शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि वास्तविक जीवन में भी कोई अपने घर से बात कर सकेगा। हॉलीवुड फिल्मों में इस प्रकार दृश्य दिखाई देता है। जब लोग आयरन मैन को अपने घर से बात करते हुए देखने हैं तो वह हैरत से भर जाते हैं। मगर अब यह सपना हकीकत में बदलने जा रहा है।
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PICS: अब हकीकत में आपसे बात करेगा आपका घर
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साइबर सिटी में दुनिया की पहली ऐसी रिहायशी परियोजना शुरू हो रही है जिसके अंतर्गत बनने वाले घर आपसे बात करने में सक्षम होंगे। इनमें ऐसी तकनीक होगी जो आपके आदेश तो मानेंगे ही साथ ही आपसे सवाल-जवाब करने में भी सक्षम होंगे।
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रहेजा डेवलपर्स की ओर से गुड़गांव के सेक्टर-79 में दुनिया का पहला आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस होम बनाया जाएगा। इस हाउसिंग परियोजना के रहेजा ने लांच भी कर दिया है। इस परियोजना के अंतर्गत स्वतंत्र फ्लोर का निर्माण किया जाएगा। सेक्टर-79 के पांच एकड़ भू-क्षेत्र पर इस परियोजना का विस्तार होगा।
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इसे अयाना नाम दिया गया है। इन घरों में पूरी तरह से ऑटोमेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक की टेस्टिंग प्रक्रिया पूरी हो गई है। इन घरों की कीमत 1.25 करोड़ से चार करोड़ रुपये तक होगी।
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दुनिया के पहले टॉकिंग होम परियोजना को लेकर रहेजा डेवलपर्स के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर नयन रहेजा काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि ऐस लग रहा है कि जैसे किसी कल्पना को हकीकत के पंख लग गए हों।
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उन्होंने बताया कि यह महत्वाकांक्षी रिहाययशी परियोजना अयाना मार्च 2018 तक पूरी हो जाएगी। लोगों को उनका घर रहने के लिए मिल जाएगा। रहेजा डेवलपर्स की प्रवक्ता डिंपल भारद्वाज ने बताया कि अयाना परियोजना के अंतर्गत बनने वाले घरों का लोग अलग-अलग नाम भी रख सकेंगे।
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सेक्टर-79 में बनने वाले अयाना टॉकिंग होम में अरब तकनीक का भी प्रयोग किया जाएगा। इसमें निर्माण में बुर्ज खलीफा टॉवर बनाने वाली कंपनी जीसीसी की सहायता ली जाएगी। साथ ही जर्मन प्री-फैब टेक्नॉलजी का भी प्रयोग होगा। जर्मन प्री-फैब तकनीक की विशेषता यह है कि इसे घर के बाहर असेंबल किया जाता है और बाद में उसे घर के अंदर असेंबल किया जाता है।
सेक्टर-79 में बनने वाले अयाना टॉकिंग होम में अरब तकनीक का भी प्रयोग किया जाएगा। इसमें निर्माण में बुर्ज खलीफा टॉवर बनाने वाली कंपनी जीसीसी की सहायता ली जाएगी। साथ ही जर्मन प्री-फैब टेक्नॉलजी का भी प्रयोग होगा। जर्मन प्री-फैब तकनीक की विशेषता यह है कि इसे घर के बाहर असेंबल किया जाता है और बाद में उसे घर के अंदर असेंबल किया जाता है।