आपको मोबाइल पर घंटों गेम खेलने की आदत है, तो यह आपके लिए गंभीर परेशानियों का कारण बन सकती है। मोबाइल पर खेले जाने वाले यह गेम कई शारीरिक और मानसिक विकारों का कारण भी बनते हैं।
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mobile addiction
पिछले दिनों कुछ मोबाइल गेम जैसे ब्लू व्हेल और पोकेमॉन गो आदि के एडिक्शन से जुड़े कई खतरनाक मामले देश - विदेश में चर्चा के विषय बने।
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टेलीकॉम कंपनियां नए-नए ऑफर पेश कर रही हैं।
कई किशोर व युवाओं ने ब्लू व्हेल के कारण जान - बूझकर अपनी जान को दांव पर लगा दिया। वहीं, पोकेमॉन गो खेलते-खेलते कई बार लोग अनजाने में हादसों की चपेट में आ गए। यही अन्य साधारणतया सेफ माने वाले मोबाइल गेम भी ज्यादा देर तक खेलते रहने से मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं।
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Mobile User
कल्पनाओं की दुनिया
कई खेल आपको एक काल्पनिक दुनिया का एहसास कराते हैं। जहां आप अपनी भावनाओं को इन खेलों द्वारा भी कई बार व्यक्त करते हैं। साथ ही कई बार यह आपके स्वभाव और आपके अंदर दबी भावनाओं के भी परिचायक होते हैं। जैसे कुछ लोग जो मानसिक रूप से बेहद उत्तेजक हैं, उन्हें मारपीट और तोड़फोड़ से जुड़े गेम बेहद पसंद आते हैं । कई बार गेम खेलने वाला शख्स कल्पनाओं की दुनिया में इतना खो जाता है कि वह धीरे - धीरे वास्तविक दुनिया से कटा-कटा रहने लगता है।
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डिप्रेशन
क्या हैं खतरे
1- कुछ गेम ऐसे टास्क देते हैं, जिनमें लोगों को कई तरह के जोखिम उठाने पड़ते हैं। ऐसे में उनके साथ कोई अप्रिय घटना घटने की संभावना बनी रहती है।
2- देर तक गेम खेलना आंखों और शरीर के अन्य अंगों पर हानिकारक प्रभाव डालता है।
3- कल्पनाओं की दुनिया में खोए रहने से लोगों का सामाजिक दायरा संकुचित होता जाता है।
3- देर तक गेम्स से जुड़े रहना डिप्रेशन का कारण भी बन सकता है।
4- ज्यादा देर तक गेम खेलना कई बार गेम एडिक्शन का कारण भी बन जाता है।
5- मोबाइल पर अनजाने सोर्सेज से गेम डाउनलोड करना आपके मोबाइल की प्राइवेसी के लिए भी खतरा बन सकता है।
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
मनोचिकित्सक डॉ. जीआर गुलेचा के अनुसार किसी भी चीज का एडिक्शन गलत है। मोबाइल गेम , सोशल साइट्स आदि का एक लिमिट से ज्यादा इस्तेमाल आपके अंदर मानसिक रोगों की संभावना को बढ़ा देता है। हमारे लिये थोड़ा सामाजिक होना बेहद जरूरी है। जिन लोगों का सोशल दायरा संकुचित होता है उनके डिप्रेशन में जाने की संभावना अधिक होती है। मनोचिकित्सक डॉ. संस्कृति ने बताया कि हम जब भी किसी चीज से ज्यादा देर तक जुड़े रहते हैं तो उसका असर हमारे मस्तिष्क पर जरूर पड़ता है। आप क्या देख रहें हैं, क्या कर रहें हैं इन बातों का असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।