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इन तस्वीरों को देख भूल जाएंगे असहिष्णुता की पूरी बहस

Wed, 04 Nov 2015 04:49 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
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ये कार्टून राष्ट्रपति भवन तक मार्च और टीवी पर बहस में राजनैतिक लोगों के बयानों और तर्कों से अलग ही तीखा नजरिया पेश करते हैं।
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इन तस्वीरों को देख भूल जाएंगे असहिष्‍णुता की पूरी बहस

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दादरी में इकलाख की हत्या से शुरू हुई बहस अब देश में असहनशीलता और असहिष्णुता तक पहुंच चुकी है।
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इन तस्वीरों को देख भूल जाएंगे असहिष्‍णुता की पूरी बहस

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जबकि साहित्यकारों, लेखकों और फिल्मकारों का अवार्ड लौटाने का सिलसिला जारी है। IMGUR के इस कार्टून में गाय पर विवाद और पीएम मोदी पर व्यंग्य किया गया है।

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इसपर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। जबकि राजनैतिक दल भी भाजपा और एनडीए की केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर हमला बोल रहे हैं। @rprasad66 की तस्वीर में महात्मा गांधी के द्वारा अवार्ड वापसी दिखाई गई है।

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ये कार्टून किसी भी पार्टी के राष्ट्रपति भवन तक मार्च और टीवी पर बहस में राजनैतिक लोगों के बयानों और तर्कों से ज्यादा तीखे और सटीक नजर आते हैं। सतीश आचार्या के इस कार्टून में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके असहिष्णुता के खिलाफ मार्च पर व्यंग्य कसा गया है।
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इस कार्टून तस्वीर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा सरकार के खिलाफ राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने पर तंज कसा गया गया है। (फोटो-मंजुल)
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मौजूदा तमाम गतिविधियों के बीच जहां कुछ रचनात्मक लोग अवार्ड लौटाने, सरकार की आलोचना करने और बचाव करने में मशगूल हैं। वहीं पेशेवर कार्टूनिस्टों का ये नजरिया दिलचस्प है। (फोटो- इकॉनमिक टाइम्स)

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समाचार पत्रों के लिए कार्टून बनाने वाले लोगों ने अपनी कलम को अवार्ड से भी ज्यादा शक्तिशाली बना लिया है। (फोटो- श्रेयस नावरे)

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सतीश आचार्या के इस कार्टून में पीएम मोदी को वित्त मंत्री द्वारा वैचारिक असहिष्णुता का शिकार बताए जाने पर व्यंग्य किया गया है। जिसमें पीएम खुद भी 2014 में जनता से मिली पीएम की कुर्सी का अवार्ड वापस लौटाने जा रहे हैं।
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इस तस्वीर में भी कार्टूनिस्ट सतीश आचार्या ने साहित्य अकादमी के लेखकों द्वारा अवार्ड वापसी को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझाया है।
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