सपनों में पिता को देखने वाला ललित पोजेशन सिंड्रोम नामक दिमागी बीमारी का शिकार हो सकता है। ऐसी आशंका राजधानी के मनोचिकित्सक और न्यूरो विशेषज्ञों ने जताई है। इनका कहना है कि जिस तरह से कहा जा रहा है कि ललित को अक्सर अपने पिता की आत्मा दिखती थी और वह बातें करता था।
विज्ञापन
2 of 6
burari case
- फोटो : अमर उजाला
इसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि ललित को कनवर्शन डिसऑर्डर या पोजेशन सिंड्रोम हो सकता है। यह सिंड्रोम अक्सर उन्हीं लोगों को होता है जो अत्यधिक धार्मिक प्रवृति के होते हैं। इसमें वह अपने सोचने-समझने की क्षमता को पूरी तरह खो देते हैं।
विज्ञापन
3 of 6
क्राइम ब्रांच की टीम जांच के लिए पहुंची
- फोटो : अमर उजाला
सोसायटी फॉर क्लीनिकल रिसर्च ऑफ इंडिया के संयोजक डॉ. विकास ढ़िकव का कहना है कि दिमाग में मौजूद हिपोकैंपस के सिकुडने से इंसान अनकही और अनसुलझी बातों पर विश्वास करने लगता है। वह किसी भी चीज का फैसला लेने की क्षमता खोने लगता है।
4 of 6
burari death case
- फोटो : जी पाल
दिमाग में रिसाव होने वाले सिरोटोनीन और डोपामीन हार्मोन की कमी होती है, तब भी इंसान ऐसा करता है और जीवन के प्रति लगाव को छोड़ देता है। डॉ. ढ़िकव के अनुसार, रजिस्टर और पुलिस की थ्योरी से यही पता चलता है कि ललित को इलाज की सख्त जरूरत थी।
विज्ञापन
5 of 6
burari death case
- फोटो : जी पाल
बॉक्स : ब्लू व्हेल गेम जैसा ही दिखता है भ्रम
दिल्ली सरकार के मनोचिकित्सालय इहबास के वरिष्ठ डॉक्टर हिमांशु सिंह की मानें तो ब्लू व्हेल गेम की भांति ही भाटिया परिवार का मामला भ्रम से जुड़ा दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि भ्रम एक तरह की बीमारी होती है जोकि इंसान को किसी भी तरह के कार्यकलाप करा सकती है।
सामान्यत: यह एक मानसिक रोग है। इस बीमारी की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इंसान किसी भी तरह की बात में विश्वास कर लेता है, जिसका कोई आधार नहीं। हालांकि डॉ. हिमांशु ने ये भी कहा है कि इससे पहले कभी भी भ्रम की वजह से इतने लोगों के आत्महत्या करने की घटना उन्होंने नहीं देखी।