दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल की वजह से सोमवार दिनभर मरीज इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे। गंभीर मरीजों को भी इलाज के लिए भटकना पड़ा। न तो आपातकालीन विभाग और न ही ओपीडी में मरीजों को इलाज मिल पाया। (सभी फोटो: अनिल कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली)
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अस्पताल में जी नहीं रही, स्ट्रेचर पर दम तोड़ रही है जिंदगी
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वार्ड में भर्ती मरीजों को भी इलाज में काफी दिक्कत आई।
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हड़ताल के दौरान अस्पताल में भर्ती दो मरीजों की मौत के बाद नाराज परिजनों ने जमकर हंगामा किया।
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हड़ताली डॉक्टर्स के साथ दिल्ली सरकार की बातचीत जारी है।
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रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल की वजह से भारत सरकार के सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, लेडी हार्डिंग मेडिकल अस्पताल के अलावा दिल्ली सरकार के लोकनायक, गुरुनानक आई सेंटर, जीटीबी, डीडीयू, लालबहादुर शास्त्री, हेडगेवार, अंबेडकर, संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के अलावा कई अन्य अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल के कारण मरीजों को इलाज में दिक्कत आई।
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सभी अस्पतालों के ओपीडी, आपातकालीन विभाग और वार्ड में भर्ती मरीजों को दिक्कत हुई।
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डॉक्टरों की हड़ताल के बाद बनी स्थिति का जायजा लेने स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने लोकनायक अस्पताल का दौरा किया।
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मिली जानकारी के मुताबिक, हड़ताल के दौरान दो मरीजों की मौत हो गई। एक मरीज जीटीबी में और दूसरा लोकनायक अस्पताल में भर्ती था।
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मरीजों की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
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लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सिद्धार्थ रामजी का कहना है कि एक पुरुष मरीज की मौत सोमवार सुबह हुई है, लेकिन उसकी मौत की वजह हड़ताल को नहीं बताया जा सकता।
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क्योंकि मरीज की हालत पहले से खराब थी और इसकी जानकारी परिजनों को दे दी गई थी। वहीं जीटीबी में भर्ती ज्वाला नगर के एक मरीज की भी मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया।
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परिजनों की ओर से मौत की वजह हड़ताल को बताया जा रहा है।
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वरिष्ठ चिकित्सक ड्यूटी पर थे लेकिन ओपीडी, आपातकालीन विभाग के अलावा वार्ड में भर्ती मरीजों को भी दिक्कत हुई।
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ओपीडी में कुछ मरीजों का इलाज जरूर हुआ लेकिन आम दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या काफी कम थी।
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आपातकालीन विभाग में भी उन्हीं मरीजों का इलाज किया गया, जिन्हें गंभीर हालात में अस्पताल लाया गया था। वैसे मरीज जिनकी हालत सामान्य दिख रही थी उसे अस्पताल के गेट पर सुरक्षाकर्मी रोक दे रहे थे।
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अस्पताल में जगह-जगह नोटिस चस्पा कर दिया गया था कि रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोरडा) के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत करीब 15 हजार रेडिजेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं।
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इनकी प्रमुख मांगों में अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के अलावा सुरक्षा, कर्मचारियों की कमी को पूरी करना, समय पर दवा और वेतन दिलाने की मांग शामिल है।
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रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल की वजह से ज्यादातर अस्पतालों में पहले से तय सर्जरी को टालनी पड़ी। सूत्रों की मानें तो जो आपात सर्जरी थी वह की गई लेकिन पहले से प्लान सर्जरी को टाल दी गई।
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बिना रेजिडेंट डॉक्टर्स के सर्जरी कर मरीज को वार्ड में भी रखना मुश्किल होता है इसी वजह से एहतियातन सर्जरी टाली गई। डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से मरीजों की भीड़ अस्पताल में बनी रही।
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परेशान मरीज और तीमारदार अनियंत्रित न हो जाएं इसलिए काफी संख्या में अस्पतालों में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिसकर्मियों को ओपीडी, आपातकालीन विभाग और प्रशासनिक ब्लॉक के आसपास तैयार किया गया था।