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अब तो आस टूटने लगी है भैया... बोलते ही छलके छह दिन से भूख हड़ताल पर बैठे दिव्यांग कैंडिडेट के आंसू

Mon, 02 Dec 2019 02:23 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : विवेक निगम/जी पाल
‘अब तो आस टूटने लगी है भैया। पता नहीं कोई हमारी सुध लेगा भी या नहीं? जैसे ही दिन छिपता है ठंड बढ़ जाती है। रात का एक-एक मिनट काटना भारी होता है। सुबह जब हम उठते हैं तो ओस से हमारे कंबल पूरी तरह गीले होते हैं...।’ यह बताते-बताते एक दिव्यांग युवक की आंखों से आंसू छलकने लगे। आगे तस्वीरों में देखिए इनका प्रदर्शन और पढ़ें पूरी स्टोरी...
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6 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे-बैठे मायूस हुए ग्रुप डी के दिव्यांग कैंडिडेट - फोटो : विवेक निगम
उसने बताया कि रोजाना कोई न कोई साथी बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहा है, लेकिन कोई उनका हाल तक लेने नहीं आया है। मंडी हाउस पर छह दिनों से धरने और भूख हड़ताल पर बैठे दिव्यांग अब निराश होने लगे हैं। रविवार को बातचीत के दौरान कई दिव्यांग अपने आंसुओं के सैलाब को रोक नहीं पाए।
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6 दिन से प्रदर्शन कर मायूस हुए ग्रुप डी के दिव्यांग कैंडिडेट - फोटो : विवेक निगम
अपनी नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर मंडी हाउस में अनशन पर बैठे दिव्यांगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। रविवार को छठे दिन दिव्यांगों के एक सहयोगी मंगल की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया।

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ठिठुर कर भी कर रहे प्रदर्शन - फोटो : विवेक निगम
समूह में शामिल मनीष ने बताया कि मंगल को राममनोहर लोहिया अस्पताल लेकर गए। आरोप है कि दो घंटे तक अस्पताल में इलाज नहीं होने पर मंगल को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे ड्रिप लगा दिया गया।
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तबीयत खराब होने के चलते बीमार हुआ अभ्यर्थी, पुलिस बैरिकेड में टंगी ड्रिप - फोटो : विवेक निगम
इलाज होने के बाद वह ड्रिप लगाकर वापस धरनास्थल पर पहुंच गया। हालात ऐसे हैं कि ड्रिप भी पुलिस के बैरिकेड पर टांगी गई है।

क्या है मामला

राष्ट्रीय विकलांग संघर्ष समिति के नवीन ने बताया कि इससे पहले भी कई बार विरोध कर चुके हैं लेकिन दिव्यांगों की मांगों पर सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है। दो अधिसूचना के तहत 3148 ग्रुप डी के पदों के लिए आवेदन मंगवाए गए थे लेकिन परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद भी नौकरियां देने में आनाकानी की जा रही है। नवीन ने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी करते हुए 1025 पदों पर चहेते उम्मीदवारों की नियुक्ति कर दी गई। दो अलग अलग अधिसूचना जारी करते हुए दिव्यांगों की श्रेणी में भी बढ़ोतरी कर कुछ पदों पर नियुक्तियां हुई जबकि शेष उम्मीदवारों की मांगों पर कोई सुनवाई नहीं की गई है।
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रोते दिव्यांग कैंडिडेट - फोटो : विवेक निगम
दिव्यांगों का कहना है कि उनके लिए रात गुजारना काफी कठिन हो रहा है। खुले आसमान के नीचे सोने की वजह से उनके कंबल पूरी तरह  गीले हो जाते हैं, लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ है और वह इसी तरह अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे।
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- फोटो : जी पाल
शनिवार को भी बिगड़ी थी तबीयत
अपनी मांग को लेकर देशभर से आए दिव्यांग कई दिन से मंडी हाउस में धरने पर बैठे हुए हैं, जिसमें से 13 दिव्यांग भूख हड़ताल कर रहे हैं। शनिवार को उनके धरने का पांचवां दिन था। भूख हड़ताल कर रही दो लड़कियों की शनिवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई।

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- फोटो : जी पाल
उन्हें तत्काल इलाज के लिए राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। समूह का नेतृत्व कर रहे नन्हे लाल ने बताया कि धरने के बावजूद उनकी बातों को नहीं सुना जा रहा है।

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प्रदर्शन करते अभ्यर्थी - फोटो : जी पाल
सरकार की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है। शनिवार दोपहर करीब चार बजे भूख हड़ताल पर बैठे एक युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। पुलिस अपनी गाड़ी में युवक को लेकर अस्पताल पहुंची।

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सड़कों पर सोने को मजबूर अभ्यर्थी - फोटो : जी पाल
इसी बीच भूख हड़ताल कर रहे दो अन्य युवक भी बेहोश हो गए। धरनास्थल पर मेडिकल सुविधा व एंबुलेंस नहीं होने से आक्रोशित दिव्यांग सिकंदरा रोड पर आकर प्रदर्शन करने लगे।

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ग्रुप डी कैंडिडेट्स के प्ररदर्शन के चलते लगा जाम - फोटो : जी पाल
उस समय सिकंदरा रोड वाहनों की आवाजाही के लिए खुला हुआ था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान रोड को बंद कर दिया गया, जिसकी वजह से बाराखंभा से आईटीओ जाने वाले वाहनों का लंबा जाम लग गया।
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- फोटो : जी पाल

14 दिनों का आश्वासन, एक महीने बाद भी नहीं हुई पहल 

दिव्यांगों के समूह का नेतृत्व कर रहे नन्हे राम ने कहा कि इस मामले में 24 अक्तूबर को निशक्तता आयुक्त के यहां सुनवाई हुई। रेलवे की तरफ से किसी के न पहुंचने की वजह से 14 दिनों में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया गया था। उम्मीदवारों में इस बात पर रोष है कि एक महीने बाद भी सैकड़ों उम्मीदवारों को नौकरी मिलने का इंतजार है। न तो उम्मीदवारों के दस्तावेज जांचे गए और न ही नियुक्ति प्रक्रिया की दिशा में कोई पहल की गई। 
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