमें से कम-से-कम उन्हें 98 प्रतिशत पूरा करना ही होगा। अजय कहते हैं, "पता नहीं इस कंपनी को कर्मचारियों की तलाश है या गुंडों/दबंगों की। मुझे ऐसी नौकरी नहीं करनी। जान है तो जहान है। यहां पहुंचा कोई भी आदमी ऐसी नौकरी नहीं करना चाहेगा, तभी शायद कंपनी वाले खुद ही जा-जाकर लोगों को नौकरी के लिए खोज रहे हैं।"

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delhi job mela - फोटो : pti
दोपहर के दो बजे तक यहां पहुंचे कई लोग वापस लौटने लगे हैं। इनमें अधिकतर मायूस होकर ही लौट रहे हैं। तिलक नगर से यहां आए हरी ओम और सुमित कुमार भी इन्हें लोगों में से हैं। सुमित कहते हैं, "हमने अखबार में इस मेले के बारे में पढ़ा था। हमें लगा यहां कई कंपनियां होंगी तो कोई अच्छी नौकरी मिल जाएगी। लेकिन जो कंपनी नौकरी दे रही हैं वो बहुत कम पैसे दे रही हैं। मैंने तीन साल विशाल मेगा मार्ट में अकाउंट्स का काम किया है। यहां कोई भी कंपनी मुझे अकाउंट्स डिपार्टमेंट में नौकरी के लिए उतना पैसा भी नहीं दे रही जितना मुझे अपनी पिछली नौकरी में मिलने लगा था।"

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delhi job mela - फोटो : अमर उजाला
मेले में पहुंचे कई लोग शॉर्ट लिस्ट होने पर ख़ुश भी हैं लेकिन यहां आए अधिकतर लोग सुमित की तरह ही निराश होकर लौट रहे हैं. लेकिन रोज़गार निदेशालय के लिए यह आयोजन सफल रहा है क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि इस बार पिछले साल से भी ज्यादा लोगों ने इसमें भाग लिया है।

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निदेशालय के अनुभाग अधिकारी राजेश तंवर कहते हैं, "सुबह से शाम तक करीब 25 हजार से ज्यादा लोग यहां पहुंचे हैं। उम्मीद है मेले के दूसरे दिन भी काफी लोग आएंगे। रोजगार देने वाली कंपनियों ने भी इस बार खूब पहुंची हैं। बल्कि कई कंपनियां तो ऐसी भी थी जिन्होंने बिल्कुल लास्ट में पंजीकरण किया तो उनके लिए स्टॉल की भी व्यवस्था नहीं हो सकी। लेकिन फिर भी आयोजन का पहला दिन काफ़ी अच्छा रहा।" 
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delhi job mela - फोटो : अमर उजाला
शाम के चार बजे तक 'रोजगार मेले' की भीड़ लगभग पूरी तरह छंट चुकी है। हल्की बारिश भी शुरू हो गई है और यहां मौजूद ज्यादातर युवा अपने सर्टिफिकेट, मार्कशीट और अन्य दस्तावेजों को किसी तरह भीगने से बचाने के लिए जूझ कर रहे हैं। त्यागराज स्टेडियम के कैन्वस पर बेरोजगारी की जो तस्वीर आज बनी थी, वह इस बारिश में भीगकर अब और भी बुरी दिखने लगी है।
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