भोंडसी स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल में हुए प्रद्युम्न हत्याकांड मामले की सुनवाई करते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने व्यस्क की तरह मामला चलाने की अनुमति दी है। अब इस फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है।
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- फोटो : सुदर्शन झा
प्रद्युम्न के वकील भी वहां इससे निपटने की तैयारी में जुट गए हैं। अधिवक्ता संदीप अनेजा ने का कि बोर्ड ने यह गलत फैसला दिया है। छात्र की केवल दो टीचरों द्वारा ही छात्र के खिलाफ रिपोर्ट दी है जबकि पास-पड़ोस व छात्र के दोस्तों द्वारा उसकी रिपोर्ट सकारात्मक दी गई है।
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- फोटो : सुदर्शन झा
डॉक्टरों द्वारा उसकी मनोदशा को औसतन बताया गया है। यदि सीबीआई की थ्योरी मानें तो उसके अनुसार भी छात्र की मनोस्थिति औसतन ही है। ऐसे में उस पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाने का आदेश गलत है। बोर्ड के इस फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
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- फोटो : सुदर्शन झा
आरोपी छात्र के अधिवक्ता संदीप अनेजा ने बताया कि बोर्ड द्वारा छात्र की सोशल इनवेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार करवाई थी जिसमें सभी की रिपोर्ट सकारात्मक है जोकि छात्र के पक्ष में है। स्कूल की केवल दो ही शिक्षक ऐसी थी, जिन्होंने छात्र के खिलाफ बोला है।
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pradyuman murder case
डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि छात्र का आईक्यू लेवल औसतन है। ऐसे में वह इस तरह की योजना बनाने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि सीबीआई द्वारा बोर्ड के समक्ष यह थ्योरी बताई है कि छात्र पीटीएम व परीक्षा टालना चाहता था, ऐसे में उसने हत्या की योजना बनाई थी।
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यदि सीबीआई की थ्योरी पर बात की जाए तो भी छात्र की मनोदशा साफ हो रही है कि उसकी मनोदशा व्यस्कों की तरह नहीं है। इसलिए जुवेनाइल की तरह मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह बोर्ड के इस फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती देंगे।
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उधर, प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने कहा कि बोर्ड ने सभी रिपोर्ट को मद्देनजर रखते हुए ऐतिहासिक फैसला दिया है। आरोपी छात्र द्वारा बेहद ही संगीन अपराध को अंजाम दिया गया है। इस तरह के फैसलों से लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास बढ़ेगा।
उधर, अधिवक्ता सुशील टेकरीवाल ने कहा कि बोर्ड के इस फैसले के बाद आरोपी पर व्यस्कों की तरह ही ट्रायल चलेगा। यदि उस पर आरोप साबित हो जाता है तो उसे 8, 10, 12 या 14 साल की सजा हो सकती है। जुवेनाइल एक्ट की धारा 21 के तहत उसे फांसी की सजा नहीं हो सकती। 21 वर्ष की उम्र तक उसे बाल सुधार गृह में रखा जाएगा उसके बाद उसे जेल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।